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Rohtak News: महम में 50 फीट ऊंचे रावण के पुतले का हुआ दहन
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महम। कस्बे में शनिवार को विजयदशमी पर्व धूमधाम से मनाया गया। नई अनाज मंडी परिसर में 50 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया। इससे पूर्व इलाके में शोभायात्रा निकाली गई। इसमें कलाकारों ने राम, लक्ष्मण, हुनमान, रावण व अन्य किरदार में नजर आए। दहन के लिए पहली बार 50 फीट का पुतला दिल्ली से लाया गया। इससे पूर्व यहां 35 फीट का रावण का पुतला ही जलता रहा है। महम में पिछले 74 साल से रावण, कुंभकर्ण व मेघनाद के पुतलों का दहन का किया जाता है।
मूर्ख मंडल संस्था ने शुरू की थी परंपरा
महम में पहला दशहरा व रावण के पुतले का दहन वर्ष 1950 में हुआ था। इसके बाद से यह परंपरा चली आ रही है। बताया जा रहा है कि बंटवारे के बाद पाकिस्तान से भारत आए परिवारों ने महम में रावण दहन आरंभ किया था। क्लब के प्रधान ईश्वर लाल दुरेजा ने बताया कि वर्तमान पंजाबी रामा क्लब परिसर में रामलीला का आयोजन किया जाता था। रामलीला बंद होने के बाद रासलीला व रामकथा का आयोजन होता रहा है। पंजाबी रामा क्लब की स्थापना के समय इसका नाम मूर्ख मंडल रखा गया था। लगभग 39 साल पहले इसका नाम पंजाबी रामा क्लब किया गया।
निकाली जाती है शोभायात्रा
दशहरे के दिन शाम चार से छह बजे तक श्रीराम व रावण की सेना ने रथ पर सवार होकर शोभायात्रा निकाली। यह यात्रा महम के बाजार से होते हुए नई अनाज मंडी पहुंची। यहां श्रीराम व रावण की सेना के बीच के युद्ध हुआ। राम की सेना ने राक्षस सेना का वध कर दिए जाने के बाद राम ने रावण का वध किया। इसके बाद दहन की प्रक्रिया चली।
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कोरोना भी नहीं रोक पाया परंपरा
कोरोना काल में भी रावण दहन किया गया। उस समय सिर्फ 10 फीट का ही पुतला बनाया गया था। उस समय रामलीलाएं नहीं हो पाई थीं। इस तरह के रावण दहन कार्यक्रम की योजना भी नहीं थी। बाद में पंजाबी रामा क्लब परिसर में ही रावण दहन की योजना बनाई। कोरोना में भी यहां यह परंपरा निभाई गई। इसके लिए मास्क लगाकर रावण दहन किया गया
महम में पहले दस मुख वाले रावण का ही पुतला जलाया जाता था, लेकिन बीच में कुछ समय यहां के रावण के दस मुख के बजाय एक ही मुख बनाया जाने लगा। पंजाबी रामा क्लब के संयोजक जोगिंद्र मुंजाल व जोगिंद्र गिरोत्रा ने बताया कि रावण का रोल सन्नी अरोड़ा ने किया। विजय अरोड़ा ने मेघनाद का किरदार निभाया। श्रीराम का रोल यश अरोड़ा ने व लक्ष्मण का रोल नमन ने किया। हनुमान का रोल रमन ने किया।
मूर्ख मंडल संस्था ने शुरू की थी परंपरा
महम में पहला दशहरा व रावण के पुतले का दहन वर्ष 1950 में हुआ था। इसके बाद से यह परंपरा चली आ रही है। बताया जा रहा है कि बंटवारे के बाद पाकिस्तान से भारत आए परिवारों ने महम में रावण दहन आरंभ किया था। क्लब के प्रधान ईश्वर लाल दुरेजा ने बताया कि वर्तमान पंजाबी रामा क्लब परिसर में रामलीला का आयोजन किया जाता था। रामलीला बंद होने के बाद रासलीला व रामकथा का आयोजन होता रहा है। पंजाबी रामा क्लब की स्थापना के समय इसका नाम मूर्ख मंडल रखा गया था। लगभग 39 साल पहले इसका नाम पंजाबी रामा क्लब किया गया।
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निकाली जाती है शोभायात्रा
दशहरे के दिन शाम चार से छह बजे तक श्रीराम व रावण की सेना ने रथ पर सवार होकर शोभायात्रा निकाली। यह यात्रा महम के बाजार से होते हुए नई अनाज मंडी पहुंची। यहां श्रीराम व रावण की सेना के बीच के युद्ध हुआ। राम की सेना ने राक्षस सेना का वध कर दिए जाने के बाद राम ने रावण का वध किया। इसके बाद दहन की प्रक्रिया चली।
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कोरोना भी नहीं रोक पाया परंपरा
कोरोना काल में भी रावण दहन किया गया। उस समय सिर्फ 10 फीट का ही पुतला बनाया गया था। उस समय रामलीलाएं नहीं हो पाई थीं। इस तरह के रावण दहन कार्यक्रम की योजना भी नहीं थी। बाद में पंजाबी रामा क्लब परिसर में ही रावण दहन की योजना बनाई। कोरोना में भी यहां यह परंपरा निभाई गई। इसके लिए मास्क लगाकर रावण दहन किया गया
महम में पहले दस मुख वाले रावण का ही पुतला जलाया जाता था, लेकिन बीच में कुछ समय यहां के रावण के दस मुख के बजाय एक ही मुख बनाया जाने लगा। पंजाबी रामा क्लब के संयोजक जोगिंद्र मुंजाल व जोगिंद्र गिरोत्रा ने बताया कि रावण का रोल सन्नी अरोड़ा ने किया। विजय अरोड़ा ने मेघनाद का किरदार निभाया। श्रीराम का रोल यश अरोड़ा ने व लक्ष्मण का रोल नमन ने किया। हनुमान का रोल रमन ने किया।