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नहीं बनीं जलघर की टूटी दीवार, टैंक में जमा है बारिश का पानी
Updated Thu, 10 Aug 2017 01:47 AM IST
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नहीं बनीं टूटी दीवार, टैंक में जमा है बारिश का पानी
बहल। सिधनवा गांव के जलघर में खेतों से बहकर बारिश का पानी टैंक में एकत्रित हो गया है। टैंक की मरम्मत के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाने से ग्रामीणों को दूषित पानी पीना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने जलघर की टूटी दीवार ठीक कराने की मांग की है।
जानकारी के अनुसार लोगों की सुविधा के लिए जनस्वास्थ्य विभाग ने सिधनवा गांव में एक जलघर बनाया गया था। जिस समय जलघर बनाया जा रहा था उस समय भी लोगों ने इसमें घटिया सामग्री लगाए जाने का आरोप लगाया था लेकिन विभाग ने इस मामले में अनदेखी की। जब बारिश आई तो जलघर के टैंक में दरार आ गई। इसे बाद में मरम्मत कराकर सही किया गया, लेकिन अब फिर बारिश के कारण जलघर के टैंक की दीवार दरक गई और उसका एक हिस्सा टूट कर गिर गया। इसके अलावा पिछली बार जलघर के अतिरिक्त पानी को जोहड़ में पहुंचाने के लिए बनाया गया नाला भी बारिश के बहाव को नहीं झेल पाया।
ग्रामीण अमित सिधनवा, देवेंद्र, सुखबीर, अभिषेक ने बताया कि गांव में पानी की भारी किल्लत बनी हुई है तथा लोगों को इसी टैंक का पानी पीना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि जिस समय जलघर का निर्माण किया जा रहा था उस समय भी ग्रामीणों ने जलघर में सामग्री को लेकर सवाल खड़े किए थे। अगर उस समय अधिकारी इसकी जांच करते तो आज नए बने इस जलघर की यह स्थिति नहीं होती और सरकारी पैसे के दुरुपयोग को बचाया जा सकता है।
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वर्जन
‘तेज बारिश में टैंक की दीवार टूट गई थी। टैंक में गंदा पानी नहीं है बल्कि बारिश का पानी एकत्रित हुआ है जो गंदा नहीं है। और विभाग इसे फिल्टर करने के बाद ही गांव में सप्लाई के लिए देता है। दीवार की मरम्मत के लिए उच्चाधिकारियों को लिखा गया है। इसे शीघ्र ही दुरुस्त करवा दिया जाएगा ’
जगदीश चंद्र, एसडीओ, जनस्वास्थ्य विभाग, बहल।
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बहल। सिधनवा गांव के जलघर में खेतों से बहकर बारिश का पानी टैंक में एकत्रित हो गया है। टैंक की मरम्मत के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाने से ग्रामीणों को दूषित पानी पीना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने जलघर की टूटी दीवार ठीक कराने की मांग की है।
जानकारी के अनुसार लोगों की सुविधा के लिए जनस्वास्थ्य विभाग ने सिधनवा गांव में एक जलघर बनाया गया था। जिस समय जलघर बनाया जा रहा था उस समय भी लोगों ने इसमें घटिया सामग्री लगाए जाने का आरोप लगाया था लेकिन विभाग ने इस मामले में अनदेखी की। जब बारिश आई तो जलघर के टैंक में दरार आ गई। इसे बाद में मरम्मत कराकर सही किया गया, लेकिन अब फिर बारिश के कारण जलघर के टैंक की दीवार दरक गई और उसका एक हिस्सा टूट कर गिर गया। इसके अलावा पिछली बार जलघर के अतिरिक्त पानी को जोहड़ में पहुंचाने के लिए बनाया गया नाला भी बारिश के बहाव को नहीं झेल पाया।
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ग्रामीण अमित सिधनवा, देवेंद्र, सुखबीर, अभिषेक ने बताया कि गांव में पानी की भारी किल्लत बनी हुई है तथा लोगों को इसी टैंक का पानी पीना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि जिस समय जलघर का निर्माण किया जा रहा था उस समय भी ग्रामीणों ने जलघर में सामग्री को लेकर सवाल खड़े किए थे। अगर उस समय अधिकारी इसकी जांच करते तो आज नए बने इस जलघर की यह स्थिति नहीं होती और सरकारी पैसे के दुरुपयोग को बचाया जा सकता है।
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‘तेज बारिश में टैंक की दीवार टूट गई थी। टैंक में गंदा पानी नहीं है बल्कि बारिश का पानी एकत्रित हुआ है जो गंदा नहीं है। और विभाग इसे फिल्टर करने के बाद ही गांव में सप्लाई के लिए देता है। दीवार की मरम्मत के लिए उच्चाधिकारियों को लिखा गया है। इसे शीघ्र ही दुरुस्त करवा दिया जाएगा ’
जगदीश चंद्र, एसडीओ, जनस्वास्थ्य विभाग, बहल।