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Hindi News ›   Haryana ›   Rohtak News ›   A formidable Sarpanch... Dr. Kashmira is breaking down the walls of social norms and reaching for the sky.

Rohtak News: धुरंधर सरपंच...सामाजिक रूढ़ियों की दीवारों को तोड़ डॉ. कश्मीरा छू रहीं आसमां

Wed, 14 Jan 2026 02:38 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 14 Jan 2026 02:38 AM IST
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A formidable Sarpanch... Dr. Kashmira is breaking down the walls of social norms and reaching for the sky.
19...कश्मीरी कल्सन,लाहली सरपंच
रोहतक। जिले के गांव लाहली की सरपंच डॉ. कश्मीरी कलसन की कहानी केवल एक महिला के सरपंच बनने की नहीं सामाजिक सोच बदलने की मिसाल भी है। साधारण ग्रामीण परिवार की इस बेटी ने शिक्षा के बूते खुद को साबित किया है।
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समाजशास्त्र में पीएचडी करने के बाद भी उनका सफर कठिनाई भरा रहा। पढ़ाई, परिवार और सामाजिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना उनके जीवन की बड़ी चुनौती रही।
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सरपंच बनने से पहले वह रोहतक स्थित एक सेंटर में अकाउंटेंट के रूप में कार्यरत थीं। वहीं से उन्होंने गांव की जमीनी हकीकत को नजदीक से देखा। इनमें सफाई की समस्या, कूड़े का सही निस्तारण न होना, महिलाओं की आवाज का दब जाना और पंचायतों में उनकी सीमित भागीदारी मुख्य थी।
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जब पंचायत चुनाव में महिला एससी सीट आरक्षित हुई तो उन्होंने इसे केवल अवसर नहीं, जिम्मेदारी माना। चुनावी संघर्ष, सामाजिक ताने व महिला नेतृत्व को लेकर बनी मानसिक दीवारें उनके सामने थीं।
उन्होंने पीछे हटने के बजाय डटकर सामना किया। आज डॉ. कश्मीरी कलसन गांव ही नहीं, अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन चुकी हैं। संवाद




शिक्षा को बनाया ताकत का आधार
डॉ. कश्मीरी कलसन मानती हैं कि शिक्षा ने उन्हें सवाल पूछने और समाधान खोजने की शक्ति दी। समाजशास्त्र में पीएचडी ने उन्हें गांव की समस्याओं को सामाजिक नजरिए से समझने में मदद की जबकि बीएड ने संवाद और नेतृत्व कौशल को मजबूत किया। ग्रामीण परिवेश में महिला सरपंच को गंभीरता से न लेना एक बड़ी चुनौती थी। शुरुआत में पंचायत बैठकों में उनकी बातों को नजरअंदाज किया गया। निरंतर काम, शत प्रतिशत उपस्थिति और फैसलों की पारदर्शिता ने सोच बदल दी। डॉ. कश्मीरी कलसन कहती हैं कि खुद पर भरोसा और निरंतर मेहनत ही हर महिला की सबसे बड़ी ताकत है।


गांव की समस्याओं को प्राथमिकता दी
सफाई, कूड़ा प्रबंधन और महिलाओं की भागीदारी उनकी पहली प्राथमिकता रही। उन्होंने खुद उदाहरण बनकर आगे बढ़ना चुना जिससे गांव की महिलाएं भी खुलकर आगे आने लगीं। गांव लाहली में लाइब्रेरी व ओपन जिम जैसी आधुनिक सुविधाएं शुरू हो चुकी हैं। पारंपरिक हरियाणवी दामन-कुर्ती पहनकर राष्ट्रीय मंच पर पहुंचना उनके लिए गर्व का क्षण रहा। यह संदेश है कि जड़ों से जुड़कर भी ऊंचाइयों तक पहुंचा जा सकता है। उन्होंने अब तक धुरंधर संरपंच, स्वच्छता गांव को दूसरा स्थान, आदर्श पंच, सरपंच शक्ति आदि अवाॅर्ड मिल चुके हैं।
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