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पिता और गुरुओं से सीख लेकर प्रदेशभर में जरूरतमंदों का कपड़े-जूते बांट रहे छात्र, व्यापारी और नौकरीपेशा

Thu, 03 Jan 2019 02:46 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 03 Jan 2019 02:46 AM IST
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पिता और गुरुओं से सीख लेकर प्रदेशभर में जरूरतमंदों का कपड़े-जूते बांट रहे छात्र, व्यापारी और नौकरीपेशा
फोटो
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पिता और गुरुओं से सीख लेकर प्रदेशभर में जरूरतमंदों को कपड़े-जूते बांट रहे छात्र, व्यापारी और नौकरीपेशा
-सामाजिक संगठन भी उक्त लोगों को कर चुके सम्मानित, ईट भट्ठों पर मजदूरों को खाद्य सामग्री भी कराते हैं उपलब्ध
महबूब अली
रोहतक। भले ही आज के समय में कुछ लोग मामूली सी बातों पर अपनों का ही खून बहाने पर उतारू हो रहे हों। पर ऐसे भी लोगों की कमी नहीं है, जो दूसरों के लिए कोई न कोई ऐसा कार्य कर जाते हैं, जिन्हें लोग जिंदगी भर भुला नहीं पाते। ऐसे ही पांच शख्स हैं कलानौर के किरयाणा व्यापारी दीपक मित्तल, नौकरीपेशा सोमबीर, मंदीप, रिंकू और सुनील। पांचों पिछले 15 साल से जरूरतमंदों को प्रदेशभर के विभिन्न स्थानों पर निशुल्क कपड़ों से लेकर जूतों और खाद्य सामग्री का वितरण कर रहे हैं। इसके लिए इन्हें सामाजिक संगठनों द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है।
कलानौर के रहने वाले दीपक मित्तल ने बताया कि अपने पिता सुरेंद्र मित्तल से सीख लेकर वह रोहतक के अलावा कलानौर, सोनीपत, पानीपत, कैथल, फतेहाबाद में ईंट भट्ठों और अन्य स्थानों पर जाकर जरूरतमंदों को गर्म कपड़े, जूतों एवं खाद्य सामग्री का वितरण करते हैं। अब तक पचास हजार से अधिक को कपड़े बांट चुके हैं। उनका कहना है कि गरीबों की मदद कर मन को जो शांति मिलती है, उसे शब्दों में बया नहीं किया जा सकता है। वे अपनी किरयाणा की दुकान से ही कपड़े, जूते लेकर जरूरतमंदों में वितरण करते हैं।
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इसके अलावा चुलियाणा गांव के रहने वाले श्री नारायणी सेना चेरिटबल ट्रस्ट के अध्यक्ष सोमबीर शर्मा, खिड़वाली निवासी नौकरीपेशा मंदीप कुमार, रिंकू और जिंदराण गांव निवासी सुनील भी रोहतक, सांपला, कलानौर, लाखनमाजरा क्षेत्र ेमं गरीबों को कपड़ों से लेकर खाद्य सामग्री का वितरण कर रहे हैं। रिंकू बीए द्वितीय वर्ष के छात्र हैं। इसके लिए चारों को मां दानो देवी धर्मार्थ सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष तसवीर सिंह हुड्डा द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है।
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कॉल पर कपड़े लेने पहुंच जाते हैं चारों
सोमबीर ने बताया कि जिस भी स्थान पर उन्हें कोई रिटायर्ड कपड़े देने के लिए कॉल करता है। वह लेने के लिए दौड़ पड़ते हैं। इसके लिए फेसबुक, ट्विटर पर भी उन्होंने अपने मोबाइल नंबर शेयर किए हुए हैं। इसके अलावा परिजन भी उन्हें कपड़ों को खरीदने में सहयोग करते हैं। चारों ने गुरु से सीख लेकर इस तरह की मुहिम चलाने की बात कही है।
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