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Rohtak News: जूडो के दांव-पेंच सीख आत्मरक्षा में भी सक्षम बन रहीं 40 बेटियां
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फोटो - खानपुर कलां नर्सरी में लड़कियों को जुडो का प्रशिक्षण देती हुई कोच हार्दिक। स्रोत - प्रवक्
अनूप जाटयाण
गोहाना। बेटियां अब खेल के मैदान में सिर्फ पदक जीतने के लिए नहीं उतर रहीं, बल्कि जूडो के जरिए आत्मरक्षा के गुर भी सीख रही हैं। खानपुर कलां स्थित जूडो नर्सरी में खानपुर कलां, गोहाना, कैलाना खास और शामड़ी की 40 बेटियां प्रशिक्षण ले रही हैं। जूडो के दांव-पेंच सीखने के साथ उनमें आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास भी बढ़ रहा है। नर्सरी की सात खिलाड़ी राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुकी हैं।
ग्रामीण क्षेत्र में खेल प्रतिभाओं को मंच देने के लिए सरकार की ओर से अलग-अलग खेलों की नर्सरियां संचालित की जा रही हैं। इसका असर अब दिखाई देने लगा है और अभिभावक भी बेटियों को खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। कबड्डी, खो-खो और कुश्ती के साथ बेटियां जूडो को भी पसंद कर रही हैं। शारीरिक मजबूती के साथ मानसिक दृढ़ता और आत्मरक्षा का प्रशिक्षण मिलने से इस खेल के प्रति उनका रुझान बढ़ा है।
तीन गांवों की बेटियां रोज कर रहीं अभ्यास
नर्सरी में खिलाड़ी नियमित रूप से अपनी तकनीक और फिटनेस पर काम कर रही हैं। साक्षी, मीनू, निशु, ईशु, शिवानी और दीपाली समेत सात खिलाड़ी राज्य स्तर पर जूडो में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुकी हैं। खिलाड़ियों का कहना है कि प्रशिक्षण से उन्हें खेल में आगे बढ़ने के साथ अपनी सुरक्षा को लेकर भी भरोसा मिला है।
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पुराने मैट पर अभ्यास की मजबूरी
नर्सरी में खिलाड़ियों के सामने अभ्यास के लिए उपलब्ध मैट की समस्या है। मौजूदा मैट काफी पुराना हो चुका है, जिससे अभ्यास के दौरान चोट लगने का खतरा रहता है। खिलाड़ियों के अनुसार इससे वे पूरी क्षमता के साथ अभ्यास नहीं कर पातीं। हालांकि खेल का अन्य सामान पंचायत की ओर से उपलब्ध कराया जा रहा है। खिलाड़ियों ने सरकार से नया मैट उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि वे सुरक्षित माहौल में अभ्यास कर जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए बेहतर तैयारी कर सकें।
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हार्दिक, जूडो प्रशिक्षक, खानपुर कलां नर्सरी ने कहा कि नर्सरी में 40 लड़कियां प्रशिक्षण ले रही हैं। कई खिलाड़ी राज्य स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखा चुकी हैं। प्रयास है कि क्षेत्र की अधिक से अधिक बेटियां जूडो से जुड़ें और खेल के साथ आत्मरक्षा में भी सक्षम बनें।
हार्दिक, जूडो प्रशिक्षक, खानपुर कलां नर्सरी
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गोहाना। बेटियां अब खेल के मैदान में सिर्फ पदक जीतने के लिए नहीं उतर रहीं, बल्कि जूडो के जरिए आत्मरक्षा के गुर भी सीख रही हैं। खानपुर कलां स्थित जूडो नर्सरी में खानपुर कलां, गोहाना, कैलाना खास और शामड़ी की 40 बेटियां प्रशिक्षण ले रही हैं। जूडो के दांव-पेंच सीखने के साथ उनमें आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास भी बढ़ रहा है। नर्सरी की सात खिलाड़ी राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुकी हैं।
ग्रामीण क्षेत्र में खेल प्रतिभाओं को मंच देने के लिए सरकार की ओर से अलग-अलग खेलों की नर्सरियां संचालित की जा रही हैं। इसका असर अब दिखाई देने लगा है और अभिभावक भी बेटियों को खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। कबड्डी, खो-खो और कुश्ती के साथ बेटियां जूडो को भी पसंद कर रही हैं। शारीरिक मजबूती के साथ मानसिक दृढ़ता और आत्मरक्षा का प्रशिक्षण मिलने से इस खेल के प्रति उनका रुझान बढ़ा है।
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तीन गांवों की बेटियां रोज कर रहीं अभ्यास
नर्सरी में खिलाड़ी नियमित रूप से अपनी तकनीक और फिटनेस पर काम कर रही हैं। साक्षी, मीनू, निशु, ईशु, शिवानी और दीपाली समेत सात खिलाड़ी राज्य स्तर पर जूडो में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुकी हैं। खिलाड़ियों का कहना है कि प्रशिक्षण से उन्हें खेल में आगे बढ़ने के साथ अपनी सुरक्षा को लेकर भी भरोसा मिला है।
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पुराने मैट पर अभ्यास की मजबूरी
नर्सरी में खिलाड़ियों के सामने अभ्यास के लिए उपलब्ध मैट की समस्या है। मौजूदा मैट काफी पुराना हो चुका है, जिससे अभ्यास के दौरान चोट लगने का खतरा रहता है। खिलाड़ियों के अनुसार इससे वे पूरी क्षमता के साथ अभ्यास नहीं कर पातीं। हालांकि खेल का अन्य सामान पंचायत की ओर से उपलब्ध कराया जा रहा है। खिलाड़ियों ने सरकार से नया मैट उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि वे सुरक्षित माहौल में अभ्यास कर जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए बेहतर तैयारी कर सकें।
हार्दिक, जूडो प्रशिक्षक, खानपुर कलां नर्सरी ने कहा कि नर्सरी में 40 लड़कियां प्रशिक्षण ले रही हैं। कई खिलाड़ी राज्य स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखा चुकी हैं। प्रयास है कि क्षेत्र की अधिक से अधिक बेटियां जूडो से जुड़ें और खेल के साथ आत्मरक्षा में भी सक्षम बनें।
हार्दिक, जूडो प्रशिक्षक, खानपुर कलां नर्सरी