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400 ऑक्सीजन सिलिंडर की जरूरत, मिल रहे 200 भी नहीं
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रोहतक। कोरोना संक्रमणकाल में सभी की निगाहें पीजीआईएमएस पर टिकी हैं और संस्थान की निगाहें जिला प्रशासन से उपलब्ध कराए जाने वाले सिलिंडर वाले ऑक्सीजन पर। स्थिति यह है कि संस्थान की वर्तमान में 400 सिलिंडर ऑक्सीजन की जरूरत प्रतिदिन है, जबकि मिल 200 सिलिंडर से भी कम रहे हैं। ऐसी स्थिति में पीजीआईएमएस का बेड बढ़ाना तो दूर, जो बेड वर्तमान में हैं, उन पर भी मरीजों को दाखिल करना मुश्किल हो गया है।
पीजीआईएमएस कोरोना मरीजों के अलावा नॉन कोरोना मरीजों का उपचार कर रहा है। संस्थान पर दबाव है कि वह 1100 के करीब बेड कोरोना मरीजों के लिए आरक्षित करे, जबकि संस्थान अभी तक 433 बेड ही कोरोना मरीजों को दे पाया है। इनमें से 334 बेड पर ही मरीज उपचाराधीन हैं। रिकॉर्ड में ये बेड खाली हैं और बाहर मरीज बेड मिलने के इंतजार में ठोकरें खा रहे हैं। मरीजों का आरोप है कि पीजीआईएमएस में भर्ती होने के लिए उन्हें कौन सी प्रक्रिया अपनानी होगी, पता नहीं है। क्योंकि जब संस्थान में जाओ तो घर भेज देते हैं, बेड उपलब्ध न होने का हवाला देते हुए मरीज को होम आइसोलेशन की सलाह दी जाती है।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पुष्पा दहिया से सीधी बातचीत
सवाल : पीजीआईएमएस में कोरोना मरीजों के लिए ऑक्सीजन व बेड की क्या स्थिति है।
जवाब : पीजीआईएमएस में तीन लिक्विड ऑक्सीजन गैस के टैंक हैं और एक हजार से अधिक बड़े सिलिंडर हैं। लिक्विड ऑक्सीजन के लिए पाइप लाइन बिछी है और यह गैस वहीं तक जा सकती है। यह पर्याप्त है, लेकिन सिलिंडर वाले ऑक्सीजन में हमें पर्याप्त गैस नहीं मिल पा रही है, इसलिए समस्या आ रही है। अभी 433 बेड हैं, लेकिन पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं है।
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सवाल : सिलिंडर ऑक्सीजन कितनी मिल रही है और जरूरत कितनी है
जवाब : हमें वर्तमान में कम से कम 400 बाक्स प्रतिदिन चाहिए और मिल रहे 150 के आसपास। ऐसे में हम मरीजों का उपचार कैसे करें। एक मरीज को 24 घंटे में एक बड़े ऑक्सीजन सिलिंडर की जरूरत होती है।
सवाल : बेड की संख्या क्यों नहीं बढ़ाई जा रही है
जवाब : खाली बेड बढ़ाने से क्या होगा, जब ऑक्सीजन ही नहीं होगी। लिक्विड ऑक्सीजन वहीं तक जाएगी, जहां तक पाइपलाइन बिछी है। आपात स्थिति में जगह-जगह बेड लगा दिए हैं और वहां ऑक्सीजन सिलिंडर चाहिए, जबकि ऑक्सीजन सिलिंडर मिल नहीं रहे हैं।
सवाल : ऑक्सीजन सिलिंडर को लेकर इतनी मारामारी क्यों है।
जवाब : पीजीआईएमएस में कोरोना मरीजों के अलावा नॉन कोरोना मरीज और वह मरीज भी हैं, जो कोरोना से ठीक हो चुके हैं। इन सभी मरीजों को हम कहां से ऑक्सीजन दें। कोरोना के अलावा भी हमारे पास मरीज हैं, उन्हें भी ऑक्सीजन की जरूरत है। यदि हमें पर्याप्त सिलिंडर वाले ऑक्सीजन की आपूर्ति होती है तो हम काफी संख्या में मरीजों को स्वास्थ्य सुविधा दे सकते हैं।
सवाल : जिला प्रशासन का दावा है कि ऑक्सीजन की कमी नहीं होने दे रहे हैं
जवाब : हम किसी को मेडिकल की पढ़ाई तो नहीं करा सकते। इलाज करना हमारा कार्य है और व्यवस्था करना प्रशासन का। हम अपना कार्य करने को तैयार हैं, लेकिन हमें जरूरी चीजें तो मिलें। पहले हमारे डॉक्टर बाहर भेज दिए, अब ऑक्सीजन नहीं मिल रही, ऐसे कैसे काम चलेगा। हमारे पास जिले के अलावा प्रदेशभर से और दिल्ली तक के मरीज हैं। हमें जितनी जरूरत है उतनी तो डिमांड करेंगे ही।
किडनी के साथ कोरोना रोगी को नहीं मिला बेड, निजी अस्पताल में कराना पड़ा भर्ती
फोटो सहित एसएनजे एक
एकता कॉलोनी निवासी राहुल शर्मा ने बताया कि वह अपनी बुजुर्ग मां को लेकर पीजीआईएमएस गए थे, लेकिन ऑक्सीजन बेड नहीं मिला। मां कोरोना संक्रमित होने के साथ किडनी की भी रोगी है। डॉक्टरों ने कहा कि घर पर ले जाओ और ध्यान रखो। संस्थान किडनी जैसे गंभीर कोरोना रोगी को दाखिल नहीं कर रहा तो किसका उपचार कर रहा है। मरीज को मजबूरी में निजी अस्पताल में दाखिल कर उपचार कराया गया और अब डायलिसिस पर चल रही है, जबकि यह सुविधा पीजीआईएमएस में उपलब्ध है।
केस दो
ऑक्सीजन लेवल 80 था, फिर भी मरीज को नहीं किया भर्ती
गोहाना अड्डा निवासी सन्नी ने बताया कि वह अपने चाचा को लेकर पीजीआईएमएस में गए थे। चाचा का ऑक्सीजन लेवल 80 था और हालत गंभीर थी। इसके बावजूद मरीज को दाखिल नहीं किया गया। बताया गया कि जगह ही नहीं है। फिर मरीज को निजी अस्पताल में दाखिल करवाना पड़ा। चक्कर काटने के बाद भी समझ नहीं आया कि मरीज को पीजीआईएमएस ऑक्सीजन बेड किन परिस्थितियों में देता है।
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पीजीआईएमएस कोरोना मरीजों के अलावा नॉन कोरोना मरीजों का उपचार कर रहा है। संस्थान पर दबाव है कि वह 1100 के करीब बेड कोरोना मरीजों के लिए आरक्षित करे, जबकि संस्थान अभी तक 433 बेड ही कोरोना मरीजों को दे पाया है। इनमें से 334 बेड पर ही मरीज उपचाराधीन हैं। रिकॉर्ड में ये बेड खाली हैं और बाहर मरीज बेड मिलने के इंतजार में ठोकरें खा रहे हैं। मरीजों का आरोप है कि पीजीआईएमएस में भर्ती होने के लिए उन्हें कौन सी प्रक्रिया अपनानी होगी, पता नहीं है। क्योंकि जब संस्थान में जाओ तो घर भेज देते हैं, बेड उपलब्ध न होने का हवाला देते हुए मरीज को होम आइसोलेशन की सलाह दी जाती है।
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चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पुष्पा दहिया से सीधी बातचीत
सवाल : पीजीआईएमएस में कोरोना मरीजों के लिए ऑक्सीजन व बेड की क्या स्थिति है।
जवाब : पीजीआईएमएस में तीन लिक्विड ऑक्सीजन गैस के टैंक हैं और एक हजार से अधिक बड़े सिलिंडर हैं। लिक्विड ऑक्सीजन के लिए पाइप लाइन बिछी है और यह गैस वहीं तक जा सकती है। यह पर्याप्त है, लेकिन सिलिंडर वाले ऑक्सीजन में हमें पर्याप्त गैस नहीं मिल पा रही है, इसलिए समस्या आ रही है। अभी 433 बेड हैं, लेकिन पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं है।
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सवाल : सिलिंडर ऑक्सीजन कितनी मिल रही है और जरूरत कितनी है
जवाब : हमें वर्तमान में कम से कम 400 बाक्स प्रतिदिन चाहिए और मिल रहे 150 के आसपास। ऐसे में हम मरीजों का उपचार कैसे करें। एक मरीज को 24 घंटे में एक बड़े ऑक्सीजन सिलिंडर की जरूरत होती है।
सवाल : बेड की संख्या क्यों नहीं बढ़ाई जा रही है
जवाब : खाली बेड बढ़ाने से क्या होगा, जब ऑक्सीजन ही नहीं होगी। लिक्विड ऑक्सीजन वहीं तक जाएगी, जहां तक पाइपलाइन बिछी है। आपात स्थिति में जगह-जगह बेड लगा दिए हैं और वहां ऑक्सीजन सिलिंडर चाहिए, जबकि ऑक्सीजन सिलिंडर मिल नहीं रहे हैं।
सवाल : ऑक्सीजन सिलिंडर को लेकर इतनी मारामारी क्यों है।
जवाब : पीजीआईएमएस में कोरोना मरीजों के अलावा नॉन कोरोना मरीज और वह मरीज भी हैं, जो कोरोना से ठीक हो चुके हैं। इन सभी मरीजों को हम कहां से ऑक्सीजन दें। कोरोना के अलावा भी हमारे पास मरीज हैं, उन्हें भी ऑक्सीजन की जरूरत है। यदि हमें पर्याप्त सिलिंडर वाले ऑक्सीजन की आपूर्ति होती है तो हम काफी संख्या में मरीजों को स्वास्थ्य सुविधा दे सकते हैं।
सवाल : जिला प्रशासन का दावा है कि ऑक्सीजन की कमी नहीं होने दे रहे हैं
जवाब : हम किसी को मेडिकल की पढ़ाई तो नहीं करा सकते। इलाज करना हमारा कार्य है और व्यवस्था करना प्रशासन का। हम अपना कार्य करने को तैयार हैं, लेकिन हमें जरूरी चीजें तो मिलें। पहले हमारे डॉक्टर बाहर भेज दिए, अब ऑक्सीजन नहीं मिल रही, ऐसे कैसे काम चलेगा। हमारे पास जिले के अलावा प्रदेशभर से और दिल्ली तक के मरीज हैं। हमें जितनी जरूरत है उतनी तो डिमांड करेंगे ही।
किडनी के साथ कोरोना रोगी को नहीं मिला बेड, निजी अस्पताल में कराना पड़ा भर्ती
फोटो सहित एसएनजे एक
एकता कॉलोनी निवासी राहुल शर्मा ने बताया कि वह अपनी बुजुर्ग मां को लेकर पीजीआईएमएस गए थे, लेकिन ऑक्सीजन बेड नहीं मिला। मां कोरोना संक्रमित होने के साथ किडनी की भी रोगी है। डॉक्टरों ने कहा कि घर पर ले जाओ और ध्यान रखो। संस्थान किडनी जैसे गंभीर कोरोना रोगी को दाखिल नहीं कर रहा तो किसका उपचार कर रहा है। मरीज को मजबूरी में निजी अस्पताल में दाखिल कर उपचार कराया गया और अब डायलिसिस पर चल रही है, जबकि यह सुविधा पीजीआईएमएस में उपलब्ध है।
केस दो
ऑक्सीजन लेवल 80 था, फिर भी मरीज को नहीं किया भर्ती
गोहाना अड्डा निवासी सन्नी ने बताया कि वह अपने चाचा को लेकर पीजीआईएमएस में गए थे। चाचा का ऑक्सीजन लेवल 80 था और हालत गंभीर थी। इसके बावजूद मरीज को दाखिल नहीं किया गया। बताया गया कि जगह ही नहीं है। फिर मरीज को निजी अस्पताल में दाखिल करवाना पड़ा। चक्कर काटने के बाद भी समझ नहीं आया कि मरीज को पीजीआईएमएस ऑक्सीजन बेड किन परिस्थितियों में देता है।