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सूबे के दो मेडिकल कॉलेज नहीं कर सकते एक नवजात बच्ची के दिल का उपचार

Thu, 03 May 2018 02:52 AM IST
Updated Thu, 03 May 2018 02:52 AM IST
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सूबे के दो मेडिकल कॉलेज नहीं कर सकते एक नवजात बच्ची के दिल का उपचार
फोटो सहित एसएनजे एक : खानपुर मेडिकल कॉलेज और पीजीआई रोहतक की व्यवस्थाओं पर रोष जताती महिला।
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सूबे के दो मेडिकल कॉलेज नहीं कर सकते एक नवजात बच्ची के दिल का उपचार
खानपुर ने भेजा रोहतक, पीजीआई दे रहा मरीज को बाहर ले जाने की सलाह
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
खानपुर मेडिकल कॉलेज और पीजीआईएमएस रोहतक ने एक नवजात बच्ची के दिल का उपचार करने में असमर्थता जाहिर करते हुए परिजनों को दिल्ली जाने की सलाह दे दी है। इस पर परेशान परिजनों का दर्द बुधवार आखिरकार फूट ही पड़ा। परिजनों ने रोष जताते हुए बताया कि खानपुर मेडिकल कॉलेज ने रोहतक पीजीआई भेज दिया, अब पीजीआई रोहतक दिल्ली जाने की सलाह दे रहा है। ऐसे में वह अनपढ़ और आर्थिक रूप से कमजोर लोग कहां जाएं।
स्वास्थ्य विभाग के अस्पतालों की तर्ज पर अब प्रदेश के मेडिकल कॉलेज भी मरीजों को रेफर करने की व्यवस्था पर अमल करने लगे हैं। बुधवार वार्ड दो के बाहर सोनीपत के जुआं-माहरा गांव की बिमलेश ने रोष जताते हुए बताया कि वह मरीज गायत्री को लेकर खानपुर मेडिकल कॉलेज गए थे। वहां डॉक्टरों ने उपचार करने में असमर्थता जाहिर करते हुए पीजीआई रोहतक भेज दिया। रोहतक में बेटी ने बेटी को जन्म दिया, अब डॉक्टर कह रहे हैं कि बच्ची के दिल में छेद है। उसके उपचार के लिए उसे दिल्ली ले जाने की जरूरत है। वह अपने मरीज को दिल्ली में ले जाने की स्थिति में नहीं है। संस्थान में डॉक्टरों का कहना है कि उनके यहां बच्चों के दिल के डॉक्टर नहीं हैं। इसके साथ ही बिमलेश ने बताया कि खानपुर मेडिकल कॉलेज वालों ने रोहतक पीजीआई तो भेज दिया और कार्ड पर लिख दिया कि वह अपनी मर्जी से लेकर जा रहे हैं। यह दो तरफा डॉक्टरों की कार्रवाई उनकी परेशानी को बढ़ा रही है। वह मरीज को लेकर कहीं नहीं जाएंगे और न ही वह ले जाने की स्थिति में हैं। संस्थान में उन्हें एंबुलेंस सुविधा तक नहीं दी जा रही है। परिजनों ने आरोप जड़ते हुए कहा कि उन्हें डॉक्टर कह रहे हैं कि महंगे फोन और सूट का प्रयोग कर सकते हैं और उपचार बाहर नहीं करा सकते।
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कहां गया संस्थान का नियोनेटाल विभाग
प्रदेश में जननी स्वास्थ्य सुरक्षा योजना में जच्चा व बच्चा के उपचार के लिए व्यवस्था है। इसमें जच्चा के साथ 30 दिन तक नवजात को किसी भी समस्या होने पर नि:शुल्क उपचार देने का नियम है। इसके बावजूद एक दिन की नवजात बच्ची के उपचार के लिए हाथ खडे़ करना संस्थान को संदेह में खड़ा करता है। जबकि पीजीआईएमएस रोहतक में नवजात बच्चों के लिए स्पेशल नियोनेटाल विभाग है। लेकिन इसमें भी पेंच फंसा है कि इस विभाग में काम करने के लिए कोई तैयार नहीं है। संस्थान जिसे इस विभाग में शिफ्ट करना चाहता है, उनका दावा बाल रोग विभाग का है। वहीं जो इसके लिए कोर्स करके आए हैं वह बाल रोग विभाग नहीं छोड़ना चाहते। कुर्सी के चक्कर में विभाग दम तोड़ रहा है और खामियाजा मरीज भुगत रहे हैं।
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मुफ्त उपचार की योजना छलावा, दवा तक मंगा रहे बाहर से
पीजीआईएमएस में मुफ्त उपचार की योजना छलावा बनी हुई है। यहां सामान्य डिलीवरी से लेकर सर्जरी से होने वाली डिलीवरी सभी की दवाएं व अन्य सामान बाहर से मंगाया जाता है। यहीं नहीं नवजात के जन्म लेने के 30 दिन तक नि:शुल्क उपचार मिलने वाली सुविधा भी यहां नदारद हैं। अधिकांश परिजनों को उपचार का सारा सामान बाहर से मंगाना पड़ता है। अव्यवस्थाओं से परेशान मरीज अपने करीबियों को फोन करके पूछते हैं कि उनका कोई जानकार है क्या संस्थान में, जिससे उन्हें सुविधाएं मिल सकें।

आधार कार्ड न होना बन जाता है मुसीबत
बहादुरगढ़ निवासी सुमित ने रोष जताते हुए बताया कि वह अपने मरीज को महिला रोग विभाग में आया था। लेकिन आधार कार्ड के बिना डॉक्टरों ने उसका अल्ट्रासाउंड जांच करने से ही मना कर दिया। डॉक्टर इस जिद पर अडे़ रहे कि उन्हें महिला का आधार कार्ड या पहचान पत्र ही चाहिए। ऐसी स्थिति में उसे बहादुरगढ़ जा कर पहचान पत्र लाना पड़ा। तब डॉक्टरों ने महिला की अल्ट्रासाउंड जांच की।


बोली अधिकारी
परिजनों को नवजात बच्ची की स्थिति को बता दिया गया है। हमारे पास पीड्स हार्ट सर्जन नहीं हैं, इसका उपचार दिल्ली एम्स में बेहतर हो सकता है। यही बात परिजनों को बताई गई है।
-डॉ. गीता गठवाला, सीनियर प्रोफेसर, बाल रोग विभाग, पीजीआईएमएस।
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