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फौजी ने कोच बनकर अपने बच्चों को किया तैयार, अब हैं इंटरनेशनल प्लेयर-ᄋᄂ₩ᅦU¢₩
Updated Mon, 31 Jul 2017 12:32 AM IST
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अमित कौशिक
रोहतक।
लेफ्टिनेंट कर्नल विक्रम सिंह धायल ने तीरंदाजी की कोचिंग लेकर अपने तीनों बच्चों को इंटरनेशनल प्लेयर बनाया है। उनकी कड़ी मेहनत की वजह से दो बेटियों और एक बेटे के रूप में देश को तीरंदाजी में बड़े खिलाड़ी मिले हैं। ये खिलाड़ी नेशनल और इंटरनेशनल गेम्स में मेडल जीतकर कई बार देश का सिर ऊंचा कर चुके हैं। राजीव गांधी स्टेडियम में चल रहे ट्रायल में विक्रम सिंह भी अपने तीनों बच्चों के साथ पहुंचे हैं।
मूल रूप से हिसार सेक्टर-13 निवासी विक्रम सिंह ने 1989 में एनडीए के माध्यम से आर्मी ज्वाइन की। कुछ साल जाट रेजिमेंट में बिताने के बाद वह आर्मी फिजिकल ट्रेनिंग कोर में बतौर ट्रेनर सेवाएं देने लगे। इसी दौरान उन्होंने तीरंदाजी में हाथ आजमाए और नेशनल लेवल तक खेले। उन्होंने खिलाड़ी के तौर पर भविष्य न बनाकर 2009 में कोच के लिए होने वाला एनआईएस का कोर्स पास किया। उन्होंने अपने बच्चों को इस खेल के लिए तैयार करने की रणनीति बनाई। विक्रम ने बताया कि उन्होंने जून 2014 की गर्मियों की छुट्टियों के दौरान बच्चों को तीरंदाजी की प्रैक्टिस के लिए बुलाया। शुरुआत से ही बच्चों ने लय पकड़नी शुरू कर दी। तीनों बच्चों ने कुछ दिनों की प्रैक्टिस में ही उसी साल दिसंबर में हुई अंडर-14 मिनी सब जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में मेडल हासिल कर लिए। इसके बाद उन्होंने इस खेल को गंभीरता से लेना शुरू किया तो पदकों की झड़ी लग गई। अगले ही साल 2015 में बड़ी बेटी खुशबू सब जूनियर चैंपियन बनी। जुड़वां भाई-बहन छोटी बेटी दिव्या और दिग्विजय ने भी सब जूनियर नेशनल में कई गोल्ड मेडल जीते। 2016 आते-आते तीनों ने इंटरनेशनल में पदक जीतने शुरू कर दिए। ताईवान में हुए एशिया कप में खुशबू ने सिल्वर जीता तो दिग्विजय ने एक गोल्ड और एक सिल्वर जीता। दिव्या ने टर्की में हुए इंटरनेशनल गेम में ब्रांज सहित जुलाई 2017 में हुए एशिया कप में दो गोल्ड और एक सिल्वर जीतकर देश का नाम रोशन किया।
कई बार फाइनल में गोल्ड के लिए भिड़ चुकीं दोनों बहनें
2016 में गोवा में हुई नेशनल सब जूनियर चैंपियनशिप में दोनों बहनें आखिरी दो खिलाड़ी के रूप में गोल्ड के लिए भिड़ीं। इसमें बड़ी बहन खुशबू ने गोल्ड हासिल कर छोटी दिव्या को सिल्वर से संतोष कराया। इसी तरह का मौका जमशेदपुर में हुई जूनियर नेशनल में भी आया, जब छोटी बहन ने बड़ी को गोल्ड जीतने पर बधाई दी और खुद सिल्वर मेडल हासिल किया।
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पिता का सपना तीनों को इंटरनेशनल आइकन बनाना
ले. कर्नल विक्रम सिंह का सपना तीनों बच्चों को इंटरनेशनल आइकन बनाने का है। वह कहते हैं कि चूंकि उनके तीनों बच्चे कंपाउंड वर्ग में खेलते हैं। इस वर्ग को अभी ओलंपिक में शामिल होना बाकी है। तब तक वह हर इंटरनेशनल में बच्चों को चमकता देखना चाहते हैं। इसके लिए वह अपनी ड्यूटी के अलावा सिर्फ उनके कॅरिअर पर ही फोकस रखते हैं।
- कर्नल विक्रम ने अपनी दो बेटी और एक बेटे को बनाया तीरंदाजी में चैंपियन
राजीव गांधी स्टेडियम में तीनों बच्चों के साथ पहुंचे ट्रायल देने
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रोहतक।
लेफ्टिनेंट कर्नल विक्रम सिंह धायल ने तीरंदाजी की कोचिंग लेकर अपने तीनों बच्चों को इंटरनेशनल प्लेयर बनाया है। उनकी कड़ी मेहनत की वजह से दो बेटियों और एक बेटे के रूप में देश को तीरंदाजी में बड़े खिलाड़ी मिले हैं। ये खिलाड़ी नेशनल और इंटरनेशनल गेम्स में मेडल जीतकर कई बार देश का सिर ऊंचा कर चुके हैं। राजीव गांधी स्टेडियम में चल रहे ट्रायल में विक्रम सिंह भी अपने तीनों बच्चों के साथ पहुंचे हैं।
मूल रूप से हिसार सेक्टर-13 निवासी विक्रम सिंह ने 1989 में एनडीए के माध्यम से आर्मी ज्वाइन की। कुछ साल जाट रेजिमेंट में बिताने के बाद वह आर्मी फिजिकल ट्रेनिंग कोर में बतौर ट्रेनर सेवाएं देने लगे। इसी दौरान उन्होंने तीरंदाजी में हाथ आजमाए और नेशनल लेवल तक खेले। उन्होंने खिलाड़ी के तौर पर भविष्य न बनाकर 2009 में कोच के लिए होने वाला एनआईएस का कोर्स पास किया। उन्होंने अपने बच्चों को इस खेल के लिए तैयार करने की रणनीति बनाई। विक्रम ने बताया कि उन्होंने जून 2014 की गर्मियों की छुट्टियों के दौरान बच्चों को तीरंदाजी की प्रैक्टिस के लिए बुलाया। शुरुआत से ही बच्चों ने लय पकड़नी शुरू कर दी। तीनों बच्चों ने कुछ दिनों की प्रैक्टिस में ही उसी साल दिसंबर में हुई अंडर-14 मिनी सब जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में मेडल हासिल कर लिए। इसके बाद उन्होंने इस खेल को गंभीरता से लेना शुरू किया तो पदकों की झड़ी लग गई। अगले ही साल 2015 में बड़ी बेटी खुशबू सब जूनियर चैंपियन बनी। जुड़वां भाई-बहन छोटी बेटी दिव्या और दिग्विजय ने भी सब जूनियर नेशनल में कई गोल्ड मेडल जीते। 2016 आते-आते तीनों ने इंटरनेशनल में पदक जीतने शुरू कर दिए। ताईवान में हुए एशिया कप में खुशबू ने सिल्वर जीता तो दिग्विजय ने एक गोल्ड और एक सिल्वर जीता। दिव्या ने टर्की में हुए इंटरनेशनल गेम में ब्रांज सहित जुलाई 2017 में हुए एशिया कप में दो गोल्ड और एक सिल्वर जीतकर देश का नाम रोशन किया।
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कई बार फाइनल में गोल्ड के लिए भिड़ चुकीं दोनों बहनें
2016 में गोवा में हुई नेशनल सब जूनियर चैंपियनशिप में दोनों बहनें आखिरी दो खिलाड़ी के रूप में गोल्ड के लिए भिड़ीं। इसमें बड़ी बहन खुशबू ने गोल्ड हासिल कर छोटी दिव्या को सिल्वर से संतोष कराया। इसी तरह का मौका जमशेदपुर में हुई जूनियर नेशनल में भी आया, जब छोटी बहन ने बड़ी को गोल्ड जीतने पर बधाई दी और खुद सिल्वर मेडल हासिल किया।
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पिता का सपना तीनों को इंटरनेशनल आइकन बनाना
ले. कर्नल विक्रम सिंह का सपना तीनों बच्चों को इंटरनेशनल आइकन बनाने का है। वह कहते हैं कि चूंकि उनके तीनों बच्चे कंपाउंड वर्ग में खेलते हैं। इस वर्ग को अभी ओलंपिक में शामिल होना बाकी है। तब तक वह हर इंटरनेशनल में बच्चों को चमकता देखना चाहते हैं। इसके लिए वह अपनी ड्यूटी के अलावा सिर्फ उनके कॅरिअर पर ही फोकस रखते हैं।
- कर्नल विक्रम ने अपनी दो बेटी और एक बेटे को बनाया तीरंदाजी में चैंपियन
राजीव गांधी स्टेडियम में तीनों बच्चों के साथ पहुंचे ट्रायल देने