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आंगनबाड़ी मदर ग्रुप समिति ने किया प्रदर्शन
Rohtak
Updated Sat, 30 Nov 2013 05:47 AM IST
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रोहतक। आंगनबाड़ी मदर ग्रुप समिति ने अपनी मांगें पूरी करवाने के लिए शहर में प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री के नाम जिला उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अगर सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानी तो वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे।
शुक्रवार को आंगनबाड़ी मदर ग्रुप समिति की सदस्य जनवादी महिला समिति कार्यालय में एकत्रित हुए। जनवादी महिला समिति की राज्य सचिव सविता ने कहा कि हरियाणा सरकार महिला सशक्तीकरण का ढिंढोरा पीट रही है, लेकिन मदर ग्रुप की महिलाओं का हर स्तर पर शोषण हो रहा है। समिति की राष्ट्रीय महासचिव जगमती सांगवान ने कहा कि हरियाणा प्रदेश में महिलाओं को आंगनबाड़ी में खाना बनाने के काम के बदले महीने में केवल 200-300 रुपये ही दिए जा रहे, जो महिलाओं के साथ काम के नाम पर धोखा किया जा रहा है।
सरकार से ये मांगें की
राशन बनाने वाली महिलाओं का मेहनताना तीन गुना किया जाए। राशन बनाने का सारा सामान ईंधन, गैस सिलेंडर, बर्तन व कच्चा माल (दलिया आटा आलू) आदि का प्रबंध सरकार द्वारा किया जाए। सभी आंगनबाड़ी में खाना बनाने वाली सभी महिलाओं का पंजीकरण किया जाए और अलग-अलग जगहों पर हटाई गई महिलाओं को काम पर वापस लिया जाए। स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को 4 प्रतिशत से कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध करवाया जाए। उत्पादन के लिए प्रशिक्षण व तैयार माल की मार्केटिंग का काम सरकार द्वारा किया जाए। राशन बनाने वाली मदर ग्रुप की वर्कर्स को बीपीएल की श्रेणी में रखा जाए।
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शुक्रवार को आंगनबाड़ी मदर ग्रुप समिति की सदस्य जनवादी महिला समिति कार्यालय में एकत्रित हुए। जनवादी महिला समिति की राज्य सचिव सविता ने कहा कि हरियाणा सरकार महिला सशक्तीकरण का ढिंढोरा पीट रही है, लेकिन मदर ग्रुप की महिलाओं का हर स्तर पर शोषण हो रहा है। समिति की राष्ट्रीय महासचिव जगमती सांगवान ने कहा कि हरियाणा प्रदेश में महिलाओं को आंगनबाड़ी में खाना बनाने के काम के बदले महीने में केवल 200-300 रुपये ही दिए जा रहे, जो महिलाओं के साथ काम के नाम पर धोखा किया जा रहा है।
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सरकार से ये मांगें की
राशन बनाने वाली महिलाओं का मेहनताना तीन गुना किया जाए। राशन बनाने का सारा सामान ईंधन, गैस सिलेंडर, बर्तन व कच्चा माल (दलिया आटा आलू) आदि का प्रबंध सरकार द्वारा किया जाए। सभी आंगनबाड़ी में खाना बनाने वाली सभी महिलाओं का पंजीकरण किया जाए और अलग-अलग जगहों पर हटाई गई महिलाओं को काम पर वापस लिया जाए। स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को 4 प्रतिशत से कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध करवाया जाए। उत्पादन के लिए प्रशिक्षण व तैयार माल की मार्केटिंग का काम सरकार द्वारा किया जाए। राशन बनाने वाली मदर ग्रुप की वर्कर्स को बीपीएल की श्रेणी में रखा जाए।
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