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दादरी की 70 फीसदी जनता मान रही थी जिले का नहीं दूंगा दर्जा: सीएम

Mon, 16 Oct 2017 02:18 AM IST
Updated Mon, 16 Oct 2017 02:18 AM IST
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दादरी की 70 फीसदी जनता मान रही थी जिले का नहीं दूंगा दर्जा: सीएम
दादरी की 70 फीसदी जनता मान रही थी जिला का नहीं दूंगा दर्जा: सीएम
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चरखी दादरी।
मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने बार एसोसिएशन के कार्यक्रम में अपना सच उगलते हुए कहा कि चरखी दादरी की करीब 80 प्रतिशत जनता के दिमाग में थी कि वे 18 सितंबर की रैली में चरखी दादरी को जिला घोषित नहीं करेंगे। इस मामले पर लंबी राजनीति चलने के चलते सरकार अपना कार्यकाल पूरा होने पर ही दादरी को जिला घोषित करेगी। इस दौरान वकीलों ने शहर के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय को बाहर भेजकर इस जगह पर कोर्ट भवन बनाए जाने की मांग रखी। सीएम ने जिला बार एसोसिएशन के 16 सूत्रीय मांगपत्र में से कुछ मांगों को जल्द से जल्द परवान चढ़ाने का आश्वासन दिया। इस दौरान उन्होंने नए व पुराने चैंबरों को कोर्ट कांप्लेक्स से जोड़ने के लिए 21 लाख रुपये की राशि देने की भी घोषणा की। इस दौरान दादरी बार एसोसिएशन के सभागार में मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने ई-लाइब्रेरी का शुभारंभ भी किया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक कार्यक्रम में न्यायाधीश की न्याय शक्ति को दैवीय शक्ति माना था। मुख्यमंत्री ने कहा कि न्यायाधीश किसी भी मामले में न्याय करने की दैवीय शक्ति रखते हैं । उन्होंने कहा कि वकील को अपने मुवक्किल की हार-जीत का पता तो चल ही जाता है ऐसे में वकील को चाहिए कि वह हारने वाले पक्ष को उसकी हार पहले ही बता देनी चाहिए और उसे फैसला करने को कह देना चाहिए ताकि वह आर्थिक बोझ से बच सके। सीएम ने कहा कि वकील को लड़ाई नहीं न्याय दिलाने का प्रयास करना चाहिए।आज काफी ऐसे लोग है जो अपनी पूरी संपत्ति अदालती केसों में भी गंवा देते हैं। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने बार एसोसिएशन के मांगपत्र पर विचार करते हुए कहा कि इसमें जो भी मांगें पूरी हो सकेंगी, उन सभी पर विभिन्न सरकारी विभागों के माध्यम से काम करवाया जाएगा। उन्होंने मौके पर वकीलों के चैंबरों को जोडने के लिए गलियारा बनवाने के लिए लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए तथा बार एसोसिएशन को 21 लाख रुपए देने की घोषणा की। कार्यक्रम में दादरी जिला बार एसोसिएशन प्रधान बाबू दयानंद, सचिव देवेंद्र चाहर, कोषाध्यक्ष सचिन सिवाच, वरिष्ठ अधिवक्ता जीतराम गुप्ता, रामप्रसाद जांगड़ा, फतेहसिंह श्योराण, रामकिशन शर्मा, कुलदीप जोशी, वेदपाल सांगवान, जगतनारायण शर्मा, सूबे सिंह, दरियाव सिंह, बलवान सिंह, कर्मबीर छिकारा, ओमप्रकाश पंवार, मान जैन आदि अधिवक्ता मौजूद थे।
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अधिवक्ताओं को हुआ फायदा
मुख्यमंत्री ने कहा कि दादरी को जिला बनाए जाने से सबसे बड़ा फायदा दादरी में अधिवक्ताओं को भी हुआ है। अदालत में अब जजों की नई सीटें आ गई हैं। इस अवसर पर दादरी बार एसोसिएशन प्रधान एडवोकेट दयानंद ने मुख्यमंत्री मनोहरलाल का स्वागत किया और अभिनंदन पत्र भेंट किया। सचिव देवेंद्र चाहर ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सहित सांसद धर्मबीर सिंह, विधायक सुखविंद्र सिंह, भाजपा प्रदेश महामंत्री संदीप जोशी व दादरी निगरानी समिति के चेयरमैन सोमबीर सांगवान, उपायुक्त विजय कुमार सिदप्पा को बार के वरिष्ठ सदस्यों व पदाधिकारियों ने सम्मानित किया। भाजपा जिलाध्यक्ष रामकिशन शर्मा ने बार की ओर से मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।
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सीएम ने जिलाध्यक्ष पर ली चुटकी तो हंस पड़े अधिवक्ता
बार एसोसिएशन के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम ने भाजपा जिलाध्यक्ष एडवोकेट रामकिशन शर्मा पर भी चुटकी ली। सीएम ने जब संबोधन शुरू किया तो उन्होंने बार एसोसिएशन पदाधिकारियों के बाद जिलाध्यक्ष रामकिशन शर्मा का भी नाम लिया। सीएम ने कहा कि पार्टी के जिलाध्यक्ष अधिवक्ताओं की सूची में भी शुमार यकीनन रखते होंगे। उनके इस बात पर सभागार में मौजूद अधिवक्ता खिलखिलाते नजर आए।

ये रखी अधिवक्ताओं ने सीएम के सामने मांगें
सीएम को सौंपे मांगपत्र में अधिवक्ताओं ने नए व पुराने चैंबरों को कॉरिडोर द्वारा कोर्ट कांप्लैक्स व मिनी सचिवालय से जोड़ने, उपभोक्ता अदालत, लेबर कोर्ट व पीएलए कोर्ट शुरू करवाने, जूनियर एडवोकेट को शुरूआत के पांच साल तक भत्ता दिया जाने व मिनी सचिवालय के दोनों मेन गेट खुलवाने, कोर्ट परिसर को दूसरी जगह शिफ्ट न करवाने, पुरानी खंडहर जेल व साथ लगती पुरानी बिल्डिंग को डिमोलिश करने व राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय को शहर से बाहर शिफ्ट कर यहां कोर्ट का भवन बनवने, 65 वर्ष से अधिक आयु के अधिवक्ताओं की पेंशन शुरू करवाने की मांग सीएम के सामने रखीं।
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