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सोनीपत डीसी आफिस का स्टांप आडिटर व जेबीटी टीचर बहन को क्लीन चिट
Updated Fri, 25 May 2018 02:44 AM IST
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दुष्कर्म के मामले में बिना मेडिकल जांच दाखिल आरोप पत्र अदालत में खारिज --
सोनीपत डीसी ऑफिस का स्टांप ऑडिटर और जेबीटी टीचर बहन को क्लीन चिट
- एडीजे आरपी गोयल की अदालत ने नहीं माने आरोप केस चलाने योग्य
- आठ माह बाद करवाई थी रिपोर्ट दर्ज, पुलिस ने नहीं करवाया मेडिकल
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
दुष्कर्म के मामले में एडीजे राजेंद्र पाल की अदालत ने सोनीपत डीसी आफिस के स्टांप ऑडिटर स्टालिन व उसकी बहन कांता को क्लीनचिट दे दी। कांता मोखरा गांव में जेबीटी टीचर है। आरोप खारिज होने के बाद बहन-भाई ने कहा कि उनके ऊपर लगा बदनामी का दाग हट गया है।
जिला अदालत के वरिष्ठ वकील जेएस गखड़ ने बताया अगस्त 2017 में शहर की एक युवती ने पुरानी सब्जी मंडी थाने में शिकायत दी कि वह मेडिकल मोड़ पर थी। उसे मेडिकल मोड़ से तेज कालोनी में ले जाया गया, जहां स्टालिन ने उसके साथ जान से मारने की धमकी देकर दुष्कर्म किया। इसमें उसकी बहन कांता ने भी अपने भाई का सहयोग किया। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक शिकायतकर्ता ने वारदात आठ माह पहले बताई। इसके बाद पुलिस ने बिना किसी जांच पड़ताल के आरोप पत्र दाखिल कर दिया। यहां तक लड़की का मेडिकल भी नहीं कराया। साथ ही मजिस्ट्रेट को दिए बयान में कांता का नाम नहीं आया। पुलिस द्वारा आरोप पत्र दाखिल करने के बाद दोनों पक्षों में बहस हुई।
पहली एफआईआर में मिल चुकी क्लीनचिट, जज को नहीं बताया
वकील ने आरोप पत्र पर बहस के दौरान अदालत को बताया कि लड़की ने पहले भी आरोपी युवक स्टालिन के खिलाफ 2016 में केस दर्ज कराया था, लेकिन जज के सामने सीआरपीसी की धारा 164 के बयानों में साफ कहा कि वह अपनी मर्जी से स्टालिन के साथ गई थी। न केवल पढ़ी-लिखी है, बल्कि बालिग भी है। पिता की आपत्ति पर लड़की के उसी केस में दूसरी बार बयान दर्ज करवाए गए, जिसमें पहले की तरह बयानों को दोहराया गया। एसपी ने केस आईजी के पास भेज दिया गया। इसके बाद पुलिस ने एफआईआर को खारिज कर दिया। पूरा ब्योरा शिकायतकर्ता ने 2017 में दुष्कर्म के मामले में मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज कराते समय जज को नहीं बताया। दूसरा, शिकायत करते समय यह नहीं बताया कि वारदात किस माह व साल हुई।
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केस चलाने लायक नहीं आरोप, खारिज
अदालत ने आरोप पत्र पर ही बहस के दौरान लड़की के बयानों को केस चलाने लायक नहीं समझा। इसके चलते गुरुवार को स्टालिन व उसकी बहन कांता को बरी कर दिया।
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सोनीपत डीसी ऑफिस का स्टांप ऑडिटर और जेबीटी टीचर बहन को क्लीन चिट
- एडीजे आरपी गोयल की अदालत ने नहीं माने आरोप केस चलाने योग्य
- आठ माह बाद करवाई थी रिपोर्ट दर्ज, पुलिस ने नहीं करवाया मेडिकल
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
दुष्कर्म के मामले में एडीजे राजेंद्र पाल की अदालत ने सोनीपत डीसी आफिस के स्टांप ऑडिटर स्टालिन व उसकी बहन कांता को क्लीनचिट दे दी। कांता मोखरा गांव में जेबीटी टीचर है। आरोप खारिज होने के बाद बहन-भाई ने कहा कि उनके ऊपर लगा बदनामी का दाग हट गया है।
जिला अदालत के वरिष्ठ वकील जेएस गखड़ ने बताया अगस्त 2017 में शहर की एक युवती ने पुरानी सब्जी मंडी थाने में शिकायत दी कि वह मेडिकल मोड़ पर थी। उसे मेडिकल मोड़ से तेज कालोनी में ले जाया गया, जहां स्टालिन ने उसके साथ जान से मारने की धमकी देकर दुष्कर्म किया। इसमें उसकी बहन कांता ने भी अपने भाई का सहयोग किया। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक शिकायतकर्ता ने वारदात आठ माह पहले बताई। इसके बाद पुलिस ने बिना किसी जांच पड़ताल के आरोप पत्र दाखिल कर दिया। यहां तक लड़की का मेडिकल भी नहीं कराया। साथ ही मजिस्ट्रेट को दिए बयान में कांता का नाम नहीं आया। पुलिस द्वारा आरोप पत्र दाखिल करने के बाद दोनों पक्षों में बहस हुई।
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पहली एफआईआर में मिल चुकी क्लीनचिट, जज को नहीं बताया
वकील ने आरोप पत्र पर बहस के दौरान अदालत को बताया कि लड़की ने पहले भी आरोपी युवक स्टालिन के खिलाफ 2016 में केस दर्ज कराया था, लेकिन जज के सामने सीआरपीसी की धारा 164 के बयानों में साफ कहा कि वह अपनी मर्जी से स्टालिन के साथ गई थी। न केवल पढ़ी-लिखी है, बल्कि बालिग भी है। पिता की आपत्ति पर लड़की के उसी केस में दूसरी बार बयान दर्ज करवाए गए, जिसमें पहले की तरह बयानों को दोहराया गया। एसपी ने केस आईजी के पास भेज दिया गया। इसके बाद पुलिस ने एफआईआर को खारिज कर दिया। पूरा ब्योरा शिकायतकर्ता ने 2017 में दुष्कर्म के मामले में मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज कराते समय जज को नहीं बताया। दूसरा, शिकायत करते समय यह नहीं बताया कि वारदात किस माह व साल हुई।
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केस चलाने लायक नहीं आरोप, खारिज
अदालत ने आरोप पत्र पर ही बहस के दौरान लड़की के बयानों को केस चलाने लायक नहीं समझा। इसके चलते गुरुवार को स्टालिन व उसकी बहन कांता को बरी कर दिया।