फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rohtak News ›   after ten years black hated eyebees family increase

दस साल बाद ब्लैक हैडेट आईबिस का बढ़ा परिवार

Sun, 12 Apr 2020 01:27 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 12 Apr 2020 01:27 AM IST
विज्ञापन
after ten years black hated eyebees family increase
रोहतक। चिड़ियाघर में वाटर बर्ड के लिए बनाई गई अस्थाई एवरी के ऊपरी हिस्से पर बनाए घोसले में बच्चों - फोटो : RohtakCity
रोहतक। पर्यावरण में बदलाव का असर चिड़ियाघर परिवार पर साफ नजर आ रहा है। वाटर बर्ड एवरी में हाल ही में चार नए पक्षी तो तालाब में छह नन्हें मगरमच्छ अठखेलियां करने लगे हैं। पिछले कुछ दिनों में आया यह बदलाव चिड़ियाघर परिवार के सदस्यों की संख्या बढ़ाने वाला रहा है। खासकर ब्लैक हैडेड आईबिस का जोड़ा। चिड़ियाघर में दस साल पहले आए जोड़े ने पहली बार अंडे दिए। इनमें से चार बच्चे निकले हैं। इसके साथ इस परिवार में अब छह सदस्य हो गए हैं।
विज्ञापन

दरअसल, दक्षिण एशिया व जापान में पाए गए जाने वाले ब्लैक हैडेड आईबिस पक्षियों के जोड़े को एक दशक पहले चिड़ियाघर लाया गया था। इसके बाद से यह जोड़ा वाटर बर्ड एवरी परिवार के सदस्यों के साथ रह रहा था। पिछले दस वर्षों में इस जोड़े की मादा ने न तो अंडा दिया और न ही परिवार बढ़ा। इस वर्ष कोरोना संक्रमण के चलते लागू हुए लॉकडाउन ने ध्वनि व वायु प्रदूषण का स्तर कम कर दिया। साथ ही चिड़ियाघर में पक्षियों के लिए नई बर्ड एवरी बनाने के चलते पुरानी एवरी तोड़ दी गई है। फिलहाल वाटर बर्ड्स को अस्थाई एवरी में रखा गया है। यहां ब्लैक हैडेडे आईबिस ने पहली बार अंडे दिए। इन अंडों से चार बच्चे निकले हैं। इस परिवार के बढ़ पाने की वजह बदलाव है।
विज्ञापन

34 साल पहले बनी थी वाटर बर्ड एवरी
चिड़ियाघर में 34 साल पहले वर्ष 1986 में वाटर बर्ड एवरी बनी थी। उस समय मानक या नियम नहीं थे। यहां पानी मे रहने वाले पक्षियों को रखा गया। इसी एवरी में ब्लैक हैडेड आईबिस का जोड़ा भी रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन

एक्सपर्ट का कहना है कि पुरानी एवरी में पक्षियों की भीड़ थी। यहां ब्लैक हैडेड आईबिस के लायक माहौल नहीं था। इस ओर ध्यान भी नहीं गया। इस कारण इस जोड़े को मिलन का सही माहौल नहीं मिल पाया।
नर लाता है लकड़ियां, मादा बनाती है घोंसला
ब्लैक हैडेड आईबिस की आयु 28 से 30 वर्ष होती है। यह जोड़ा दस साल पहले आया था। उस समय यह जोडा करीब डेढ़ साल का था। नर लकड़ियां लाता है। मादा घोंसला बनाती है। यह घोंसला 30 से 35 सेंटीमीटर से आकार का होता है। इसी में इस जोड़े ने पहली बार अंडे दिए। इनसे चार बच्चे निकले हैं। मिलन के एक माह बाद मादा अंडे देती है। मादा एक बार में दो से चार अंडे देती है। अंडे से 21 से 24 दिन में बच्चे निकल आते हैं।
डॉ. अशोक खासा, चिड़ियाघर।
छह नन्हें मगरमच्छ कर रहे अठखेलियां
चिड़ियाघर के तालाब में रहने वाले मगरमच्छों का परिवार भी बढ़ा है। इस वर्ष इस परिवार में छह नए सदस्य आए हैं। ये छह नन्हें मगरमच्छ जमीन व पानी पर अठखेलियां करने में व्यस्त है। हालांकि ज्यादातर मादा इन्हें अपने मुंह में दबाए रहती है। ऐसा वह आसमान में उड़ने वाले दुश्मन से उन्हें बचाने के लिए करती है।

चिड़ियाघर में सुुधार किया जा रहा है। यहां नए मेहमान लाए भी जा रहे हैं और आ भी रहे हैं। ब्लैक हैडेड आईबिस ने पहली बार चार बच्चे दिए हैं। इससे यह परिवार छह सदस्यों का हो गया है। इसके अलावा मादा मगरमच्छ ने भी छह बच्चे दिए हैं। लायन व टाइगर यहां आ चुके हैं। जल्दी इसे प्रदेश का सबसे बेहतर चिड़ियाघर बनाया जाएगा।
यशपाल, मंडलीय वन्य प्राणी अधिकारी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed