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पार्क में 78 लाख के झूले लगवाए, अब बर्बाद
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Mon, 30 Nov 2015 02:19 AM IST
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डेढ़ साल पहले पार्कों में लगवाए गए 78 लाख 59 हजार रुपये के झूले अब
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कौड़ियों के दाम हो चुके हैं। अधिकतर पार्कों में झूले टूटे पड़ें हैं।
शिकायत के बावजूद नगर निगम अधिकारी इसकी सुध नहीं ले रहे। जब इसकी शिकायत
सीएम विंडो में की गई तो झूलों के रख रखाव के लिए निगम के जेई को जिम्मेदार
बताया गया।
दरअसल प्रेम नगर चौराहा पार्क, मानसरोवर पार्क समेत अन्य कई पार्कों में लगे झूले टूट गए हैं। पार्कों में झूलों की इस हालत को देखते हुए ही प्रेम नगर में रहने वाले आरटीआई कार्यकर्ता डॉ. दीपक चौहान ने सूचना के अधिकार के तहत उन पर होने वाले खर्च का ब्यौरा मांगा।
इससे पता चला कि उन पर 78 लाख 59 हजार रुपये रकम खर्च की गई है और उसके बावजूद उनकी कोई देखरेख तक नहीं कर रहा है। इस मामले की सीएम विंडो पर शिकायत की गई कि आखिर झूलों के देखरेख की जिम्मेदारी किसकी है और उन पर ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा है। वहां से डॉ. दीपक चौहान को भेजे गए जवाब में कहा गया है कि इसके लिए नगर निगम के जेई की जिम्मेदारी है और झूलों की देखरेख उनको ही करनी होती है।
कंपनी ने किया था मेंटीनेंस का वादा
नगर निगम की ओर से डेढ़ साल पहले शहर के सभी पार्कों में बच्चों को ध्यान में रखते हुए झूले लगवाए गए थे। उनपर 78 लाख 59 हजार 935 रुपये खर्च किए गए थे और उसकी गुणवत्ता भी बेहतर नहीं थी। हाउस की मीटिंग में इसको लेकर विवाद भी हुआ और झूले लगाने वाली कंपनी ने एक साल तक उनका मेंटीनेंस करने का वादा किया। लेकिन, इसकी देखरेख करने कोई नहीं आया और झूले टूट गए।
38 लाख 74 हजार का खर्चा, फिर भी सड़कों पर पड़ा कूड़ा
पार्क में झूले ही नहीं बल्कि नगर निगम ने अभी तक शहर को कूड़ा मुक्त करने के लिए लाखों रुपये खर्च दिए। इसके बाद भी हालात नहीं सुधरे। नगर निगम ने डस्टबिन पर 38 लाख 74 हजार 531 रुपये खर्च कर दिए हैं। यह रुपये 2005 से 2014 तक खरीदे गए डस्टबिन पर खर्च किए गए हैं। इनके अलावा सफाई कर्मचारियों पर भी मोटी रकम खर्च की जाती है।
पार्कों में झूले टूटे हुए है तो इसकी पूरी जानकारी कराकर ठीक कराए जाएंगे। उनको पार्कों में बच्चों के लिए लगाया गया है और बच्चों के खेलने के लिए टूटे हुए झूले ठीक हो जाएंगे।
- दलबीर सिंह फौगाट, ज्वाइंट कमिश्नर नगर निगम
जिस समय झूले लगाए गए थे, मैने उसी समय कहा था कि उनकी गुणवत्ता की जांच कराई जाए। उस समय कंपनी ने एक साल तक मेंटीनेंस करने के लिए कह दिया तो उस समय जांच नहीं कराई गई। इसके लिए अधिकारियों को पत्र लिखकर जल्द ही झूले ठीक करवाने के लिए कहा जाएगा।
- रेणू डाबला, मेयर नगर निगम
दरअसल प्रेम नगर चौराहा पार्क, मानसरोवर पार्क समेत अन्य कई पार्कों में लगे झूले टूट गए हैं। पार्कों में झूलों की इस हालत को देखते हुए ही प्रेम नगर में रहने वाले आरटीआई कार्यकर्ता डॉ. दीपक चौहान ने सूचना के अधिकार के तहत उन पर होने वाले खर्च का ब्यौरा मांगा।
इससे पता चला कि उन पर 78 लाख 59 हजार रुपये रकम खर्च की गई है और उसके बावजूद उनकी कोई देखरेख तक नहीं कर रहा है। इस मामले की सीएम विंडो पर शिकायत की गई कि आखिर झूलों के देखरेख की जिम्मेदारी किसकी है और उन पर ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा है। वहां से डॉ. दीपक चौहान को भेजे गए जवाब में कहा गया है कि इसके लिए नगर निगम के जेई की जिम्मेदारी है और झूलों की देखरेख उनको ही करनी होती है।
कंपनी ने किया था मेंटीनेंस का वादा
नगर निगम की ओर से डेढ़ साल पहले शहर के सभी पार्कों में बच्चों को ध्यान में रखते हुए झूले लगवाए गए थे। उनपर 78 लाख 59 हजार 935 रुपये खर्च किए गए थे और उसकी गुणवत्ता भी बेहतर नहीं थी। हाउस की मीटिंग में इसको लेकर विवाद भी हुआ और झूले लगाने वाली कंपनी ने एक साल तक उनका मेंटीनेंस करने का वादा किया। लेकिन, इसकी देखरेख करने कोई नहीं आया और झूले टूट गए।
38 लाख 74 हजार का खर्चा, फिर भी सड़कों पर पड़ा कूड़ा
पार्क में झूले ही नहीं बल्कि नगर निगम ने अभी तक शहर को कूड़ा मुक्त करने के लिए लाखों रुपये खर्च दिए। इसके बाद भी हालात नहीं सुधरे। नगर निगम ने डस्टबिन पर 38 लाख 74 हजार 531 रुपये खर्च कर दिए हैं। यह रुपये 2005 से 2014 तक खरीदे गए डस्टबिन पर खर्च किए गए हैं। इनके अलावा सफाई कर्मचारियों पर भी मोटी रकम खर्च की जाती है।
पार्कों में झूले टूटे हुए है तो इसकी पूरी जानकारी कराकर ठीक कराए जाएंगे। उनको पार्कों में बच्चों के लिए लगाया गया है और बच्चों के खेलने के लिए टूटे हुए झूले ठीक हो जाएंगे।
- दलबीर सिंह फौगाट, ज्वाइंट कमिश्नर नगर निगम
जिस समय झूले लगाए गए थे, मैने उसी समय कहा था कि उनकी गुणवत्ता की जांच कराई जाए। उस समय कंपनी ने एक साल तक मेंटीनेंस करने के लिए कह दिया तो उस समय जांच नहीं कराई गई। इसके लिए अधिकारियों को पत्र लिखकर जल्द ही झूले ठीक करवाने के लिए कहा जाएगा।
- रेणू डाबला, मेयर नगर निगम