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पीपीपी मोड पर सीटी स्कैन के रेट को लेकर हंगामा
Updated Tue, 20 Jun 2017 01:23 AM IST
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पीपीपी मोड पर सीटी स्कैन के रेट को लेकर हंगामा
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। पीजीआईएमएस में पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड पर एमआरआई और सीटी स्कैन की सुविधा होने के बाद भी मरीज से रुपये अधिक लेने का मामला सामने आया है। हालांकि विरोध के बाद उसके रुपये वापस कर दिए गए हैं।
दरअसल, अधिवक्ता रोहित मुदगिल की मां संतोष देवी का एक प्राइवेट अस्पताल में उपचार चल रहा है। जांच के बाद डॉक्टरों ने सीटी स्कैन व्होल एबडोमेन विद कंट्रास्ट टेस्ट कराने के लिए कहा। इस पर रोहित पीपीपी मोड के तहत लगाई गई मशीनों पर टेस्ट कराने के लिए अपनी मां को लेकर पीजीआईएमएस में पहुंचे। वहां पर 660 रुपये छूट के बाद अधिवक्ता से चार हजार रुपये जमा कराए गए। बाहर निकलने पर उन्होंने रेट लिस्ट देखी। जिस टेस्ट के लिए अंदर चार हजार रुपये लिए गए थे लिस्ट में उसका रेट 3010 रुपये था। अधिक रुपये लेने पर अधिवक्ता ने संबंधित कंपनी के अधिकारी से शिकायत की और इसका विरोध जताया। दोनों के बीच काफी बहस हुई। आखिर में अधिवक्ता ने टेस्ट कराने से इनकार कर दिया और रुपये वापस लेकर वहां से चले गए।
नियमानुसार ही काम किया जा रहा है। प्राइवेट अस्पताल के मरीजों के लिए बाहर बोर्ड लगा दिया जाएगा। इससे मरीजों को कोई भी असमंजस की स्थिति नहीं होगी।
- विजय झा, मैनेजर।
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अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। पीजीआईएमएस में पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड पर एमआरआई और सीटी स्कैन की सुविधा होने के बाद भी मरीज से रुपये अधिक लेने का मामला सामने आया है। हालांकि विरोध के बाद उसके रुपये वापस कर दिए गए हैं।
दरअसल, अधिवक्ता रोहित मुदगिल की मां संतोष देवी का एक प्राइवेट अस्पताल में उपचार चल रहा है। जांच के बाद डॉक्टरों ने सीटी स्कैन व्होल एबडोमेन विद कंट्रास्ट टेस्ट कराने के लिए कहा। इस पर रोहित पीपीपी मोड के तहत लगाई गई मशीनों पर टेस्ट कराने के लिए अपनी मां को लेकर पीजीआईएमएस में पहुंचे। वहां पर 660 रुपये छूट के बाद अधिवक्ता से चार हजार रुपये जमा कराए गए। बाहर निकलने पर उन्होंने रेट लिस्ट देखी। जिस टेस्ट के लिए अंदर चार हजार रुपये लिए गए थे लिस्ट में उसका रेट 3010 रुपये था। अधिक रुपये लेने पर अधिवक्ता ने संबंधित कंपनी के अधिकारी से शिकायत की और इसका विरोध जताया। दोनों के बीच काफी बहस हुई। आखिर में अधिवक्ता ने टेस्ट कराने से इनकार कर दिया और रुपये वापस लेकर वहां से चले गए।
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नियमानुसार ही काम किया जा रहा है। प्राइवेट अस्पताल के मरीजों के लिए बाहर बोर्ड लगा दिया जाएगा। इससे मरीजों को कोई भी असमंजस की स्थिति नहीं होगी।
- विजय झा, मैनेजर।