रोहतक: शादी से एक दिन पहले आग ने झुलसाए दुल्हन के सपने, एएसपी ने 15 घंटे में 30 लाख जुटा संवारा जीवन
एएसपी महम हेमेंद्र मीना ने सोशल मीडिया के जरिये राजस्थान दोसा की बेटी के लिए आर्थिक मदद जुटाई। पुलिस अधिकारी से अलग सामाजिक व्यक्ति के रूप यह पहचान दूसरों को प्रेरित करने वाली है।
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सेवा, सुरक्षा, सहयोग के लिए अपनी जान की बाजी लगाने वाली पुलिस का नया चेहरा सामने आया है। शादी से एक दिन पहले आग में झुलसे एक बेटी की शादी के सपनों में रंग भर कर एएसपी महम हेमेंद्र मीना ने मिशाल पेश की है। अधिकारी ने सोशल मीडिया पर 15 घंटे में 30 लाख रुपये की मदद जुटा कर राजस्थान के दौसा में जरूरतमंद बेटी की शादी कराने का पुण्य कमाया है। पुलिस अधिकारी से अलग सामाजिक व्यक्ति के रूप यह पहचान दूसरों को प्रेरित करने वाली है।
दरअसल, राजस्थान के दौसा में मंगलवार को एक बेटी की शादी थी। एक दिन पहले ही इस बेटी के घर में आग लग गई। इसमें शादी का सामान व घर का अन्य सामान जलकर राख हो गया। शॉर्ट सर्किट से लगी इस आग ने शादी कर उसका घर बसाने का सपना भी जला डाला। पिता सात साल पहले ही बीमारी के कारण चल बसे थे।
मां ही अपनी बेटी व दो बेटों का पालन कर रही हैं। इस घटना की जानकारी मिलने पर एएसपी ने नैतिकता के आधार पर इस बेटी की मदद का बीड़ा उठाया। इसके लिए सोशल मीडिया पर उसकी शादी में आर्थिक मदद का आह्वान किया।
एएसपी के इस आह्वान पर लोगों ने बिन पिता की इस बेटी के लिए दिल खोलकर आर्थिक मदद दी। 15 घंटे में 30 लाख रुपये पीड़ित परिवार के लिए इकट्ठा हो गए। यह राशि परिवार को देकर मंगलवार को बेटी की शादी कराई गई। यही नहीं, शादी के लिए पर्याप्त राशि आने के बाद सोशल मीडिया पर और राशि न देने का भी संदेश दिया गया। शादी पर हुए खर्च के बाद शेष राशि से महिला अपना घर भी दोबारा बनवा सकेगी। इस राहत भरे कदम के लिए सभी एएसपी की सराहना कर रहे हैं।
सोशल मीडिया बड़ी ताकत है। इसके जरिये समाज को सकारात्मक संदेश देकर प्रेरित करना संभव है। हमें सही काम व उद्देश्य के लिए इसका उपयोग करना चाहिए। मेरा यह संदेश भी लोगों को जागरूक करने के लिए रहा।पुलिसिंग से इतर अपनी नौकरी के अलावा भी आम आदमी की तरह देश व समाज हित में काम कर सकता हूं। समाज के प्रति अपने सेवा भाव के चलते ही यह काम कर पाया। यह काम किसी पद या नौकरी के बगैर भी संभव है। इसके लिए दृढ़ संकल्प, कुछ करने की ललक व समाज सेवा का जुनून होना चाहिए। इस बेटी की शादी के लिए हाथ बढ़ाकर मदद करने वालों की सोची भी यही रही। इसके चलते उसका घर बस पाया। -हेमेंद्र मीना, एएसपी, महम।