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चालान बुक में एडवांस में होते थे अधिकारियों के हस्ताक्षर
Updated Thu, 21 Dec 2017 03:01 AM IST
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ओवरलोडेड वाहनों की पासिंग में फर्जीवाड़े का खुलासा ---
अधिकारी एडवांस में चालान बुक में कर देते थे हस्ताक्षर, फिर कर्मचारी मनमर्जी से करते थे वाहन पास
- एसआईटी की जांच में हुआ खुलासा, गोरखधंधे में सात जिलों के कर्मचारी शामिल
- जल्द ही बड़े अधिकारियों पर शिकंजा कसना शुरू करेगी एसआईटी
शनि शर्मा
रोहतक।
रिश्वत लेकर ओवरलोडेड वाहनों को सीमा पार कराने के हाई प्रोफाइल मामले में खुलासा हुआ है। एसआईटी की जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने मिलीभगत करके चालान बुक में एडवांस में ही अधिकारियों के हस्ताक्षर करवाकर रखते थे। इसके बाद आरटीए विभाग में भ्रष्टाचार का खेल शुरू होता था। फिर आरोपी अपने स्तर पर ही चालान और ओवरलोडिंग वाहनों की पासिंग करते थे। हालांकि पुलिस ने अभी मिलीभगत करने वाले अधिकारियों के नाम सार्वजनिक नहीं किये हैं। उनके खिलाफ और भी सबूत जुटाए जा रहे हैं। एसआईटी जल्द ही मामले में बड़ा खुलासा कर सकती है।
अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से हुआ खेल
जांच में पता चला है कि भ्रष्टाचार का पूरा खेल केवल कर्मचारियों तक ही सीमित नहीं था। इस गोरखधंधे में विभाग के बडे़ अधिकारी भी शामिल हैं। पूरे मामले में इनकी भूमिका संदिग्ध होने के कारण इन्हें नोटिस जारी करके बयान दर्ज करने के लिए बुलाया गया है। जब पुलिस के पास नोटिस का जवाब आया तो खुलासा हुआ कि मिलीभगत में शामिल अधिकतर अधिकारियों का तबादला हो गया। तबादले का सारा खेल पुलिस की जांच से बचने के लिए किया गया। हालांकि पुलिस ने संदिग्धों की डिटेल जुटानी शुरू कर दी है। पुलिस पता लगा रही है कि फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद अधिकारियों का किस जगह तबादला किया गया।
गोहाना रोड पर तय होती थी अधिकारियों और दलालों की कमीशन
इस पूरे गोरखधंधे में लिप्त विभागीय अधिकारियों और बाहरी लोगों की कमीशन गोहाना रोड स्थित एक सीमेंट की दुकान में तय होती थी। इसके बाद मामले से जुड़े आरोपियों तक पैसा पहुंचाया जाता था।आरोपियों के द्वारा रिश्वत खौरी करके एक जिले से महीने में औसतन 200 ओवरलोड ट्रक को निकाला जाता था। इनकी पासिंग कराने के नाम पर प्रत्येक महीने लाखों रुपये की अवैध वसूली होती थी। अवैध वसूली का पैसा विभाग के उच्च अधिकारियों से लेकर बाहरी लोगों तक पहुंचता था।
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सात जिलों के कर्मचारियों के नाम आये सामने
एसआईटी की जांच में अभी तक मामले में सात जिलों के कर्मचारियों के नाम सामने आये है। इनकी संख्या करीब दस है। इन कर्मचारियों को बुलाने के लिए पुलिस की तरफ से संबंधित जिले के आरटीए अधिकारियों को नोटिस जारी कर दिये गये है। नोटिस में कहा गया है कि जिन कर्मचारियों के नाम सामने आये है। उन्हें पुलिस के सामने पेश किया जाए। पुलिस की टीमों ने कई बार कर्मचारियों की धरपकड़ के लिए उनके दफ्तरों व घरों में छापेमारी की है लेकिन कोई भी हत्थे नहीं चढ़ा। पुलिस लाखों रुपये के खेल में अभी तक मात्र दो आरोपियों को ही गिरफ्तार कर सकी है।
बड़े अधिकारियों के सामने लड़खड़ाई पुलिस जांच
वहीं, मामले में अब पुलिस जांच पर भी सवाल उठने लगे है। नौ महीने बाद भी पुलिस केस से जुडे़ बड़े अधिकारियों को गिरफ्तार नहीं कर सकी है। जबकि सारा खेल बड़े अधिकारियों की नाक के नीचे ही किया जा रहा था। हैरत की बात यह है कि गिरफ्तार किये गये आरोपी सोनू और डिंपी ने भी बड़े अधिकारियों के संलिप्तता की बात स्वीकार की थी। जबकि खुलासा होने के बाद पुलिस ने दावा किया था कि किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा। मगर बड़े अधिकारियों की ऊंची पहुंच के सामने पुलिस की जांच लड़खड़ा गई है। पुलिस अधिकारियों को डर सताने लगा है कि यदि बड़े अधिकारियों पर हाथ डाला तो उनका तबादला निश्चित है। मामले में मुख्यालय से लेकर प्रदेश भर के अधिकतर आरटीए कार्यालयों के कर्मचारी लिप्त है।
ऐसे चलता था अवैध कमाई का खेल
पुलिस ने खुलासा किया था कि आरोपी 3 हजार रुपये प्रति माह प्रति ट्रक लेकर ओवरलोड ट्रकों को बिना चालान के पास करवाते थे। बाद में नई जानकारी सामने आई कि गिरोह का नेटवर्क जिलों ही नहीं, अंतरराज्यीय स्तर पर फैला हुआ है। पुलिस ने मामले में ब्राह्मणवास निवासी सोनू, स्वराज हुड्डा निवासी चमारियां, आरटीए कार्यालय रोहतक में क्लर्क कृष्ण हुड्डा, सोनीपत से जेपी, पानीपत से संदीप निवासी डाहर, एसडीएम ऑफिस दादरी में क्लर्क डिंपी, भिवानी आरटीए ऑफिस में क्लर्क सतीश और हिसार के मोनू को नामजद किया था। इनमें से सोनू और डिंपी को गिरफ्तार हो चुके हैं। मामले में एसआईटी इंचार्ज डीएसपी डॉ रविंद्र ने बताया कि पूरे मामले की गहनता से जांच की जा रही है। कई तथ्य सामने आये हैं। आरोपियों के खिलाफ सबूत जुटाए जा रहे हैं।
ये है मामला
बता दें कि ओवरलोडेड वाहनों की पासिंग के नाम पर जिले में बड़ा खेल चल रहा था। अप्रैल 2017 में सीआईए की टीम ने इस गिरोह के गोरखधंधे का खुलासा किया था। आरटीए क ार्यालय से दो दलालों को गिरफ्तार किया गया था। गिरोह का नेटवर्क रोहतक, सोनीपत, पानीपत, हिसार, झज्जर, दादरी भिवानी जिलों में फैला हुआ था। इसके कुछ दिन बाद ही सीएम फ्लाइंग की टीम ने भी आरटीए में छापेमारी करके दस्तावेज जब्त किये थे। उस समय चालान बुक में कई तरह की अनियमितता पाई गईं थीं।
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अधिकारी एडवांस में चालान बुक में कर देते थे हस्ताक्षर, फिर कर्मचारी मनमर्जी से करते थे वाहन पास
- एसआईटी की जांच में हुआ खुलासा, गोरखधंधे में सात जिलों के कर्मचारी शामिल
- जल्द ही बड़े अधिकारियों पर शिकंजा कसना शुरू करेगी एसआईटी
शनि शर्मा
रोहतक।
रिश्वत लेकर ओवरलोडेड वाहनों को सीमा पार कराने के हाई प्रोफाइल मामले में खुलासा हुआ है। एसआईटी की जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने मिलीभगत करके चालान बुक में एडवांस में ही अधिकारियों के हस्ताक्षर करवाकर रखते थे। इसके बाद आरटीए विभाग में भ्रष्टाचार का खेल शुरू होता था। फिर आरोपी अपने स्तर पर ही चालान और ओवरलोडिंग वाहनों की पासिंग करते थे। हालांकि पुलिस ने अभी मिलीभगत करने वाले अधिकारियों के नाम सार्वजनिक नहीं किये हैं। उनके खिलाफ और भी सबूत जुटाए जा रहे हैं। एसआईटी जल्द ही मामले में बड़ा खुलासा कर सकती है।
अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से हुआ खेल
जांच में पता चला है कि भ्रष्टाचार का पूरा खेल केवल कर्मचारियों तक ही सीमित नहीं था। इस गोरखधंधे में विभाग के बडे़ अधिकारी भी शामिल हैं। पूरे मामले में इनकी भूमिका संदिग्ध होने के कारण इन्हें नोटिस जारी करके बयान दर्ज करने के लिए बुलाया गया है। जब पुलिस के पास नोटिस का जवाब आया तो खुलासा हुआ कि मिलीभगत में शामिल अधिकतर अधिकारियों का तबादला हो गया। तबादले का सारा खेल पुलिस की जांच से बचने के लिए किया गया। हालांकि पुलिस ने संदिग्धों की डिटेल जुटानी शुरू कर दी है। पुलिस पता लगा रही है कि फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद अधिकारियों का किस जगह तबादला किया गया।
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गोहाना रोड पर तय होती थी अधिकारियों और दलालों की कमीशन
इस पूरे गोरखधंधे में लिप्त विभागीय अधिकारियों और बाहरी लोगों की कमीशन गोहाना रोड स्थित एक सीमेंट की दुकान में तय होती थी। इसके बाद मामले से जुड़े आरोपियों तक पैसा पहुंचाया जाता था।आरोपियों के द्वारा रिश्वत खौरी करके एक जिले से महीने में औसतन 200 ओवरलोड ट्रक को निकाला जाता था। इनकी पासिंग कराने के नाम पर प्रत्येक महीने लाखों रुपये की अवैध वसूली होती थी। अवैध वसूली का पैसा विभाग के उच्च अधिकारियों से लेकर बाहरी लोगों तक पहुंचता था।
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सात जिलों के कर्मचारियों के नाम आये सामने
एसआईटी की जांच में अभी तक मामले में सात जिलों के कर्मचारियों के नाम सामने आये है। इनकी संख्या करीब दस है। इन कर्मचारियों को बुलाने के लिए पुलिस की तरफ से संबंधित जिले के आरटीए अधिकारियों को नोटिस जारी कर दिये गये है। नोटिस में कहा गया है कि जिन कर्मचारियों के नाम सामने आये है। उन्हें पुलिस के सामने पेश किया जाए। पुलिस की टीमों ने कई बार कर्मचारियों की धरपकड़ के लिए उनके दफ्तरों व घरों में छापेमारी की है लेकिन कोई भी हत्थे नहीं चढ़ा। पुलिस लाखों रुपये के खेल में अभी तक मात्र दो आरोपियों को ही गिरफ्तार कर सकी है।
बड़े अधिकारियों के सामने लड़खड़ाई पुलिस जांच
वहीं, मामले में अब पुलिस जांच पर भी सवाल उठने लगे है। नौ महीने बाद भी पुलिस केस से जुडे़ बड़े अधिकारियों को गिरफ्तार नहीं कर सकी है। जबकि सारा खेल बड़े अधिकारियों की नाक के नीचे ही किया जा रहा था। हैरत की बात यह है कि गिरफ्तार किये गये आरोपी सोनू और डिंपी ने भी बड़े अधिकारियों के संलिप्तता की बात स्वीकार की थी। जबकि खुलासा होने के बाद पुलिस ने दावा किया था कि किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा। मगर बड़े अधिकारियों की ऊंची पहुंच के सामने पुलिस की जांच लड़खड़ा गई है। पुलिस अधिकारियों को डर सताने लगा है कि यदि बड़े अधिकारियों पर हाथ डाला तो उनका तबादला निश्चित है। मामले में मुख्यालय से लेकर प्रदेश भर के अधिकतर आरटीए कार्यालयों के कर्मचारी लिप्त है।
ऐसे चलता था अवैध कमाई का खेल
पुलिस ने खुलासा किया था कि आरोपी 3 हजार रुपये प्रति माह प्रति ट्रक लेकर ओवरलोड ट्रकों को बिना चालान के पास करवाते थे। बाद में नई जानकारी सामने आई कि गिरोह का नेटवर्क जिलों ही नहीं, अंतरराज्यीय स्तर पर फैला हुआ है। पुलिस ने मामले में ब्राह्मणवास निवासी सोनू, स्वराज हुड्डा निवासी चमारियां, आरटीए कार्यालय रोहतक में क्लर्क कृष्ण हुड्डा, सोनीपत से जेपी, पानीपत से संदीप निवासी डाहर, एसडीएम ऑफिस दादरी में क्लर्क डिंपी, भिवानी आरटीए ऑफिस में क्लर्क सतीश और हिसार के मोनू को नामजद किया था। इनमें से सोनू और डिंपी को गिरफ्तार हो चुके हैं। मामले में एसआईटी इंचार्ज डीएसपी डॉ रविंद्र ने बताया कि पूरे मामले की गहनता से जांच की जा रही है। कई तथ्य सामने आये हैं। आरोपियों के खिलाफ सबूत जुटाए जा रहे हैं।
ये है मामला
बता दें कि ओवरलोडेड वाहनों की पासिंग के नाम पर जिले में बड़ा खेल चल रहा था। अप्रैल 2017 में सीआईए की टीम ने इस गिरोह के गोरखधंधे का खुलासा किया था। आरटीए क ार्यालय से दो दलालों को गिरफ्तार किया गया था। गिरोह का नेटवर्क रोहतक, सोनीपत, पानीपत, हिसार, झज्जर, दादरी भिवानी जिलों में फैला हुआ था। इसके कुछ दिन बाद ही सीएम फ्लाइंग की टीम ने भी आरटीए में छापेमारी करके दस्तावेज जब्त किये थे। उस समय चालान बुक में कई तरह की अनियमितता पाई गईं थीं।