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केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह भाग 2
Updated Thu, 28 Jun 2018 02:44 AM IST
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फ्लैग : केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह पहुंचे अमर उजाला कार्यालय, रखी प्रदेश की सियासत पर बेबाक राय, बोले
हेडिंग : चपरासी भी सीएम कार्यालय लगाएगा तो कहां की डेमोक्रेसी, मुख्यमंत्री बना तो नेता लहर में नहीं बनेंगे, ट्रेनिंग देकर बनाए जाएंगे, शक्तियों का होगा विकेंद्रीयकरण
विजेंद्र कौशिक।
रोहतक। केंद्रीय इस्पात मंत्री बीरेंद्र सिंह डूमरखां का कहना है कि, मैं राजनीतिक आदमी हूं। 40 साल का प्रदेश की सियासत का अनुभव है। उसी के दम पर कहता हूं, प्रदेश के अंदर सामाजिक व आर्थिक बदलाव केवल राजनीति के दम पर आ सकता है।
बाबा रामदेव कुछ करोड़ लोगों को प्रभावित कर सकते हैं। अच्छा लिखने वाला समिति वर्ग और एक धार्मिक गुरु अपने अनुयायियों को प्रभावित कर सकता है, लेकिन सत्ता में रहकर व्यक्ति पूरे समाज में व्यवस्था परिवर्तन कर सकता है। इसलिए मुख्यमंत्री बनने की इच्छा पाले हुए हूं। कब पूरी हो जाए, क्या पता। आते ही सबसे पहले युवाओं को नेता बनने की ट्रेनिंग दिलवाऊंगा, क्योंकि वहीं नेता लोगों के दुख व दर्द, उनके अच्छे व बुरे को समझ सकता है, जो एक लंबी प्रक्रिया से गुजरा है। यह काम जिला स्तर पर मीडिया से जुडे लोगों से करवाऊंगा, जो किसी राजनीतिक दल से नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था से जुडे़ होते हैं। नेता फिर पता होगा कि उसे क्यों, किसके लिए चुना गया है। केंद्रीय मंत्री बुधवार को अमर उजाला कार्यालय में सीधे साक्षात्कार में सवालों का जवाब दे रहे थे।
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सवाल : राजनीति में लोग आडवानी को वेटिंग इन पीएम और आपको वेटिंग इन सीएम कहते हैं, ऐसा क्यों?
जवाब : मैं जहां जाता हूं, एक ही बात कहता हूं। किसान या समाजसेवी नहीं हूं। राजनीतिक सोच का आदमी हूं, उसकी ढंग से काम करता हूं और करता रहूंगा। जब राजनीतिक आदमी हूं तो सीएम बनने का सपना क्यों न देखूं। सीएम बनकर ही तो व्यवस्था परिवर्तन कर सकूंगा।
...
सवाल : सीएम बने तो आपका विजन क्या रहेगा।
जवाब : 70 साल में राजनीति में काफी गिरावट आई है। जब एक चपरासी तक सीएम कार्यालय से लगाया जाता है तो वह कहां की डेमोक्रेसी। सीएम बनते ही शक्तियों का विकेंद्रीयकरण करूंगा। हुड्डा से उनके हलके में लोगों ने पूछा कि आपने विकास कार्य नहीं करवाए। तब हुड्डा ने कहा था कि बीरेंद्र सिंह के पास तो खजाने की चाबी थे। उनको किसने रोका था। जब मैंने कहा था कि एक बार वे वित्त मंत्री बनें और मुझे मुख्यमंत्री बनाएं। फिर एक कदम भी बढ़ाकर दिखाएं। वे ऐसी व्यवस्था को बदलना चाहते हैं। साथ ही नेता लहर में पैदा नहीं होंगे, बल्कि प्रक्रिया के तहत बनाए जाएंगे।
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सवाल : प्रदेश की खेल नीति पर क्या कहना चाहेंगे।
जवाब : युवा अपनी मेहनत के दम पर जीतकर आते हैं। सरकार उनका सम्मान करती है, लेकिन यह कहां की नीति है कि बाहर से खिलाड़ी के पास जो पैसा आएगा, उनका सरकार कम कर देगी। अब बताओ, लड़की की शादी में कन्यादान आता है। अगर 2 लाख से ज्यादा आ जाए तो कोई यह कहेगा कि बाकी लोग कन्यादान मत दो। बहुत आ गया।
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सवाल : प्रदेश में 2019 का विधानसभा चुनाव कौन से मुद्दों पर लड़ा जाएगा।
जवाब : फिलहाल प्रदेश में अनिश्चित माहौल है। वोटर चुनाव से चार या छह माह पहले मन बनाता है कि उसे किसको वोट देनी है। अभी राजनीतिक दल अपने-अपने पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास कर रहे हैं। कोई यह न समझे कि चुनाव से ठीक पहले पब्लिक का मूड बदल देंगे। कोई बड़ी घटना हो जाए तो अलग बात है। अभी तय मुद्दों के बारे में कुछ कहना जल्दबाजी होगी।
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सवाल : प्रदेश में हुड्डा जनक्रांति यात्रा कर रहे हैं। इनेलो जेल भरो आंदोलन चला रही है, जबकि मुख्यमंत्री रोड शो से लोगों को जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं, कामयाबी किसको मिलेगी?
जवाब : राजनीति में दलों को इस तरह की कसरत करनी पड़ती है, लेकिन कामयाबी मिलना तय नहीं है। क्योंकि देश में लोग नायक के पीछे भागते हैं। पांच ऐसी घटनाएं गिनवा सकता हूं, जब विकास की बजाए लोगों ने भावनात्मक जुड़ाव के चलते सरकार गिराई व बनाई। मैं आपको बताता हूं, 1989 में मैंने लोकसभा चुनाव लड़ा। एक गांव में जनसभा के बाद सरपंच के घर चाय पी रहा था। दो महिलाएं खिड़क से बोली, बीरेंद्र सिंह कौन सा है। मैंने कहा मैं हूं। महिलाएं बोली, राजू (राजीव गांधी) ने म्हारे छोेरा तै नकली तोप दे दी। इबक तन्न वोट ना दें। बोफोर्स खरीद मामला चुनावी मुद्दा बन गया और मैं वह चुनाव हार गया।
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सवाल : राजनीति में आपकी कामयाबी का राज क्या है?
जवाब : सही कहूं, राजनीति में लोग जल्दी फिसल जाते हैं। मेरे सामने भी कई मौके आए, लेकिन उसी समय एक कदम पीछे होकर सोचता। मैं छोटूराम का नाती हूं। उनका नाम कैसे खराब कर सकता हूं। साथ ही अब तक वसूलों की राजनीति की है। जो सही है, उसे बोलने में हिचका नहीं हूं। चाहे घर हो या बाहर।
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सवाल : आप लंबे समय तक कांग्रेस में रहे, पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ काम किया। हुड्डा का कांग्रेस में भविष्य क्या है?
जवाब : मैं क्या बताऊं। यह कांग्रेस के राष्ट्रीय नेताओं को सोचना है। अगर कांग्रेस को लगता है कि हुड्डा में कुछ दाने बचे हैं और उन्हें यूज करना है तो भूमिका बनी रहेगी। अगर कांग्रेस के केंद्रीय नेता सोचते हैं कि कुछ नहीं बचा तो आप खुद समझ सकते हैं क्या होगा। क्योंकि कांग्रेस में पश्चिमी कल्चर यूज एंड थ्रो का रहा है।
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सवाल : जींद में आपने कहा था कि कांग्रेस में मुझसे पूछकर टिकट दी जाएंगी, इसका क्या मतलब है?
जवाब : मेरे कुछ साथ कांग्रेस में चले गए। साथ बैठकर आपस में बात कर रहे थे, तब मजाक में कहा था कि कांग्रेस में मुझसे पूछकर टिकट दी जाएंगी। सोनिया गांधी भी मानती हैं कि बीरेंद्र सिंह का पार्टी से जाना अच्छा नहीं रहा, लेकिन मेरा वापस कांग्रेस में जाना का न इरादा और न ही उम्र है।
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हेडिंग : चपरासी भी सीएम कार्यालय लगाएगा तो कहां की डेमोक्रेसी, मुख्यमंत्री बना तो नेता लहर में नहीं बनेंगे, ट्रेनिंग देकर बनाए जाएंगे, शक्तियों का होगा विकेंद्रीयकरण
विजेंद्र कौशिक।
रोहतक। केंद्रीय इस्पात मंत्री बीरेंद्र सिंह डूमरखां का कहना है कि, मैं राजनीतिक आदमी हूं। 40 साल का प्रदेश की सियासत का अनुभव है। उसी के दम पर कहता हूं, प्रदेश के अंदर सामाजिक व आर्थिक बदलाव केवल राजनीति के दम पर आ सकता है।
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बाबा रामदेव कुछ करोड़ लोगों को प्रभावित कर सकते हैं। अच्छा लिखने वाला समिति वर्ग और एक धार्मिक गुरु अपने अनुयायियों को प्रभावित कर सकता है, लेकिन सत्ता में रहकर व्यक्ति पूरे समाज में व्यवस्था परिवर्तन कर सकता है। इसलिए मुख्यमंत्री बनने की इच्छा पाले हुए हूं। कब पूरी हो जाए, क्या पता। आते ही सबसे पहले युवाओं को नेता बनने की ट्रेनिंग दिलवाऊंगा, क्योंकि वहीं नेता लोगों के दुख व दर्द, उनके अच्छे व बुरे को समझ सकता है, जो एक लंबी प्रक्रिया से गुजरा है। यह काम जिला स्तर पर मीडिया से जुडे लोगों से करवाऊंगा, जो किसी राजनीतिक दल से नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था से जुडे़ होते हैं। नेता फिर पता होगा कि उसे क्यों, किसके लिए चुना गया है। केंद्रीय मंत्री बुधवार को अमर उजाला कार्यालय में सीधे साक्षात्कार में सवालों का जवाब दे रहे थे।
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सवाल : राजनीति में लोग आडवानी को वेटिंग इन पीएम और आपको वेटिंग इन सीएम कहते हैं, ऐसा क्यों?
जवाब : मैं जहां जाता हूं, एक ही बात कहता हूं। किसान या समाजसेवी नहीं हूं। राजनीतिक सोच का आदमी हूं, उसकी ढंग से काम करता हूं और करता रहूंगा। जब राजनीतिक आदमी हूं तो सीएम बनने का सपना क्यों न देखूं। सीएम बनकर ही तो व्यवस्था परिवर्तन कर सकूंगा।
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सवाल : सीएम बने तो आपका विजन क्या रहेगा।
जवाब : 70 साल में राजनीति में काफी गिरावट आई है। जब एक चपरासी तक सीएम कार्यालय से लगाया जाता है तो वह कहां की डेमोक्रेसी। सीएम बनते ही शक्तियों का विकेंद्रीयकरण करूंगा। हुड्डा से उनके हलके में लोगों ने पूछा कि आपने विकास कार्य नहीं करवाए। तब हुड्डा ने कहा था कि बीरेंद्र सिंह के पास तो खजाने की चाबी थे। उनको किसने रोका था। जब मैंने कहा था कि एक बार वे वित्त मंत्री बनें और मुझे मुख्यमंत्री बनाएं। फिर एक कदम भी बढ़ाकर दिखाएं। वे ऐसी व्यवस्था को बदलना चाहते हैं। साथ ही नेता लहर में पैदा नहीं होंगे, बल्कि प्रक्रिया के तहत बनाए जाएंगे।
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सवाल : प्रदेश की खेल नीति पर क्या कहना चाहेंगे।
जवाब : युवा अपनी मेहनत के दम पर जीतकर आते हैं। सरकार उनका सम्मान करती है, लेकिन यह कहां की नीति है कि बाहर से खिलाड़ी के पास जो पैसा आएगा, उनका सरकार कम कर देगी। अब बताओ, लड़की की शादी में कन्यादान आता है। अगर 2 लाख से ज्यादा आ जाए तो कोई यह कहेगा कि बाकी लोग कन्यादान मत दो। बहुत आ गया।
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सवाल : प्रदेश में 2019 का विधानसभा चुनाव कौन से मुद्दों पर लड़ा जाएगा।
जवाब : फिलहाल प्रदेश में अनिश्चित माहौल है। वोटर चुनाव से चार या छह माह पहले मन बनाता है कि उसे किसको वोट देनी है। अभी राजनीतिक दल अपने-अपने पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास कर रहे हैं। कोई यह न समझे कि चुनाव से ठीक पहले पब्लिक का मूड बदल देंगे। कोई बड़ी घटना हो जाए तो अलग बात है। अभी तय मुद्दों के बारे में कुछ कहना जल्दबाजी होगी।
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सवाल : प्रदेश में हुड्डा जनक्रांति यात्रा कर रहे हैं। इनेलो जेल भरो आंदोलन चला रही है, जबकि मुख्यमंत्री रोड शो से लोगों को जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं, कामयाबी किसको मिलेगी?
जवाब : राजनीति में दलों को इस तरह की कसरत करनी पड़ती है, लेकिन कामयाबी मिलना तय नहीं है। क्योंकि देश में लोग नायक के पीछे भागते हैं। पांच ऐसी घटनाएं गिनवा सकता हूं, जब विकास की बजाए लोगों ने भावनात्मक जुड़ाव के चलते सरकार गिराई व बनाई। मैं आपको बताता हूं, 1989 में मैंने लोकसभा चुनाव लड़ा। एक गांव में जनसभा के बाद सरपंच के घर चाय पी रहा था। दो महिलाएं खिड़क से बोली, बीरेंद्र सिंह कौन सा है। मैंने कहा मैं हूं। महिलाएं बोली, राजू (राजीव गांधी) ने म्हारे छोेरा तै नकली तोप दे दी। इबक तन्न वोट ना दें। बोफोर्स खरीद मामला चुनावी मुद्दा बन गया और मैं वह चुनाव हार गया।
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सवाल : राजनीति में आपकी कामयाबी का राज क्या है?
जवाब : सही कहूं, राजनीति में लोग जल्दी फिसल जाते हैं। मेरे सामने भी कई मौके आए, लेकिन उसी समय एक कदम पीछे होकर सोचता। मैं छोटूराम का नाती हूं। उनका नाम कैसे खराब कर सकता हूं। साथ ही अब तक वसूलों की राजनीति की है। जो सही है, उसे बोलने में हिचका नहीं हूं। चाहे घर हो या बाहर।
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सवाल : आप लंबे समय तक कांग्रेस में रहे, पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ काम किया। हुड्डा का कांग्रेस में भविष्य क्या है?
जवाब : मैं क्या बताऊं। यह कांग्रेस के राष्ट्रीय नेताओं को सोचना है। अगर कांग्रेस को लगता है कि हुड्डा में कुछ दाने बचे हैं और उन्हें यूज करना है तो भूमिका बनी रहेगी। अगर कांग्रेस के केंद्रीय नेता सोचते हैं कि कुछ नहीं बचा तो आप खुद समझ सकते हैं क्या होगा। क्योंकि कांग्रेस में पश्चिमी कल्चर यूज एंड थ्रो का रहा है।
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सवाल : जींद में आपने कहा था कि कांग्रेस में मुझसे पूछकर टिकट दी जाएंगी, इसका क्या मतलब है?
जवाब : मेरे कुछ साथ कांग्रेस में चले गए। साथ बैठकर आपस में बात कर रहे थे, तब मजाक में कहा था कि कांग्रेस में मुझसे पूछकर टिकट दी जाएंगी। सोनिया गांधी भी मानती हैं कि बीरेंद्र सिंह का पार्टी से जाना अच्छा नहीं रहा, लेकिन मेरा वापस कांग्रेस में जाना का न इरादा और न ही उम्र है।