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गर्भवती नहीं थी पानीपत की महिला, कैसे जन्मा बच्चा
Updated Wed, 20 Dec 2017 02:57 AM IST
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पुलिस की थ्योरी : पीजीआई से बच्चा चोरी वाया पानीपत टू नजफगढ़
हो सकता है बड़ा खुलासा, एसआईटी को डीएनए रिपोर्ट का इंतजार
नजफगढ़ में जिस बच्चे को गोद दिया गया, उसकी असली बताई जा रही मां को कभी किसी ने गर्भवती नहीं देखा
पानीपत के एक डॉक्टर और दायी की भूमिका संदिग्ध, पीजीआई से उनके तार खंगाल रही पुलिस
शनि शर्मा
रोहतक।
पीजीआई से बच्चा चोरी के मामले की जांच में पुलिस के हाथ चौंकाने वाले तथ्य लगे हैं। दस सितंबर को जब पीजीआई से बच्चा चोरी हुआ उसके ठीक 18 दिन बाद नजफगढ़ के एक दंपति को पानीपत में एक बच्चा गोद दिया गया। एसआईटी की जांच में यह भी सामने आया है कि जिसे बच्चे की असली मां बताया गया है, उसे कभी आस पड़ोस के लोगों ने गर्भवती नहीं देखा। करीब दो साल पहले उसके पति की मौत हो चुकी है। इस मामले में पानीपत के एक डॉक्टर और दायी की भूमिका भी सामने आ रही है। पुलिस अब इनके पीजीआई से जुड़े तार खंगाल रही है। पुलिस अब बच्चे और उसकी मां बताई जा रही महिला की डीएनए रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।
पीजीआई से बच्चा चोरी का मामला चर्चित होने के बाद एसआईटी को इस बच्चे के संबंध में बलियाणा गांव से एक इनपुट मिला था। इसके बाद एसआईटी ने पानीपत जाकर महिला से पूछताछ की तो वह इस बात पर अड़ी रही कि उस बच्चे को उसी ने जन्म दिया है। महिला ने बताया कि डिलीवरी एक दाई के माध्यम से की गई थी। करीब 18 दिन तक बच्चे को अपने पास रखने के बाद पानीपत के एक डॉक्टर और दाई के सहयोग से महिला ने नजफगढ़ की महिला को उसे गोद दे दिया था।
पड़ोसियों ने बताई ओर ही बात
दूसरी ओर जब महिला के पड़ोसियों से पुलिस ने पूछताछ की तो पता चला कि अगस्त-सितंबर के आसपास भी महिला को कभी गर्भवती नहीं महसूस किया। न ही उसके पास कोई बच्चा देखा गया। महिला के पति की करीब दो साल पहले मौत हो चुकी है। असल में बलियाणा गांव से एसआईटी को जानकारी मिली थी कि बच्चा नजफगढ़ में एक दंपति के पास है। गोद लेने वाली महिला रोहतक की जनता कालोनी की रहने वाली है और उसकी शादी नजफगढ़ में हुई थी। दंपति का कहना है कि उसकी शादी करीब पांच साल पहले हुई थी। लेकिन कोई बच्चा पैदा नहीं हुआ। वे बच्चे को गोद लेना चाहते थे। पानीपत में एक डॉक्टर से मुलाकात हुई थी। डॉक्टर और दाई के माध्यम से बच्चे को गोद लिया था। गोद लिए जाते वक्त कोई कानूनी प्रक्रिया भी नहीं अपनाई गई और गोद लेने के सारे दावे मौखिक हैं।
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पीजीआई से तो नहीं जुड़े पानीपत के डॉक्टर के तार
अब एसआईटी की जांच पीजीआई के डॉक्टर, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, पानीपत के डॉक्टर, दाई, जन्म देने कथित महिला व गोद लेने वाली दंपति तक पहुंच गई है। अब पुलिस पानीपत के उस संदिग्ध डॉक्टर का पीजीआई के डॉक्टरों से संबंध तलाश रही है।
दो महीने से अटकी है रिपोर्ट
एसआईटी को अब मधुबन लैब से बच्चे और उसकी कथित मां की डीएनए रिपोर्ट मिलने का इंतजार है। दो महीने से रिपोर्ट अटकी है। रिपोर्ट जल्द देने के लिए दो बार एसपी की ओर से और एक बार आईजी की ओर से लिखित अनुरोध किया जा चुका है। दोनों का डीएनए मैच नहीं हुआ तो पीजीआई में बच्चा खोने वाली अंजू और पति सन्नी का डीएनए टेस्ट करवाएगी।
पीजीआई ने दो बार जांच की मगर पुलिस को न सौंपी रिपोर्ट
पीजीआई की तरफ से मामले की दो बार अलग-अलग कमेटियों से जांच कराई गई। एसआईटी प्रभारी के अनुसार पीजीआई की ओर से एक भी जांच रिपोर्ट अभी तक नहीं सौंपी गई है। इसके लिए दो बार अनुरोध किया जा चुका है। बच्चा चोरी होने के बाद पुलिस प्रशासन ने बच्चे की तलाश में 40 टीमों का गठन कर जिले के 117 गांवों में सघन अभियान चलाया था। इस दौरान टीम ने जिले के प्रत्येक थानाक्षेत्र में आने वाले गांव में सादे कपड़ों में जांच पड़ताल की।
वर्जन
महिला के पड़ोसियों ने दावा किया है कि उन्होंने उसे गर्भवती नहीं देखा था। मामला पूरी तरह संदिग्ध है। इस कारण महिला व संबंधित बच्चे का डीएनए टेस्ट कराया जा रहा है। बार बार अनुरोध करने के बाद भी डीएनए में देरी की जा रही है।
डीएसपी डॉ रविंद्र, मामले में गठित एसआईटी के इंचार्ज
हो सकता है बड़ा खुलासा, एसआईटी को डीएनए रिपोर्ट का इंतजार
नजफगढ़ में जिस बच्चे को गोद दिया गया, उसकी असली बताई जा रही मां को कभी किसी ने गर्भवती नहीं देखा
पानीपत के एक डॉक्टर और दायी की भूमिका संदिग्ध, पीजीआई से उनके तार खंगाल रही पुलिस
शनि शर्मा
रोहतक।
पीजीआई से बच्चा चोरी के मामले की जांच में पुलिस के हाथ चौंकाने वाले तथ्य लगे हैं। दस सितंबर को जब पीजीआई से बच्चा चोरी हुआ उसके ठीक 18 दिन बाद नजफगढ़ के एक दंपति को पानीपत में एक बच्चा गोद दिया गया। एसआईटी की जांच में यह भी सामने आया है कि जिसे बच्चे की असली मां बताया गया है, उसे कभी आस पड़ोस के लोगों ने गर्भवती नहीं देखा। करीब दो साल पहले उसके पति की मौत हो चुकी है। इस मामले में पानीपत के एक डॉक्टर और दायी की भूमिका भी सामने आ रही है। पुलिस अब इनके पीजीआई से जुड़े तार खंगाल रही है। पुलिस अब बच्चे और उसकी मां बताई जा रही महिला की डीएनए रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।
पीजीआई से बच्चा चोरी का मामला चर्चित होने के बाद एसआईटी को इस बच्चे के संबंध में बलियाणा गांव से एक इनपुट मिला था। इसके बाद एसआईटी ने पानीपत जाकर महिला से पूछताछ की तो वह इस बात पर अड़ी रही कि उस बच्चे को उसी ने जन्म दिया है। महिला ने बताया कि डिलीवरी एक दाई के माध्यम से की गई थी। करीब 18 दिन तक बच्चे को अपने पास रखने के बाद पानीपत के एक डॉक्टर और दाई के सहयोग से महिला ने नजफगढ़ की महिला को उसे गोद दे दिया था।
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पड़ोसियों ने बताई ओर ही बात
दूसरी ओर जब महिला के पड़ोसियों से पुलिस ने पूछताछ की तो पता चला कि अगस्त-सितंबर के आसपास भी महिला को कभी गर्भवती नहीं महसूस किया। न ही उसके पास कोई बच्चा देखा गया। महिला के पति की करीब दो साल पहले मौत हो चुकी है। असल में बलियाणा गांव से एसआईटी को जानकारी मिली थी कि बच्चा नजफगढ़ में एक दंपति के पास है। गोद लेने वाली महिला रोहतक की जनता कालोनी की रहने वाली है और उसकी शादी नजफगढ़ में हुई थी। दंपति का कहना है कि उसकी शादी करीब पांच साल पहले हुई थी। लेकिन कोई बच्चा पैदा नहीं हुआ। वे बच्चे को गोद लेना चाहते थे। पानीपत में एक डॉक्टर से मुलाकात हुई थी। डॉक्टर और दाई के माध्यम से बच्चे को गोद लिया था। गोद लिए जाते वक्त कोई कानूनी प्रक्रिया भी नहीं अपनाई गई और गोद लेने के सारे दावे मौखिक हैं।
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पीजीआई से तो नहीं जुड़े पानीपत के डॉक्टर के तार
अब एसआईटी की जांच पीजीआई के डॉक्टर, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, पानीपत के डॉक्टर, दाई, जन्म देने कथित महिला व गोद लेने वाली दंपति तक पहुंच गई है। अब पुलिस पानीपत के उस संदिग्ध डॉक्टर का पीजीआई के डॉक्टरों से संबंध तलाश रही है।
दो महीने से अटकी है रिपोर्ट
एसआईटी को अब मधुबन लैब से बच्चे और उसकी कथित मां की डीएनए रिपोर्ट मिलने का इंतजार है। दो महीने से रिपोर्ट अटकी है। रिपोर्ट जल्द देने के लिए दो बार एसपी की ओर से और एक बार आईजी की ओर से लिखित अनुरोध किया जा चुका है। दोनों का डीएनए मैच नहीं हुआ तो पीजीआई में बच्चा खोने वाली अंजू और पति सन्नी का डीएनए टेस्ट करवाएगी।
पीजीआई ने दो बार जांच की मगर पुलिस को न सौंपी रिपोर्ट
पीजीआई की तरफ से मामले की दो बार अलग-अलग कमेटियों से जांच कराई गई। एसआईटी प्रभारी के अनुसार पीजीआई की ओर से एक भी जांच रिपोर्ट अभी तक नहीं सौंपी गई है। इसके लिए दो बार अनुरोध किया जा चुका है। बच्चा चोरी होने के बाद पुलिस प्रशासन ने बच्चे की तलाश में 40 टीमों का गठन कर जिले के 117 गांवों में सघन अभियान चलाया था। इस दौरान टीम ने जिले के प्रत्येक थानाक्षेत्र में आने वाले गांव में सादे कपड़ों में जांच पड़ताल की।
वर्जन
महिला के पड़ोसियों ने दावा किया है कि उन्होंने उसे गर्भवती नहीं देखा था। मामला पूरी तरह संदिग्ध है। इस कारण महिला व संबंधित बच्चे का डीएनए टेस्ट कराया जा रहा है। बार बार अनुरोध करने के बाद भी डीएनए में देरी की जा रही है।
डीएसपी डॉ रविंद्र, मामले में गठित एसआईटी के इंचार्ज