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शिक्षा: किताबें

Tue, 10 Apr 2018 03:16 AM IST
Updated Tue, 10 Apr 2018 03:16 AM IST
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शिक्षा: किताबें
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फोटो नंबर : 120

निजी स्कूलों में इस बार भी पढ़ाई जाएंगी निजी प्रकाशकों की किताबें
एनसीईआरटी की किताबों से निजी स्कूलों की दूरी बरकरार, कमीशन ने निजी प्रकाशकों की किताबों में बनाई रुचि
विकास सैनी
रोहतक
शिक्षा के बाजार में निजी स्कूलों की मनमानी जारी है। इस बार भी इन स्कूलों में निजी प्रकाशकों की ही किताबें पढ़ाई जानी है। इसके लिए स्कूल संचालकों व निजी पब्लिशर्स के बीच समझौता हो चुका है। बच्चों से भी एनसीईआरटी के बजाय निजी प्रकाशकों की किताबें ही मंगवाई जा रही हैं। इन किताबों पर मोटा कमीशन मिलने के चलते यह खेल खेला जा रहा है। बाजार में अलग अलग कक्षाओं के दो हजार हजार रुपये से 4500 रुपये तक के बुक सेट धड़ल्ले से बेचे जा रहे हैं। ये किताबें कुछ स्कूलों में अंदर से तो कुछ में तय दुकान से ही खरीदना अनिवार्य किया गया है। अमर उजाला ने किताबों के इस खेल का खुलासा करने के लिए विभिन्न स्कूलों का दौरा किया तो यह सच सामने आया।
स्कूल में ही लगे हैं बुक स्टॉल
शहर से बाहर दिल्ली रोड स्थित एक निजी स्कूल में अंदर ही बुक स्टॉल लगा है। यहां से ही अभिभावकों को बच्चों के लिए किताबें खरीदनी पड़ रही हैं। किताब खरीद कर ले जा रहे एक बच्चे के पिता ने बताया कि स्कूल ने निजी प्रकाशकों की ही किताबें खरीदने को कहा है। बेटी की चौथी कक्षा की किताबें तीन हजार रुपये में आई हैं। जबकि एनसीईआरटी की किताबें कहीं सस्ती हैं। यह एक किताब 40 से 50 रुपये में आ सक ती है। ज्यादातर स्कूलों ने इस बार बाजार में पुस्तक विक्रेताओं से टाइअप किया है। इसके तहत हर स्कूल की एक से दो दुकानें तय हैं। यहीं से बच्चों के लिए किताबों मिलेंगी। इसी कड़ी में शहर के रेलवे रोड व अन्य बाजारों में बुक डिपो पर अलग अलग स्कूलों के नाम के लंबे चौड़े बोर्ड लगाए गए हैं। यहां दिन भर अभिभावकों की खासी भीड़ लगी रहती है।
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कापियां स्कूल से ही मिलेंगी
निजी स्कूलों ने अपनी कमाई को कम नहीं करने का जोरदार प्लान बनाया है। इसके तहत अभिभावकों को किताबें भले ही बाजार में तय दुकान से खरीदनी हो, मगर कापियां स्कूल से ही खरीदनी होंगी। इन कापियों पर स्कूल का नाम भी छपा है। यह 15 से 20 कापियों का बंडल 800 से 1500 रुपये तक दिया जा रहा है। बाहर से खरीदी गई कापियां स्कूल में मान्य नहीं हैं।
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पिछले साल पकड़े थे कई स्कूल
स्कूलों में निजी प्रकाशकों की किताबें पढ़ाए जाने को लेकर पिछले साल अभिभावकों ने काफी हंगामा किया था। अभिभावक संघ के विरोध व शिकायत के बाद प्रशासन ने कार्रवाई के लिए एक टीम गठित की। टीम में संघ के सदस्य भी शामिल रहे। कार्रवाई के दौरान करीब एक दर्जन से अधिक स्कूलों में निजी किताबें पढ़ाए जाने की पुष्टि हुई। इसके बाद प्रशासन ने रिपोर्ट आयुक्त को सौंपी। आयुक्त ने इस मामले में कार्रवाई के निर्देश जारी किए। इसके बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
प्रशासन नहीं कर रहा कार्रवाई
एनसीईआरटी के बजाय स्कूलों में निजी प्रकाशकों की किताबें पढ़ाई जा रही हैं। इसे लेकर प्रशासन चुप है। अब तक पिछले साल जारी हुए कार्रवाई के निर्देश भी अमल में नहीं लाए गए हैं। इस मामले को लेकर आयुक्त से मुलाकात कर स्थिति जानी जाएगी। कार्रवाई नहीं होने पर संघ कड़ा कदम उठाएगा।

-यशवंत, अध्यक्ष, अभिभावक संघ।
निजी स्कूलों का प्रयास सरकारी किताबें पढ़ाने का ही रहता है। इनमें सिलेबस कम रहता है। सामान्य ज्ञान, कम्प्यूटर सरीखे विषय ही नहीं हैं। इसलिए अतिरिक्त किताबें लगवानी पड़ती हैं। अंग्रेजी के साथ ग्रामर व वर्क बुक होने से विद्यार्थी बेहतर तैयारी कर सकता है। इससे परीक्षा परिणाम भी बोर्ड से बेहतर आता है। पढ़ाई के बाद नौकरी में भी विद्यार्थियों को फायदा मिलता है। मान्यता प्राप्त व अच्छे स्कूल नियमों का पालन कर रहे हैं।
-रवींद्र नांदल, अध्यक्ष, प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन।
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