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38 और सूअरों की मौत, नगर निगम ने दफन किया
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बाड़े में बचा एक सूअर। अमर उजाला
रोहतक। अफ्रीकन स्वाइन फ्लू का कहर एक माह से सूअरों पर जारी है। मंगलवार को भी नगर निगम रोहतक की टीम ने 38 और सूअरों को दफन किया है। वहीं शाम तक भी मृत सूअरों का उठान करवाने के लिए निगम के फोन बजते रहे। जिले में एक माह से सूअरों की मौत हो रही है। स्थिति यह है कि शिकायत के बावजूद पशु चिकित्सकों की मदद सूअरपालकों को नहीं मिल पा रही है।
सूअरों में संक्रमण इनके पालकों की मेहनत पर पानी फेर रहा है। शहरों के साथ-साथ गांवों में भी इस वायरस ने सूअरों को अपनी चपेट में लिया है। सूअर पालकों की शिकायत है कि पशु पालन विभाग को बार-बार शिकायत करने के बाद भी उपचार के लिए कोई नहीं आता। अब पीड़ित सूअर पालक सरकार से नुकसान के भरपाई की मांग कर रहे हैं। सूअर पालकों का कहना है कि जिन बाड़ों में एक माह पहले दर्जनों सूअर थे वह अब लगभग खाली हो चुके हैं।
पशुपालन विभाग के अधिकारियों के अनुसार कलानौर को अफ्रीकन स्वाइन फ्लू का अधिकेंद्र चिह्नित किया गया है। इसके चारों तरफ एक किलोमीटर के क्षेत्र को संक्रमित माना गया है। दस किलोमीटर के क्षेत्र को सर्विलांस जोन घोषित किया गया है। महम, कलानौर व रोहतक में स्थानीय एसडीओ की अध्यक्षता में टीमें बनाकर निरीक्षण किया जा रहा है। निगम की टीम ने रोजाना की तरह मंगलवार को 38 मृत सूअरों को दफन किया। उधर, रोजाना जेएलएन व बीएसबी नहरों में भी मृत सूअर पाए जा रहे हैं। श्याम कॉलोनी निवासी ममता, सतवंती, उर्मिला, पूजा, ज्योति, दर्शना, मीना, सीमा, प्रवेश व रोशनी ने बताया कि उनके क्षेत्र में कई सूअर मरे पड़े हैं। शिकायत के बावजूद इनका उठान नहीं करवाया जा रहा है। इससे लोगों का जीना मुहाल हो गया है।
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नहीं आया कोई चिकित्सक
करीब 10 साल से सूअर पालन कर रहा हूं। एक महीने पहले मेरे पास 40 देसी सूअर थे। शुरुआत में कुछ सूअर अचानक बीमार हुए तो मैं स्थानीय पशु चिकित्सक से परामर्श लेने के लिए गया। वहां पशु चिकित्सक ने कुछ दवाइयां देकर भेज दिया। करीब एक महीने से सूअरों के मरने का सिलसिला जारी है। हाल में मात्र एक 6 माह का सूअर का बच्चा जीवित है। बार-बार शिकायत करने के बाद भी कोई जांच करने के लिए नहीं आया। गांव के अन्य सूअर पालकों को भी नुकसान है।
- अमित, मायना निवासी, सूअर पालक
वर्षों से सूअर पालन कर गुजर-बसर कर रहे हैं। मैं और मेरे भतीजे के पास 52 सूअर थे। करीब 20 दिन पहले एक दम से तीन सूअरों की मौत हो गई थी। शहर के पशु चिकित्सकों को इस बारे बताया तो कोई ध्यान नहीं दिया गया। हाल में सभी सूअर बीमार होकर मर चुके हैं। इस दौरान लाखों रुपये का नुकसान झेलना पड़ा। सरकार से गुहार है मुआवजा देकर हमारे जख्मों पर मरहम लगाए।
- तरुण, पाड़ा मोहल्ला निवासी, सूअर पालक
यहां मिले मृत सूअर
जींद पुल के नीचे - 4
आईडीसी चौक - 5
जींद बाईपास - 3
श्याम कॉलोनी - 11
शास्त्री नगर - 7
सूर्य नगर - 5
गौड़ स्कूल के पास - 3
कुल - 38
वर्जन -
नगर निगम टीम रोजाना मृत सूअरों को दफन कर रही है। अब तक 200 से ज्यादा मृत सूअरों को दफन किया जा चुका है। शहर के बाहरी इलाकों में रोजाना सड़कों के किनारे मृत सूअर पड़े मिलते हैं। मंगलवार को टीम ने 38 मृत सूअरों को दफन किया है।
- सुंदर सिंह, सीएसआई, नगर निगम
वर्जन -
अफ्रीकन स्वाइन फ्लू के संक्रमण के दौरान टास्क फोर्स का गठन किया है। इसके तहत तीन टीमें बनाई गई हैं। महम, कलानौर, रोहतक एसडीओ टीमों की अध्यक्षता करेंगे। कलानौर को स्वाइन फ्लू का अधिकेंद्र बनाया गया है। कलानौर की चारों तरफ एक किलोमीटर के क्षेत्र को संक्रमित घोषित किया है व 10 किलोमीटर के क्षेत्र को सर्विलांस जोन घोषित किया गया है।
- डॉ. सूर्या खटकड़, उप निदेशक, पशुपालन एवं डेयरिंग विभाग
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सूअरों में संक्रमण इनके पालकों की मेहनत पर पानी फेर रहा है। शहरों के साथ-साथ गांवों में भी इस वायरस ने सूअरों को अपनी चपेट में लिया है। सूअर पालकों की शिकायत है कि पशु पालन विभाग को बार-बार शिकायत करने के बाद भी उपचार के लिए कोई नहीं आता। अब पीड़ित सूअर पालक सरकार से नुकसान के भरपाई की मांग कर रहे हैं। सूअर पालकों का कहना है कि जिन बाड़ों में एक माह पहले दर्जनों सूअर थे वह अब लगभग खाली हो चुके हैं।
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पशुपालन विभाग के अधिकारियों के अनुसार कलानौर को अफ्रीकन स्वाइन फ्लू का अधिकेंद्र चिह्नित किया गया है। इसके चारों तरफ एक किलोमीटर के क्षेत्र को संक्रमित माना गया है। दस किलोमीटर के क्षेत्र को सर्विलांस जोन घोषित किया गया है। महम, कलानौर व रोहतक में स्थानीय एसडीओ की अध्यक्षता में टीमें बनाकर निरीक्षण किया जा रहा है। निगम की टीम ने रोजाना की तरह मंगलवार को 38 मृत सूअरों को दफन किया। उधर, रोजाना जेएलएन व बीएसबी नहरों में भी मृत सूअर पाए जा रहे हैं। श्याम कॉलोनी निवासी ममता, सतवंती, उर्मिला, पूजा, ज्योति, दर्शना, मीना, सीमा, प्रवेश व रोशनी ने बताया कि उनके क्षेत्र में कई सूअर मरे पड़े हैं। शिकायत के बावजूद इनका उठान नहीं करवाया जा रहा है। इससे लोगों का जीना मुहाल हो गया है।
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नहीं आया कोई चिकित्सक
करीब 10 साल से सूअर पालन कर रहा हूं। एक महीने पहले मेरे पास 40 देसी सूअर थे। शुरुआत में कुछ सूअर अचानक बीमार हुए तो मैं स्थानीय पशु चिकित्सक से परामर्श लेने के लिए गया। वहां पशु चिकित्सक ने कुछ दवाइयां देकर भेज दिया। करीब एक महीने से सूअरों के मरने का सिलसिला जारी है। हाल में मात्र एक 6 माह का सूअर का बच्चा जीवित है। बार-बार शिकायत करने के बाद भी कोई जांच करने के लिए नहीं आया। गांव के अन्य सूअर पालकों को भी नुकसान है।
- अमित, मायना निवासी, सूअर पालक
वर्षों से सूअर पालन कर गुजर-बसर कर रहे हैं। मैं और मेरे भतीजे के पास 52 सूअर थे। करीब 20 दिन पहले एक दम से तीन सूअरों की मौत हो गई थी। शहर के पशु चिकित्सकों को इस बारे बताया तो कोई ध्यान नहीं दिया गया। हाल में सभी सूअर बीमार होकर मर चुके हैं। इस दौरान लाखों रुपये का नुकसान झेलना पड़ा। सरकार से गुहार है मुआवजा देकर हमारे जख्मों पर मरहम लगाए।
- तरुण, पाड़ा मोहल्ला निवासी, सूअर पालक
यहां मिले मृत सूअर
जींद पुल के नीचे - 4
आईडीसी चौक - 5
जींद बाईपास - 3
श्याम कॉलोनी - 11
शास्त्री नगर - 7
सूर्य नगर - 5
गौड़ स्कूल के पास - 3
कुल - 38
वर्जन -
नगर निगम टीम रोजाना मृत सूअरों को दफन कर रही है। अब तक 200 से ज्यादा मृत सूअरों को दफन किया जा चुका है। शहर के बाहरी इलाकों में रोजाना सड़कों के किनारे मृत सूअर पड़े मिलते हैं। मंगलवार को टीम ने 38 मृत सूअरों को दफन किया है।
- सुंदर सिंह, सीएसआई, नगर निगम
वर्जन -
अफ्रीकन स्वाइन फ्लू के संक्रमण के दौरान टास्क फोर्स का गठन किया है। इसके तहत तीन टीमें बनाई गई हैं। महम, कलानौर, रोहतक एसडीओ टीमों की अध्यक्षता करेंगे। कलानौर को स्वाइन फ्लू का अधिकेंद्र बनाया गया है। कलानौर की चारों तरफ एक किलोमीटर के क्षेत्र को संक्रमित घोषित किया है व 10 किलोमीटर के क्षेत्र को सर्विलांस जोन घोषित किया गया है।
- डॉ. सूर्या खटकड़, उप निदेशक, पशुपालन एवं डेयरिंग विभाग