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धुएं की चादर में लिपटा शहर, अधिकतम एक्यूआई 500 और न्यूनतम 286
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रोहतक। पश्चिमी विक्षोभ के चलते शनिवार शाम को चली तेज हवाओं के साथ हुई बूंदाबांदी ने वायुमंडल में प्रदूषण स्तर को कुछ कम किया और बढ़ते प्रदूषण स्तर में कमी ला दी। हालांकि शनिवार को शाम पांच बजे तक एक्यूआई औसतन 367, अधिकतम 500 पार व न्यूनतम 286 दर्ज किया गया। दिन भर आसमान ने धुएं की चादर ओढ़ कर रखी और सूर्यदेव इस चादर और बादलों में ओझल रहे। आसमान में धुएं के चलते लोगों को सांस लेने में समस्या हुई।
जहरीली हवा का कहर शनिवार को भी जारी रहा। शाम को तेज हवा के साथ हुई बूंदाबांदी के बावजूद प्रदूषण का स्तर अत्यधिक गंभीर की श्रेणी में ही रहा। लाइव वेदर ऑफ इंडिया के सीईओ नवदीप ने बताया कि प्रदूषण से निजात अगले सप्ताह तक मिल सकती है। शनिवार को पश्चिमी विक्षोभ के चलते हवा चली है और बाद में पश्चिमी विक्षोभ को नमी देने के लिए अरब सागर से एमएएचए साइक्लोन आ रहा है। इससे हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली एनसीआर एरिया में तेज हवाओं के साथ बूंदाबांदी, ओलावृष्टि होने की संभावना है। इनसे प्रदूषण का स्तर गिरने की संभावना है। पश्चिमी विक्षोभ का असर राजस्थान से कश्मीर तक है।
दोपहर एक बजे घटा एक्यूआई, फिर बढ़ता चला गया
शनिवार को सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के अनुसार एक्यूआई सुबह छह बजे 408 रहा, आठ बजे यह 372, नौ बजे 337 और एक बजे घटकर 286 पहुंच गया। इसके बाद प्रदूषण का स्तर बढ़ता चला गया और यह शाम को पांच बजे 482 पहुंच गया।
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प्रदूषण के चलते संक्रमण का शिकार हो रहे बच्चे
रोहतक। वातावरण में बढ़ता प्रदूषण स्तर आमजन के स्वास्थ्य को बिगाड़ रहा है। इसका शिकार सबसे अधिक बच्चे हो रहे हैं। हर दिन जिला अस्पताल में 350 के करीब मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इसमें बुखार, सांस की समस्या, निमोनिया, खांसी, अस्थमा आदि के अधिक मरीज हैं। इसके अलावा बच्चाें व बड़ों की आंखों में एलर्जी की समस्या बढ़ रही है। जिला अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. जसबीर परमार ने बताया कि प्रदूषण के चलते हर दिन मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। बचाव के लिए जरूरी है कि बच्चों को कमरे में ही रखें, बाहर न खेलने दें। इस मौसम में ठंडी चीज, तला व बासी खाना न दें। गर्म दूध, खिचड़ी, दलिया, ताजा फल खाने के साथ पानी उबाल कर पीएं। मौसम के चलते इस समय वार्ड में सात से आठ मरीजों को दाखिल किया गया है। डॉ. परमार ने बताया कि बच्चों के लिए जरूरी है कि वह बाहर निकलने में मास्क का प्रयोग करें और कमरे में वेंटीलेशन का ध्यान रखें। अधिकांश मरीज ग्रामीण क्षेत्र से हैं, उनके लिए जरूरी है कि इस समय चूल्हा व हुक्के से परहेज करें। प्रदूषण के चलते पहले ही हवा में आक्सीजन की कमी है, इससे बच्चों को और भी समस्या हो सकती है। जुकाम होने पर बाम लगाने की बजाए भांप दें और राहत न मिलने पर डॉक्टर को दिखाएं।
2018 में दिवाली के तीन दिन बाद साफ हो गया था वातावरण, इस बार एक सप्ताह से लगातार बढ़ रहा वायु गुणवत्ता सूचकांक
रोहतक। दिवाली के बाद से ही जिले में वायु प्रदूषण का कहर लगातार जारी है, एक सप्ताह हो गया और वायु प्रदूषण कम होने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार को तो प्रदूषण का लेवल 500 के पार पहुंच गया, जो इस सीजन का सबसे अधिक है। जबकि 2018 की बात करें तो नवंबर 2018 में 7 नवंबर की दिवाली थी, जिसके तीन दिन बाद तक ही एक्यूआई 350 पार रहा था। दिवाली के चौथे दिन ही वातावरण साफ हो गया था। जबकि इस वर्ष दिवाली के दिन से शुरू हुआ एक्यूआई लगातार बढ़ता जा रहा है। जो 2017 के नवंबर माह की तरफ संकेत कर रहा है, जिसमें लगभग पूरा महा एक्यूआई 300 से पार रहा था। कई बार तो एक्यूआई 500 से पार भी पहुंच गया था। वहीं इस बार भी एक्यूआई का बढ़ता स्तर भयावह स्थिति की और पहुंचता जा रहा है। हालांकि जिले में अब तक पराली जलाने का भी कोई केस सामने नहीं आया है और धान की कटाई भी 30 प्रतिशत तक ही हुई है। जबकि जिले में 47 हजार हेक्टेयर में धान की फसल उगाई गई है। अगर आने वाले दिनों में किसान पराली जलाते हैं तो जिले में और भी भयावह स्थिति होने के आसार है।
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जहरीली हवा का कहर शनिवार को भी जारी रहा। शाम को तेज हवा के साथ हुई बूंदाबांदी के बावजूद प्रदूषण का स्तर अत्यधिक गंभीर की श्रेणी में ही रहा। लाइव वेदर ऑफ इंडिया के सीईओ नवदीप ने बताया कि प्रदूषण से निजात अगले सप्ताह तक मिल सकती है। शनिवार को पश्चिमी विक्षोभ के चलते हवा चली है और बाद में पश्चिमी विक्षोभ को नमी देने के लिए अरब सागर से एमएएचए साइक्लोन आ रहा है। इससे हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली एनसीआर एरिया में तेज हवाओं के साथ बूंदाबांदी, ओलावृष्टि होने की संभावना है। इनसे प्रदूषण का स्तर गिरने की संभावना है। पश्चिमी विक्षोभ का असर राजस्थान से कश्मीर तक है।
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दोपहर एक बजे घटा एक्यूआई, फिर बढ़ता चला गया
शनिवार को सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के अनुसार एक्यूआई सुबह छह बजे 408 रहा, आठ बजे यह 372, नौ बजे 337 और एक बजे घटकर 286 पहुंच गया। इसके बाद प्रदूषण का स्तर बढ़ता चला गया और यह शाम को पांच बजे 482 पहुंच गया।
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प्रदूषण के चलते संक्रमण का शिकार हो रहे बच्चे
रोहतक। वातावरण में बढ़ता प्रदूषण स्तर आमजन के स्वास्थ्य को बिगाड़ रहा है। इसका शिकार सबसे अधिक बच्चे हो रहे हैं। हर दिन जिला अस्पताल में 350 के करीब मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इसमें बुखार, सांस की समस्या, निमोनिया, खांसी, अस्थमा आदि के अधिक मरीज हैं। इसके अलावा बच्चाें व बड़ों की आंखों में एलर्जी की समस्या बढ़ रही है। जिला अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. जसबीर परमार ने बताया कि प्रदूषण के चलते हर दिन मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। बचाव के लिए जरूरी है कि बच्चों को कमरे में ही रखें, बाहर न खेलने दें। इस मौसम में ठंडी चीज, तला व बासी खाना न दें। गर्म दूध, खिचड़ी, दलिया, ताजा फल खाने के साथ पानी उबाल कर पीएं। मौसम के चलते इस समय वार्ड में सात से आठ मरीजों को दाखिल किया गया है। डॉ. परमार ने बताया कि बच्चों के लिए जरूरी है कि वह बाहर निकलने में मास्क का प्रयोग करें और कमरे में वेंटीलेशन का ध्यान रखें। अधिकांश मरीज ग्रामीण क्षेत्र से हैं, उनके लिए जरूरी है कि इस समय चूल्हा व हुक्के से परहेज करें। प्रदूषण के चलते पहले ही हवा में आक्सीजन की कमी है, इससे बच्चों को और भी समस्या हो सकती है। जुकाम होने पर बाम लगाने की बजाए भांप दें और राहत न मिलने पर डॉक्टर को दिखाएं।
2018 में दिवाली के तीन दिन बाद साफ हो गया था वातावरण, इस बार एक सप्ताह से लगातार बढ़ रहा वायु गुणवत्ता सूचकांक
रोहतक। दिवाली के बाद से ही जिले में वायु प्रदूषण का कहर लगातार जारी है, एक सप्ताह हो गया और वायु प्रदूषण कम होने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार को तो प्रदूषण का लेवल 500 के पार पहुंच गया, जो इस सीजन का सबसे अधिक है। जबकि 2018 की बात करें तो नवंबर 2018 में 7 नवंबर की दिवाली थी, जिसके तीन दिन बाद तक ही एक्यूआई 350 पार रहा था। दिवाली के चौथे दिन ही वातावरण साफ हो गया था। जबकि इस वर्ष दिवाली के दिन से शुरू हुआ एक्यूआई लगातार बढ़ता जा रहा है। जो 2017 के नवंबर माह की तरफ संकेत कर रहा है, जिसमें लगभग पूरा महा एक्यूआई 300 से पार रहा था। कई बार तो एक्यूआई 500 से पार भी पहुंच गया था। वहीं इस बार भी एक्यूआई का बढ़ता स्तर भयावह स्थिति की और पहुंचता जा रहा है। हालांकि जिले में अब तक पराली जलाने का भी कोई केस सामने नहीं आया है और धान की कटाई भी 30 प्रतिशत तक ही हुई है। जबकि जिले में 47 हजार हेक्टेयर में धान की फसल उगाई गई है। अगर आने वाले दिनों में किसान पराली जलाते हैं तो जिले में और भी भयावह स्थिति होने के आसार है।