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डॉ. कुंदन मितल ने हाई कोर्ट पहुंचाया परीक्षक की रोटेशन का मामला

Sat, 05 May 2018 02:17 AM IST
Updated Sat, 05 May 2018 02:17 AM IST
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डॉ. कुंदन मितल ने हाई कोर्ट पहुंचाया परीक्षक की रोटेशन का मामला
अमर उजाला एक्सक्लूसिव
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डॉ. कुंदन मित्तल ने हाई कोर्ट पहुंचाया परीक्षक की रोटेशन का मामला
- 15 मई से होने वाली एमडी व एमएस की परीक्षा स्थगित

अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के सीनियर प्रोफेसर डॉ. कुंदन मित्तल द्वारा हाई कोर्ट में लगाई गई याचिका के चलते 15 मई से होने वाली एमडी व एमएस की परीक्षा पर स्टे लगा दिया गया है। डॉ. मित्तल ने संस्थान में परीक्षक रोटेशन के नियम को लागू न किये जाने के विरोध में हाई कोर्ट की शरण ली है।

सूत्रों की मानें तो मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमानुसार विभागाध्यक्ष के साथ परीक्षक का भी रोटेशन होना चाहिए। जबकि पीजीआईएमएस में इन दोनों मामलों में कोई कार्रवाई नहीं होती। एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक में मामला पास होने के बाद भी इसे लागू नहीं किया जा रहा है। संस्थान के अधिकारी बताते हैं कि जो एक बार विभागाध्यक्ष बन गया वह अपना पद कभी नहीं छोड़ना चाहता। यही नहीं विभागाध्यक्ष अपना परीक्षक का पद भी नहीं छोड़ना चाहते, क्योंकि वह नहीं चाहते कि एमडी व एमएस के विद्यार्थी उनके हाथ से निकल जाएं। संस्थान में एमडी व एमएस के विद्यार्थियों की मजबूरी होती है कि वह हर हाल में अपने परीक्षक को खुश रखें। हाई कोर्ट में मामला जाने के बाद अब परीक्षा देरी से होगी जोकि 15 मई से शुरू होनी थी। सूत्र दावा करते हैं कि कुलपति डॉ. ओपी कालरा शनिवार को देर सायं विदेश से आ रहे हैं, उनके लिए डॉ. मित्तल ने एक और मुसीबत खड़ी कर दी है। इसके साथ ही सभी विभागाध्यक्षों के लिए भी चैलेंज खड़ा कर दिया है, जोकि परीक्षक के पद की रोटेशनशिप नहीं होने देना चाहते हैं। गौरतलब है कि संस्थान में विभागाध्यक्ष की रोटेशन को भी लागू नहीं होने दिया जा रहा है।
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परीक्षा शाखा में नहीं थम रहा बवाल
सूत्रों की मानें तो पीजीआई की परीक्षा शाखा में बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। यहां एक विद्यार्थी की उत्तर पुस्तिका की फोटो कापी के लिए 2500 रुपये लिए जाते हैं, जबकि आरटीआई के तहत इसकी कीमत काफी कम बैठती है। इस संबंध में शुक्रवार को एक अधिकारी की विभाग में खासी बहस भी हुई है।
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