फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rohtak News ›   ीीी

ीीी

Mon, 10 Jul 2017 12:33 AM IST
Updated Mon, 10 Jul 2017 12:33 AM IST
विज्ञापन
ीीी
हालात : करोड़ों रुपये खर्च फिर भी डराती है सूखी साबी
विज्ञापन

अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
प्रदेश सरकार की साबी को लेकर चल रही हीला हवाली रेवाड़ी ही नहीं आसपास के क्षेत्र को भी नुकसान पहुंचा सकती है। अगर साबी में बाढ़ आती है तो किसी बड़े नुकसान से इनकार नहीं किया जा सकता। 1977 की बाढ़ में दिल्ली तक को नुकसान हुआ था, हालांकि इसके बाद साबी पर पुल बनाया गया। इसमें अभी भी काम पूरा नहीं होने से फिर किसी अनहोनी की आशंका को नकारा नहीं जा सकता। एशिया के 15 मीटर तक के बांधों में साबी नदी पर बना बांध सर्वाधिक जलभराव की क्षमता वाला बांध है। इसका जल संरक्षण क्षेत्र 5280 स्क्वायर किलोमीटर है। वर्ष-1977 में आई बाढ़ के बाद साबी पर पुल बनाना शुरू किया गया था। इसके बाद यह काम वर्ष 1986 तक चला। बाद में इसे बंद कर दिया गया। इसके बाद इसे 1987 में फिर से शुरू किया गया। 1989 में फिर इसे बंद कर दिया गया। यह सही है कि कई सालों से बारिश नहीं होने से साबी सूखी पड़ी है। लोगों का कहना है कि अगर फिर भी कभी बाढ़ आती है तो बहुत बड़ी तबाही ला सकती है।

हुआ था बहुत बड़ा नुकसान
साबी में वर्ष-1977 में आई बाढ़ अभी लोगों के जेहन में ताजा है। बाढ़ आने से नेशनल हाईवे, रेलवे की पटरियां, मोहल्ले सभी डूब गए थे। बाढ़ का पानी दिल्ली तक चला गया था। वहीं यमुना के पानी के उफान ने दिल्ली को और अधिक नुकसान पहुंचाया था। हालांकि इसके बाद कभी इस तरह की बाढ़ नहीं आई, लेकिन बरसात में खतरा बना रहता है कि इस नदी पर स्थित शहरों और क्षेत्रों में भारी बारिश हुई तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
विज्ञापन


कई बार शुरू हुआ तो कई बार रुका
1977 की बाढ़ के बाद 1978 में साबी पर पुल बनना शुरू हुआ। इसके बाद इस काम को 1986 में काम रोक दिया। इसका सामान वापस भेज दिया गया। 1987 में फिर काम शुरू हुआ। यहां इसके बनाने का उद्देश्य बाढ़ की बजाय जल संरक्षण बताया गया। इसे भी 1989 में बंद कर दिया गया। यहां लगने वाले 18 गेटों में से केवल एक ही गेट लगा। कई कारणों के चलते काम बीच में ही बंद करना पड़ा। अगर कभी पीछे से तेजी से बाढ़ आती है तो यह पानी इन खुले गेटों से होकर भारी तबाही ला सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


यूं है आशंका
साबी पर राजस्थान में करीब सात बांध बने हैं। करीब 200 साल पहले अलवर के सोतानाला बुचारा बांध बनाया गया। इस बांध की ऊंचाई 108 फीट है। वर्ष 2004 में आई तेज बारिश के चलते इस बांध में 106 फीट तक पानी चला गया था। उस समय इस बांध के टूटने के आसार बन गए थे। वहीं इसके नीचे ही रामपुरा बांध है। यह बांध भी 30 फीट ऊंचाई है। अगर कभी फिर से स्थिति बिगड़ती है और यह बांध टूटता है तो आगे बने बांध अपने आप टूट जाएंगे और साबी से होकर भारी तबाही चल सकती है।
------------
मैंने वर्ष 2005 में साइंस कांग्रेस में इस पर एक प्रेजेंटेशन दिया है। अगर कभी साबी में बाढ़ आती है तो बहुत नुकसान हो सकता है। इस तरफ ध्यान देने की बहुत जरूरत है। - कंवर सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर, डाइट रेवाड़ी


बाढ़ आए या ना आए, लेकिन गेट तो लगने चाहिए। यह काम पूरा होना चाहिए। इससे इस पुल के उद्देश्य को पूरा किया जा सके। - रणधीर सिंह कापड़ीवास, विधायक, रेवाड़ी

इस मामले को दिखवाया जाएगा। मामला बहुत पुराना है। इसे दिखवाने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। - प्रवीण कुमार दहिया, एसई, सिंचाई विभाग
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed