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थैलेसिमिया से ग्रस्त जुड़वा भाईयों ने समाज में पेश की मिशाल

Sat, 23 Jun 2018 02:04 AM IST
Updated Sat, 23 Jun 2018 02:04 AM IST
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थैलेसिमिया से ग्रस्त जुड़वा भाईयों ने समाज में पेश की मिशाल
अमर उजाला स्पेशल स्टोरी
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फोटो सहित एसएनजे दो

थैलेसीमिया से ग्रस्त जुड़वां भाइयों ने समाज में पेश की मिसाल
- नीट परीक्षा पास कर समस्याओं को किया बौना साबित

संजय कुमार
रोहतक। शहर से लगभग 37 किलोमीटर दूर गांव अजायब के दो जुड़वां भाइयों ने नीट परीक्षा में 8वीं और 127वीं रैंक प्राप्त कर मिसाल कायम की है। यह कामयाबी इसलिए अधिक महत्वपूर्ण है कि ये दोनों विद्यार्थी थैलेसीमिया जैसी बीमारी से जंग भी लड़ रहे हैं। स्वयं का उपचार कराने के दौरान दोनों भाइयों ने महसूस किया कि यदि डॉक्टर न होते तो उनका भी जीवन नहीं होता। इसी सोच ने उनके अंदर डॉक्टर बनने की जिज्ञासा जागृत की और उन्होंने गांव में पढ़कर नीट जैसी परीक्षा को पास किया। अब निशु जहां दिल का डॉक्टर बनना चाहते हैं वहीं आशु आंखों का डॉक्टर बनना चाहते हैं।

पेशे से साइंस मास्टर कृष्ण सिंह नैन ने बताया कि वह जीएमएस एलबीएस नगर रोहतक में तैनात हैं और उनकी पत्नी प्रमिला देवी दिल्ली कमरुद्दीन नगर डिस्पेंसरी में एएनएम के पद पर हैं, उनके तीन बच्चे हैं। आशु नैन व निशु नैन उनके दोनों बडे़ जुड़वां बेटे हैं। वर्ष 2009 में उनको पता चला कि दोनों को थैलेसीमिया बीमारी है, उन्हें दुख हुआ। लेकिन आशु व निशु ने हिम्मत दिखाई और दोनों ने अपना उपचार पीजीआईएमएस रोहतक से शुरू कराया। दोनों पर बीमारी का उपचार करवाने के साथ पढ़ाई की जिम्मेदारी भी थी। हर माह दो बार रक्त चढ़वाने के चलते पांच से सात दिन उन्हें पीजीआईएमएस भी आना पड़ता था। कई बार तो वह कोई समस्या होने पर अकेले भी आ जाते थे। 2017 में दोनों ने नीट परीक्षा दी और निशु नैन ने 8वीं व आशु नैन ने 127वीं रैंक हासिल की। निशु को दिल्ली के किसी भी मेडिकल कॉलेज में सीट मिल सकती है, जबकि आशु को भी अच्छी रैंक होने के चलते रोहतक पीजीआईएमएस में ही सीट मिल सकती है। आशु ने अपनी कक्षाओं के दौरान रोहतक एक कोचिंग सेंटर से वीकेंड पर तैयारी की, जबकि निशु ने दिल्ली से लगातार अपनी कक्षा जारी रखी। निशु ने 12वीं में 92.5 व आशु ने 84 फीसदी अंक प्राप्त किए थे।
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थैलेसीमिया के साथ काला पीलिया भी
आशु और निशू के पिता ने बताया कि उनके बेटों की समस्या थैलेसीमिया पर ही समाप्त नहीं हुई, उन्हें काला पीलिया भी हो गया। इसका उपचार उन्होंने पीजीआई रोहतक के गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रवीण मल्होत्रा से कराया। उनके उपचार में हरियाणा सरकार की जीवन रेखा योजना का काफी योगदान रहा, क्योंकि उस समय दोनों बच्चों का थैलेसिमिया के साथ काला पीलिया का उपचार कराना आसान नहीं था। इसमें सरकार की ओर से जारी योजना के चलते दोनों का उपचार दो लाख रुपये में हो गया, जो बाद में उन्हें मिल भी गया। क्योंकि निजी अस्पताल में इसके उपचार के लिए उस समय आठ लाख रुपये खर्च होते थे, इतनी बड़ी राशि का इंतजाम कर पाना उनके बस में नहीं था।
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जीवन रेखा योजना के प्रमुख नोडल अधिकारी भी करते हैं तारीफ
जीवन रेखा योजना के प्रमुख नोडल अधिकारी डॉ. प्रवीण मल्होत्रा भी निशु व आशु की उपलब्धियों का श्रेय उनकी मेहनत और लगन को देते हैं। चिकित्सक का कहना है कि दोनों को जब भी कोई समस्या होती थी वह अकेले ही उपचार करवाने आ जाते थे, इसे देख कर हर कोई हैरान होता था कि बच्चे हिम्मत वाले हैं। दोनों की इच्छा है कि वह भी डॉक्टर बन कर लोगों की सेवा करें।
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