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पीजीआई में हड़ताल से बिगड़ रहे हालात, मरीज हलकान
Updated Thu, 15 Jun 2017 01:51 AM IST
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पीजीआई में हड़ताल से बिगड़ रहे हालात, मरीज हलकान
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। पीजीआई में अधिकारियों की लापरवाही और कर्मचारियों की हड़ताल मरीजों और उनके परिजनों पर भारी पड़ रही है। पीजीआई परिसर और वार्डों में फैली गंदगी और बायो वेस्ट संक्रमण को दावत दे रहा है। मरीज के आस पास ही दूसरे मरीजों से निकाली गईं खून से लथपथ पट्टियां पड़ी हैं। वार्डों के हालात मरीजों के लिए खतरनाक साबित होते जा रहे हैं। इन सबके बावजूद पीजीआई प्रशासन ने महज इमरजेंसी वार्ड की साफ सफाई के लिए नगर निगम कर्मचारियों को बुलाकर समस्या से पल्ला झाड़ लिया। पुलिस सुरक्षा में नगर निगम कर्मचारियों ने इमरजेंसी वार्ड की सफाई की। हालांकि वार्ड और संस्थान के अन्य जगहों में हालात जस के तस रहे।
पीजीआई में अनुबंध पर लगे बीयरर, सफाई कर्मचारी और मालियों का गुस्सा बुधवार को कुलपति, निदेशक और चिकित्सा अधीक्षक पर फूटा। अनुबंधित कर्मचारी विजय पार्क से नारेबाजी करते हुए कुलपति कार्यालय पहुंचे और गेट के बाहर तीनों अधिकारियों का पुतला फूंककर रोष जताया। वहीं अनुबंधित कर्मचारी संगठन के समर्थन में हरियाणा रोडवेज कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारी भी आ गए। अनुबंधित कर्मचारी संगठन की प्रधान कलावती कांगड़ा, कोषाध्यक्ष राजेश पंवार, मनोज मलिक, जितेंद्र लाकड़ा ने पीजीआई प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कलावती ने बताया कि तीन दिन से हड़ताल हो रही है, इसके बावजूद कुलपति और निदेशक मामले को संज्ञान में नहीं ले रहे हैं। कई वर्षों से लगातार कार्यों का अनुभव रखने वाले कर्मचारियों को हटाकर अनुभवहीन और चहेते आदमियों को सुदर्शन कंपनी रख रही है। हड़ताल पर गये अनुबंध कर्मचारियों ने स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज से भी अनुरोध किया है कि वे प्रशासनिक अधिकारियों पर कार्रवाई करते हुए सुदर्शन कंपनी के ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई करें। वहीं उन्होंने कहा कि पीजीआईएमएस प्रशासन और कंपनी मालिक जोड़-तोड़ करके अपने कुछ चहेते कर्मचारियों द्वारा झूठा बयान देकर हड़ताली कर्मचारियों और जिला प्रशासन के आला अधिकारियों को भ्रमित करना चाहता है। उन्होंने कहा कि एक बीयरर तीन माह पहले अवैध रूप से लगा है वह बयान दे रहा है कि बीयरर का समझौता हो गया है। लेकिन जो भी समझौता और बातचीत होगी वह अनुबंधित कर्मचारी संगठन की प्रधान कलावती कांगड़ा, कोषाध्यक्ष राजेश पंवार, महासचिव सुनील, उपप्रधान प्रकाशी देवी, संगठन सचिव अमित कुमार, उप महासचिव शीलक राम बेयररों की तरफ से ही होगी। संगठन के प्रतिनिधिमंडल में श्रीभगवान, गुलाब, नरेश, यशवंती, रीना देवी बातचीत के लिए अधिकृत किये गये हैं।
तीसरे दिन बद से बदतर हालात
तीन दिन की हड़ताल ने सबसे अधिक संस्थान में सफाई व्यवस्था को प्रभावित किया है। जगह-जगह मेडिकल कूड़ा दिखाई दिया। डस्टबिन में कूड़ा भरकर अब नीचे गिरने लगा है। वहीं रक्त रंजित पट्टियां पूरे संस्थान में बिखरी हुई देखी जा सकती है। जबकि मेडिकल साइंस इसे संक्रमण के लिहाज से बहुत गंभीर मानती है।
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आपातकालीन विभाग में पुलिस सुरक्षा में हुई सफाई
आपातकालीन विभाग और आपरेशन थियेटरों की सफाई के लिए नगर निगम से सफाई कर्मचारी बुलाए गए थे। डीएमएस डॉ. संदीप ने बताया कि उन्होंने निगम के कमिश्नर से कुछ सफाई कर्मचारी मांगे थे। सुबह जब निगम के सफाई कर्मचारी आए तो कुछ लोगों ने विरोध किया, इस पर पुलिस सुरक्षा में आपात कालीन विभाग की सफाई कराई गई है। जब तक अनुबंधित सफाई कर्मचारी काम पर नहीं लौटते तब तक ऐसे ही काम चलाया जाएगा।
हंगामे के दौरान लगा रहा जाम
कुलपति कार्यालय के बाहर कर्मचारियों ने सड़क पर बैठकर नारेबाजी की। इस दौरान एमडीयू आने जाने वालों को परेशानी झेलनी पड़ी। महिलाएं सड़क पर बैठ गई, इससे कार चालकों और दुपहिया वाहन चालकों को पावर हाउस से होकर एमडीयू जाना पड़ा।
कुलपति कार्यालय का गेट रहा बंद, पानी आता रहा बाहर
तपती गर्मी में कर्मचारियों को गेट के बाहर नारेबाजी करनी पड़ी। पहले तो कर्मचारी इंतजार करते रहे कि अंदर से कोई अधिकारी मिलने आएगा। जब ऐसा नहीं हुआ तो उन्होंने पुतला दहन कर दिया। वहीं सुरक्षा को देखते हुए सुरक्षा कर्मचारियों ने गेट को पहले ही बंद कर दिया था और किसी को अंदर नहीं जाने दिया गया। हालांकि गर्मी से बेचैन हो रहे लोगों के लिए कुलपति कार्यालय के अंदर से पानी जरूर आता रहा।
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अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। पीजीआई में अधिकारियों की लापरवाही और कर्मचारियों की हड़ताल मरीजों और उनके परिजनों पर भारी पड़ रही है। पीजीआई परिसर और वार्डों में फैली गंदगी और बायो वेस्ट संक्रमण को दावत दे रहा है। मरीज के आस पास ही दूसरे मरीजों से निकाली गईं खून से लथपथ पट्टियां पड़ी हैं। वार्डों के हालात मरीजों के लिए खतरनाक साबित होते जा रहे हैं। इन सबके बावजूद पीजीआई प्रशासन ने महज इमरजेंसी वार्ड की साफ सफाई के लिए नगर निगम कर्मचारियों को बुलाकर समस्या से पल्ला झाड़ लिया। पुलिस सुरक्षा में नगर निगम कर्मचारियों ने इमरजेंसी वार्ड की सफाई की। हालांकि वार्ड और संस्थान के अन्य जगहों में हालात जस के तस रहे।
पीजीआई में अनुबंध पर लगे बीयरर, सफाई कर्मचारी और मालियों का गुस्सा बुधवार को कुलपति, निदेशक और चिकित्सा अधीक्षक पर फूटा। अनुबंधित कर्मचारी विजय पार्क से नारेबाजी करते हुए कुलपति कार्यालय पहुंचे और गेट के बाहर तीनों अधिकारियों का पुतला फूंककर रोष जताया। वहीं अनुबंधित कर्मचारी संगठन के समर्थन में हरियाणा रोडवेज कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारी भी आ गए। अनुबंधित कर्मचारी संगठन की प्रधान कलावती कांगड़ा, कोषाध्यक्ष राजेश पंवार, मनोज मलिक, जितेंद्र लाकड़ा ने पीजीआई प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कलावती ने बताया कि तीन दिन से हड़ताल हो रही है, इसके बावजूद कुलपति और निदेशक मामले को संज्ञान में नहीं ले रहे हैं। कई वर्षों से लगातार कार्यों का अनुभव रखने वाले कर्मचारियों को हटाकर अनुभवहीन और चहेते आदमियों को सुदर्शन कंपनी रख रही है। हड़ताल पर गये अनुबंध कर्मचारियों ने स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज से भी अनुरोध किया है कि वे प्रशासनिक अधिकारियों पर कार्रवाई करते हुए सुदर्शन कंपनी के ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई करें। वहीं उन्होंने कहा कि पीजीआईएमएस प्रशासन और कंपनी मालिक जोड़-तोड़ करके अपने कुछ चहेते कर्मचारियों द्वारा झूठा बयान देकर हड़ताली कर्मचारियों और जिला प्रशासन के आला अधिकारियों को भ्रमित करना चाहता है। उन्होंने कहा कि एक बीयरर तीन माह पहले अवैध रूप से लगा है वह बयान दे रहा है कि बीयरर का समझौता हो गया है। लेकिन जो भी समझौता और बातचीत होगी वह अनुबंधित कर्मचारी संगठन की प्रधान कलावती कांगड़ा, कोषाध्यक्ष राजेश पंवार, महासचिव सुनील, उपप्रधान प्रकाशी देवी, संगठन सचिव अमित कुमार, उप महासचिव शीलक राम बेयररों की तरफ से ही होगी। संगठन के प्रतिनिधिमंडल में श्रीभगवान, गुलाब, नरेश, यशवंती, रीना देवी बातचीत के लिए अधिकृत किये गये हैं।
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तीसरे दिन बद से बदतर हालात
तीन दिन की हड़ताल ने सबसे अधिक संस्थान में सफाई व्यवस्था को प्रभावित किया है। जगह-जगह मेडिकल कूड़ा दिखाई दिया। डस्टबिन में कूड़ा भरकर अब नीचे गिरने लगा है। वहीं रक्त रंजित पट्टियां पूरे संस्थान में बिखरी हुई देखी जा सकती है। जबकि मेडिकल साइंस इसे संक्रमण के लिहाज से बहुत गंभीर मानती है।
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आपातकालीन विभाग में पुलिस सुरक्षा में हुई सफाई
आपातकालीन विभाग और आपरेशन थियेटरों की सफाई के लिए नगर निगम से सफाई कर्मचारी बुलाए गए थे। डीएमएस डॉ. संदीप ने बताया कि उन्होंने निगम के कमिश्नर से कुछ सफाई कर्मचारी मांगे थे। सुबह जब निगम के सफाई कर्मचारी आए तो कुछ लोगों ने विरोध किया, इस पर पुलिस सुरक्षा में आपात कालीन विभाग की सफाई कराई गई है। जब तक अनुबंधित सफाई कर्मचारी काम पर नहीं लौटते तब तक ऐसे ही काम चलाया जाएगा।
हंगामे के दौरान लगा रहा जाम
कुलपति कार्यालय के बाहर कर्मचारियों ने सड़क पर बैठकर नारेबाजी की। इस दौरान एमडीयू आने जाने वालों को परेशानी झेलनी पड़ी। महिलाएं सड़क पर बैठ गई, इससे कार चालकों और दुपहिया वाहन चालकों को पावर हाउस से होकर एमडीयू जाना पड़ा।
कुलपति कार्यालय का गेट रहा बंद, पानी आता रहा बाहर
तपती गर्मी में कर्मचारियों को गेट के बाहर नारेबाजी करनी पड़ी। पहले तो कर्मचारी इंतजार करते रहे कि अंदर से कोई अधिकारी मिलने आएगा। जब ऐसा नहीं हुआ तो उन्होंने पुतला दहन कर दिया। वहीं सुरक्षा को देखते हुए सुरक्षा कर्मचारियों ने गेट को पहले ही बंद कर दिया था और किसी को अंदर नहीं जाने दिया गया। हालांकि गर्मी से बेचैन हो रहे लोगों के लिए कुलपति कार्यालय के अंदर से पानी जरूर आता रहा।