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सेना को कमजोर करेगी अग्निपथ योजना : हुड्डा
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कांग्रेस के धरने में पहुंचे पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा व विधायक। संवाद
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रोहतक। अग्निपथ योजना देश की सेना को कमजोर व उसके संख्या बल को कम करेगी। यह योजना न तो देश हित में है, न देश की सुरक्षा के हित में। न फौज और न ही युवाओं के हित में है। हम देश की सेना को कमजोर नहीं होने देंगे। इसलिए कांग्रेस लगातार आंदोलनरत है। यह कहना है पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा का। वह सोमवार को अग्निपथ योजना के विरुद्ध चर्च रोड पर कांग्रेस के धरने को संबोधित कर रहे थे।
हुड्डा ने कहा कि हम लगातार सेना में अहीर रेजिमेंट बनाए जाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार नमक, नाम व निशान के सिद्धांत को ही कमजोर करने जा रही है। नई योजना के जरिये फौज में ही स्थायी व अस्थायी, दो तरह की फौज बनाई जा रही है। दोनों में सामंजस्य कैसे बैठेगा? देश को आगे बढ़ाना है तो सबसे मजबूत नारा ‘जय जवान, जय किसान’ का नारा है। इसे कमजोर करके देश को मजबूत नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि जब देश आजाद हुआ तो देश के पास चार लाख सैनिक थे, जो पिछले 70 वर्षों में बढ़कर 14 लाख हुए। अब पिछले तीन साल से सेना की भर्ती नहीं होने की वजह से दो लाख स्थायी पद खाली पड़े हैं। सरकार को खाली पड़े पदों पर पक्की भर्ती करनी चाहिए थी। ऐसा करने के बजाय सरकार युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाली योजना लेकर आ गई। यह योजना लागू हुई तो धीरे-धीरे हमारी सेना का संख्या बल घटकर छह लाख रह जाएगा। विशेषकर हरियाणा पर इसका बुरा असर पड़ेगा। अब तक हरियाणा से हर साल 5 से 7 हजार युवा सेना में भर्ती होते थे। पिछले तीन साल में नियमित भर्ती होती तो करीब 20 हजार युवा और सेना में जाते।
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अग्निपथ योजना के तहत अब सिर्फ 963 अग्निवीर ही भर्ती होंगे। उनमें से भी 75 प्रतिशत को चार साल बाद बेरोजगारी के दलदल में धकेल दिया जाएगा। सरकार की ओर से अग्निवीरों को पक्की नौकरी देने के दावे पर उन्होंने कहा कि सरकार हर साल रिटायर होने वाले पूर्व सैनिकों को नौकरी क्यों नहीं देती। सरकार को बताना चाहिए कि अब तक 29,275 पूर्व सैनिकों में से उसने सिर्फ 543 को ही नौकरी क्यों दी? अगर हरियाणा सरकार वास्तव में अग्निवीरों को नौकरी देना चाहती है तो पहले उन्हें हरियाणा में नियमित नौकरी देनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि वह किसी भी चीज का सिर्फ विरोध के लिए विरोध नहीं करते, बल्कि खुद सैनिक स्कूल के विद्यार्थी होने के नाते आधे सैनिक हैं। इसलिए वह सेना की कार्यप्रणाली को समझते हैं। भारतीय सेना का नाम दुनिया में सम्मान के साथ लिया जाता है। केंद्र सरकार इजराइल का उदाहरण देकर देश पर अग्निपथ योजना को थोपना चाहती है। इजराइल व भारत की स्थिति अलग है। इजराइल जैसे छोटे देशों में बेरोजगारी नहीं है। वहां के लोगों को जबरदस्ती फौज में भेजा जाता है। जबकि सेना में भर्ती होना हमारे देश के युवाओं का सपना होता है। देश का युवा सैनिक बनकर खुद को गौरवान्वित महसूस करता है।
भारत की सीमा के एक तरफ पाकिस्तान और एक तरफ चीन बैठा है। ऐसे में देश की सुरक्षा के साथ इस तरह का प्रयोग करना खतरनाक साबित होगा। सरकार कोई मिलिट्री रिफॉर्म करना ही चाहती है तो उसे पहले सभी प्रभावित वर्गों से बात करनी चाहिए। इजराइल की बात करने वाली सरकार को रूस का उदाहरण भी देखना चाहिए। रूस में कॉम्बैट फोर्सेज की ट्रेनिंग ही पांच साल में पूरी होती है। भारत में सिर्फ चार साल में अग्निवीर को रिटायर करने की नीति अपनाई जा रही है।
वकीलों के प्रतिनिधिमंडल ने की मुलाकात
धरना स्थल पर वकीलों का एक प्रतिनिधिमंडल पूर्व मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचा। उनकी मांगों का जिक्र करते हुए हुड्डा ने कहा कि न्यायिक परिसर, सचिवालय व अन्य सरकारी दफ्तरों को शहर से बाहर निकालने का पुरजोर विरोध करते रहेंगे। सरकार किसी व्यक्ति विशेष को फायदा पहुंचाने के लिए ऐसा कर रही है। यह फैसला यहां के लोग और जनप्रतिनिधि करेंगे, न कि कोई अधिकारी। जब तक भूपेंद्र सिंह हुड्डा है, तब तक सरकारी कार्यालयों को शहर से बाहर नहीं जाने दिया जाएगा।
धरने पर डायरेक्ट बिजली सप्लाई ने उठाए सवाल
अग्निपथ योजना के विरोध में कांग्रेस के चर्च रोड पर दिए जा रहे धरने पर पूर्व मुख्यमंत्री के भाषण के दौरान अचानक बिजली गुल हो गई। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार बिजली तो काट सकती है, लेकिन विपक्ष की आवाज नहीं दबा सकती। बिजली काफी देर तक गुल रही। आरोप है कि इस दौरान कांग्रेसियों ने डायरेक्ट सप्लाई जोड़ी। हालांकि इस संबंध में कांग्रेस विधायक बीबी बतरा से बात की गई तो उन्होंने साफ कहा कि हमने बिजली सप्लाई नहीं ली। हमारे पास जेनरेटर था। इसमें कार्बन आने से कुछ देर के लिए बिजली गुल हो गई थी। डायरेक्ट बिजली सप्लाई का सवाल ही नहीं उठता।
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हुड्डा ने कहा कि हम लगातार सेना में अहीर रेजिमेंट बनाए जाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार नमक, नाम व निशान के सिद्धांत को ही कमजोर करने जा रही है। नई योजना के जरिये फौज में ही स्थायी व अस्थायी, दो तरह की फौज बनाई जा रही है। दोनों में सामंजस्य कैसे बैठेगा? देश को आगे बढ़ाना है तो सबसे मजबूत नारा ‘जय जवान, जय किसान’ का नारा है। इसे कमजोर करके देश को मजबूत नहीं किया जा सकता।
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उन्होंने कहा कि जब देश आजाद हुआ तो देश के पास चार लाख सैनिक थे, जो पिछले 70 वर्षों में बढ़कर 14 लाख हुए। अब पिछले तीन साल से सेना की भर्ती नहीं होने की वजह से दो लाख स्थायी पद खाली पड़े हैं। सरकार को खाली पड़े पदों पर पक्की भर्ती करनी चाहिए थी। ऐसा करने के बजाय सरकार युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाली योजना लेकर आ गई। यह योजना लागू हुई तो धीरे-धीरे हमारी सेना का संख्या बल घटकर छह लाख रह जाएगा। विशेषकर हरियाणा पर इसका बुरा असर पड़ेगा। अब तक हरियाणा से हर साल 5 से 7 हजार युवा सेना में भर्ती होते थे। पिछले तीन साल में नियमित भर्ती होती तो करीब 20 हजार युवा और सेना में जाते।
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अग्निपथ योजना के तहत अब सिर्फ 963 अग्निवीर ही भर्ती होंगे। उनमें से भी 75 प्रतिशत को चार साल बाद बेरोजगारी के दलदल में धकेल दिया जाएगा। सरकार की ओर से अग्निवीरों को पक्की नौकरी देने के दावे पर उन्होंने कहा कि सरकार हर साल रिटायर होने वाले पूर्व सैनिकों को नौकरी क्यों नहीं देती। सरकार को बताना चाहिए कि अब तक 29,275 पूर्व सैनिकों में से उसने सिर्फ 543 को ही नौकरी क्यों दी? अगर हरियाणा सरकार वास्तव में अग्निवीरों को नौकरी देना चाहती है तो पहले उन्हें हरियाणा में नियमित नौकरी देनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि वह किसी भी चीज का सिर्फ विरोध के लिए विरोध नहीं करते, बल्कि खुद सैनिक स्कूल के विद्यार्थी होने के नाते आधे सैनिक हैं। इसलिए वह सेना की कार्यप्रणाली को समझते हैं। भारतीय सेना का नाम दुनिया में सम्मान के साथ लिया जाता है। केंद्र सरकार इजराइल का उदाहरण देकर देश पर अग्निपथ योजना को थोपना चाहती है। इजराइल व भारत की स्थिति अलग है। इजराइल जैसे छोटे देशों में बेरोजगारी नहीं है। वहां के लोगों को जबरदस्ती फौज में भेजा जाता है। जबकि सेना में भर्ती होना हमारे देश के युवाओं का सपना होता है। देश का युवा सैनिक बनकर खुद को गौरवान्वित महसूस करता है।
भारत की सीमा के एक तरफ पाकिस्तान और एक तरफ चीन बैठा है। ऐसे में देश की सुरक्षा के साथ इस तरह का प्रयोग करना खतरनाक साबित होगा। सरकार कोई मिलिट्री रिफॉर्म करना ही चाहती है तो उसे पहले सभी प्रभावित वर्गों से बात करनी चाहिए। इजराइल की बात करने वाली सरकार को रूस का उदाहरण भी देखना चाहिए। रूस में कॉम्बैट फोर्सेज की ट्रेनिंग ही पांच साल में पूरी होती है। भारत में सिर्फ चार साल में अग्निवीर को रिटायर करने की नीति अपनाई जा रही है।
वकीलों के प्रतिनिधिमंडल ने की मुलाकात
धरना स्थल पर वकीलों का एक प्रतिनिधिमंडल पूर्व मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचा। उनकी मांगों का जिक्र करते हुए हुड्डा ने कहा कि न्यायिक परिसर, सचिवालय व अन्य सरकारी दफ्तरों को शहर से बाहर निकालने का पुरजोर विरोध करते रहेंगे। सरकार किसी व्यक्ति विशेष को फायदा पहुंचाने के लिए ऐसा कर रही है। यह फैसला यहां के लोग और जनप्रतिनिधि करेंगे, न कि कोई अधिकारी। जब तक भूपेंद्र सिंह हुड्डा है, तब तक सरकारी कार्यालयों को शहर से बाहर नहीं जाने दिया जाएगा।
धरने पर डायरेक्ट बिजली सप्लाई ने उठाए सवाल
अग्निपथ योजना के विरोध में कांग्रेस के चर्च रोड पर दिए जा रहे धरने पर पूर्व मुख्यमंत्री के भाषण के दौरान अचानक बिजली गुल हो गई। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार बिजली तो काट सकती है, लेकिन विपक्ष की आवाज नहीं दबा सकती। बिजली काफी देर तक गुल रही। आरोप है कि इस दौरान कांग्रेसियों ने डायरेक्ट सप्लाई जोड़ी। हालांकि इस संबंध में कांग्रेस विधायक बीबी बतरा से बात की गई तो उन्होंने साफ कहा कि हमने बिजली सप्लाई नहीं ली। हमारे पास जेनरेटर था। इसमें कार्बन आने से कुछ देर के लिए बिजली गुल हो गई थी। डायरेक्ट बिजली सप्लाई का सवाल ही नहीं उठता।