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पीजीआई के दो आटो क्लेव सिस्टम खराब
Updated Sun, 20 Aug 2017 02:59 AM IST
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पीजीआई के दो आटो क्लेव सिस्टम खराब
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के आपातकालीन विभाग के मुख्य ऑपरेशन थियेटर के बाद बाद माइनर आपरेशन थियेटर का भी आटो क्लेव सिस्टम खराब हो गया है। अब यह प्रक्रिया वार्ड दो स्थित लेबर रूम के आटो क्लेव में की जा रही है। इसके चलते पूरे आपात विभाग में अव्यवस्था का माहौल हो गया है, वहीं वर्क लोड बढ़ने से वार्ड दो का आटो क्लेव पर भी दबाव बना हुआ है।
सूत्रों के अनुसार आपातकालीन विभाग का आटो क्लेव काफी समय से खराब है। इसके चलते सारा वर्क लोड विभाग के ही माइनर ओटी पर आ गया था। जब कर्मचारियों में खींचतान हुई तो मुख्य ओटी का स्टाफ आटो क्लेव करने के लिए माइनर ओटी आने लगा। इससे पहले की मैन ओटी का आटो क्लेव सही होता अब माइनर ओटी का भी आटो क्लेव खराब हो गया। जबकि यहां प्रतिदिन 60 से 70 मरीजों को छोटा बड़ा ऑपरेशन किया जाता है। एक्सपर्ट की मानें तो ऑपरेशन थियेटर में आटो क्लेव इसलिए किया जाता है कि ताकी कहीं से भी संक्रमण न आए। जबकि पीजीआई में ऑपरेशन का सामान आटो क्लेव होने के लिए दूसरे स्थानों पर मरीजों के बीच में से जाता है। ऐसी स्थिति में मरीजों के ऑपरेशन में प्रयोग होने वाले सामान में संक्रमण होने का खतरा बना रहता है।
बोले अधिकारी
वर्क लोड के चलते मशीनरी खराब हो जाती है। किसी मरीज का काम नहीं रुक रहा है। जो खराबी हुई है उसे सही कराया जाएगा। अधिकांश सामान सीएसडी से आटो क्लेव होकर आता है। मरीज के लिए घबराने की कोई बात नहीं है, उनके स्वास्थ्य के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाएगी।
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- डॉ. प्रशांत कुमार, प्रोफेसर इंचार्ज, पीआर विभाग, हेल्थ विवि
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अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के आपातकालीन विभाग के मुख्य ऑपरेशन थियेटर के बाद बाद माइनर आपरेशन थियेटर का भी आटो क्लेव सिस्टम खराब हो गया है। अब यह प्रक्रिया वार्ड दो स्थित लेबर रूम के आटो क्लेव में की जा रही है। इसके चलते पूरे आपात विभाग में अव्यवस्था का माहौल हो गया है, वहीं वर्क लोड बढ़ने से वार्ड दो का आटो क्लेव पर भी दबाव बना हुआ है।
सूत्रों के अनुसार आपातकालीन विभाग का आटो क्लेव काफी समय से खराब है। इसके चलते सारा वर्क लोड विभाग के ही माइनर ओटी पर आ गया था। जब कर्मचारियों में खींचतान हुई तो मुख्य ओटी का स्टाफ आटो क्लेव करने के लिए माइनर ओटी आने लगा। इससे पहले की मैन ओटी का आटो क्लेव सही होता अब माइनर ओटी का भी आटो क्लेव खराब हो गया। जबकि यहां प्रतिदिन 60 से 70 मरीजों को छोटा बड़ा ऑपरेशन किया जाता है। एक्सपर्ट की मानें तो ऑपरेशन थियेटर में आटो क्लेव इसलिए किया जाता है कि ताकी कहीं से भी संक्रमण न आए। जबकि पीजीआई में ऑपरेशन का सामान आटो क्लेव होने के लिए दूसरे स्थानों पर मरीजों के बीच में से जाता है। ऐसी स्थिति में मरीजों के ऑपरेशन में प्रयोग होने वाले सामान में संक्रमण होने का खतरा बना रहता है।
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बोले अधिकारी
वर्क लोड के चलते मशीनरी खराब हो जाती है। किसी मरीज का काम नहीं रुक रहा है। जो खराबी हुई है उसे सही कराया जाएगा। अधिकांश सामान सीएसडी से आटो क्लेव होकर आता है। मरीज के लिए घबराने की कोई बात नहीं है, उनके स्वास्थ्य के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाएगी।
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- डॉ. प्रशांत कुमार, प्रोफेसर इंचार्ज, पीआर विभाग, हेल्थ विवि