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आबू धाबी में हरियाणा के अंदर होने वाली मौतों का खींचा जाएगा खाका
Updated Sun, 02 Sep 2018 03:00 AM IST
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संशोधित
फोटो सहित एसएनजे 10
फोरेंसिक मेडिसन विभागाध्यक्ष डॉ. एसके धत्तरवाल
अमर उजाला एक्सक्लूसिव
आबू धाबी में हरियाणा में होने वाली मौतों के कारणों पर होगी चर्चा
-30-31 अक्तूबर को होने वाली कांफ्रेंस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक मानक तैयार करेगी
-इससे पुलिस को आगे मामलों की जांच में मिलेगी मदद
- अभिनेत्री श्रीदेवी की मौत पर फोरेंसिक एक्सपर्ट कर सकते हैं चर्चा
संजय कुमार
रोहतक। आबू धाबी में आयोजित होने वाली जीसीसी फोरेंसिक्स एग्जीबिशन एंड कांफ्रेंस में भारत की ओर से पीजीआईएमएस फोरेंसिक मेडिसन विभागाध्यक्ष डॉ. एसके धत्तरवाल हरियाणा में 30 सालों के अंदर होने वाली मौतों के आंकड़े रखेंगे। अंतरराष्ट्रीय बैठक में उत्तर भारत सहित विभिन्न देशों से आने वाले फोरेंसिक एक्सपर्ट अपने देश में होने वाली मौत के कारण और प्रकार पर चर्चा करेंगे। इससे आने वाले दिनों में पुलिस की जांच में मदद हो सकेगी। बैठक में अभिनेत्री श्रीदेवी की मौत मामले पर भी चर्चा हो सकती है, क्योंकि हर देश के नागरिकों की घटना को अंजाम देने की सोच अलग होती है और पुलिस अपने देश के ट्रेंड पर जांच करती है।
डॉ. धत्तरवाल ने बताया कि कांफ्रेंस 30-31 अक्तूबर 2018 को होने जा रही है। इसमें यूएई, यूके, यूएसए, टर्की, साउथ अफ्रीका, सिंगापुर, जर्मनी, ब्राजील आदि देशों के फोरेंसिक मेडिसन एक्सपर्ट हिस्सा लेंगे। वह 1985 से 2014 का अपना डॉटा पेश करेंगे। क्योंकि हर देश में घटनाओं की संख्या बढ़ रही है। बात हरियाणा की करें तो यहां 16 से 40 साल के विभिन्न आयु वर्ग के लोगों की मौत का अध्ययन किया गया। इसमें पुरुषों की अधिक संख्या है और इसमें ग्रामीण क्षेत्र से अधिक हैं। 90 फीसदी मौत सामान्य, आठ फीसदी दुर्घटनाओं व दो फीसदी आत्महत्या के चलते होती हैं। लेटेस्ट आंकड़ों के तहत आठ फीसदी फायर आर्म, 19 धारदार हथियार, 65 जो चीज सामने आईं उससे हमला, 16 गला घोटने से, 12 जलाने से और तीन जहर के सेवन के मामले सामने आए। डॉ. धत्तरवाल की मानें तो जहां हमारे यहां जहर खाने, डूब कर मरने, फांसी लगाने के मामले अधिक होते हैं, वहीं दूसरे देशों में स्वयं को गोली मारने या जानलेवा गैस का स्वयं पर प्रयोग कर आत्महत्या की जाती है। उन्होंने बताया कि इस कांफ्रेंस में शिरकत करने की उनको अनुमति मिल गई है। जल्द ही वह अपने देश की कानूनी प्रक्रिया को भी पूरा कर लेंगे।
डॉक्टर एसके धत्तरवाल के नाम 48 अंतरराष्ट्रीय, 86 राष्ट्रीय पब्लिकेशन, 128 पेपर प्रस्तुत करने का रिकार्ड है। 33 साल के अनुभव में वह 30 हजार से अधिक पोस्टमार्टम और 3000 से अधिक जटिल क्रिमनल केसों में सीबीआई व स्टेट क्राइम ब्रांच के साथ काम कर चुके हैं। हिसार का असली नोट नकली चोट कांड का खुलासा 2008 में डॉ. धत्तरवाल ने कर प्रदेश में हड़कंप मचा दिया था। इसमें मरीज डॉक्टर के साथ मिलकर विरोधी पक्ष को फंसाने के लिए अपनी जान से खेलते थे।
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होगा घटनाओं का मूल्यांकन
डॉ. एसके धत्तरवाल ने बताया कि हर देश में आत्महत्या व हत्या को अंजाम देने के तरीके में अंतर होता है। इसमें समस्या यह होती है कि हर देश की पुलिस स्वयं के क्षेत्र के आधार पर जांच करती है। मामला जब दूसरे देश के लोगों की मौत से हो तो जांच फंस जाती है। क्योंकि हर देश में घटनाएं अलग-अलग तरीके से अंजाम दी जाती हैं। ऐसे में यह कांफ्रेंस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक मानक तैयार करेगी, इससे पुलिस को आगे मामलों की जांच में मदद मिलेगी।
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फोटो सहित एसएनजे 10
फोरेंसिक मेडिसन विभागाध्यक्ष डॉ. एसके धत्तरवाल
अमर उजाला एक्सक्लूसिव
आबू धाबी में हरियाणा में होने वाली मौतों के कारणों पर होगी चर्चा
-30-31 अक्तूबर को होने वाली कांफ्रेंस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक मानक तैयार करेगी
-इससे पुलिस को आगे मामलों की जांच में मिलेगी मदद
- अभिनेत्री श्रीदेवी की मौत पर फोरेंसिक एक्सपर्ट कर सकते हैं चर्चा
संजय कुमार
रोहतक। आबू धाबी में आयोजित होने वाली जीसीसी फोरेंसिक्स एग्जीबिशन एंड कांफ्रेंस में भारत की ओर से पीजीआईएमएस फोरेंसिक मेडिसन विभागाध्यक्ष डॉ. एसके धत्तरवाल हरियाणा में 30 सालों के अंदर होने वाली मौतों के आंकड़े रखेंगे। अंतरराष्ट्रीय बैठक में उत्तर भारत सहित विभिन्न देशों से आने वाले फोरेंसिक एक्सपर्ट अपने देश में होने वाली मौत के कारण और प्रकार पर चर्चा करेंगे। इससे आने वाले दिनों में पुलिस की जांच में मदद हो सकेगी। बैठक में अभिनेत्री श्रीदेवी की मौत मामले पर भी चर्चा हो सकती है, क्योंकि हर देश के नागरिकों की घटना को अंजाम देने की सोच अलग होती है और पुलिस अपने देश के ट्रेंड पर जांच करती है।
डॉ. धत्तरवाल ने बताया कि कांफ्रेंस 30-31 अक्तूबर 2018 को होने जा रही है। इसमें यूएई, यूके, यूएसए, टर्की, साउथ अफ्रीका, सिंगापुर, जर्मनी, ब्राजील आदि देशों के फोरेंसिक मेडिसन एक्सपर्ट हिस्सा लेंगे। वह 1985 से 2014 का अपना डॉटा पेश करेंगे। क्योंकि हर देश में घटनाओं की संख्या बढ़ रही है। बात हरियाणा की करें तो यहां 16 से 40 साल के विभिन्न आयु वर्ग के लोगों की मौत का अध्ययन किया गया। इसमें पुरुषों की अधिक संख्या है और इसमें ग्रामीण क्षेत्र से अधिक हैं। 90 फीसदी मौत सामान्य, आठ फीसदी दुर्घटनाओं व दो फीसदी आत्महत्या के चलते होती हैं। लेटेस्ट आंकड़ों के तहत आठ फीसदी फायर आर्म, 19 धारदार हथियार, 65 जो चीज सामने आईं उससे हमला, 16 गला घोटने से, 12 जलाने से और तीन जहर के सेवन के मामले सामने आए। डॉ. धत्तरवाल की मानें तो जहां हमारे यहां जहर खाने, डूब कर मरने, फांसी लगाने के मामले अधिक होते हैं, वहीं दूसरे देशों में स्वयं को गोली मारने या जानलेवा गैस का स्वयं पर प्रयोग कर आत्महत्या की जाती है। उन्होंने बताया कि इस कांफ्रेंस में शिरकत करने की उनको अनुमति मिल गई है। जल्द ही वह अपने देश की कानूनी प्रक्रिया को भी पूरा कर लेंगे।
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डॉक्टर एसके धत्तरवाल के नाम 48 अंतरराष्ट्रीय, 86 राष्ट्रीय पब्लिकेशन, 128 पेपर प्रस्तुत करने का रिकार्ड है। 33 साल के अनुभव में वह 30 हजार से अधिक पोस्टमार्टम और 3000 से अधिक जटिल क्रिमनल केसों में सीबीआई व स्टेट क्राइम ब्रांच के साथ काम कर चुके हैं। हिसार का असली नोट नकली चोट कांड का खुलासा 2008 में डॉ. धत्तरवाल ने कर प्रदेश में हड़कंप मचा दिया था। इसमें मरीज डॉक्टर के साथ मिलकर विरोधी पक्ष को फंसाने के लिए अपनी जान से खेलते थे।
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होगा घटनाओं का मूल्यांकन
डॉ. एसके धत्तरवाल ने बताया कि हर देश में आत्महत्या व हत्या को अंजाम देने के तरीके में अंतर होता है। इसमें समस्या यह होती है कि हर देश की पुलिस स्वयं के क्षेत्र के आधार पर जांच करती है। मामला जब दूसरे देश के लोगों की मौत से हो तो जांच फंस जाती है। क्योंकि हर देश में घटनाएं अलग-अलग तरीके से अंजाम दी जाती हैं। ऐसे में यह कांफ्रेंस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक मानक तैयार करेगी, इससे पुलिस को आगे मामलों की जांच में मदद मिलेगी।