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ढाई करोड़ में धुले दंगों के दाग, सर्किट हाउस फिर से तैयार
Updated Wed, 10 Jan 2018 02:25 AM IST
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99 प्रतिशत काम पूरा, एक सप्ताह में हो जाएगा ठहराव शुरू
दोबारा बनाए गए सीएम सूट से लेकर वीआईपी रूम
फरवरी 2016 में दंगों के दौरान जला दिया गया था हाउस
2011 में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कार्यकाल में हुआ था बनकर तैयार
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान भड़के दंगों की भेंट चढ़ा पीडब्ल्यूडी का सर्किट हाउस दोबारा बनकर तैयार हो गया है। करीब ढाई करोड़ रुपये की लागत से हाउस की दोबारा मरम्मत करवाई गई है। सप्ताह से 10 दिन में हाउस चालू हो जाएगा। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि केवल फर्नीचर की कमी रह गई है, जो जल्द आ जाएगा। फरवरी 2016 में प्रदेश के अंदर जाट आरक्षण को लेकर आंदोलन शुरू हुआ। सबसे पहले सांपला में रोड जाम किया गया। आंदोलन इसके साथ ही रोहतक के अलावा सोनीपत, झज्जर, भिवानी, हिसार, जींद, पानीपत, करनाल, कैथल व फतेहाबाद तक फैल गया। सबसे ज्यादा हिंसा रोहतक, झज्जर व सोनीपत में हुई। रोहतक में 19 फरवरी को सर्किट हाउस भी जला दिया गया था। साथ ही कमरों में भी जमकर तोड़फोड़ हुई। उसी दिन वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु की कोठी व स्कूल में भी आगजनी व तोड़फोड़ हुई। सर्किट हाउस में हुई आगजनी व तोड़फोड़ की भी सीबीआई जांच चल रही है।
1 साल 11 माह लगे दोबारा रौनक लौटने में
विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि सर्किट हाउस हिंसा के चलते पूरी तरह नष्ट हो गया था। करीब 3 एकड़ में बने सर्किट हाउस को दोबारा बनाने में एक साल 11 माह लगे हैं। ढाई करोड़ में बाहर व अंदर दोबारा से काम कराया गया। सीएम सूट व वीआईपी सूट में नए सिरे से रंग रोशन व साज सज्जा की गई है। साथ ही दूसरे 14 कमरों में भी वीआईपी सुविधाएं दी गई हैं। इसके साथ नए सिरे से किचन बनाया गया है, जो नो प्रोफिट व नो लोस पर चलता है।
मंत्री या अधिकारी के लिए 50 तो आम आदमी के लिए 500 रुपये किराया
सर्किट हाउस में मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक और अधिकारियों के ठहरने पर मात्र 50 रुपये किराया लिया जाता है। जबकि प्राइवेट व्यक्ति के लिए किराया 500 रुपये तक है। हालांकि पीडल्ब्यूडी के अधिकारियों का कहना है कि परिचित व्यक्ति को ही सर्किट हाउस में ठहराया जाता रहा है।
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स्टाफ की होनी है नियुक्ति
सर्किट हाउस बनकर तैयार हो गया है। फर्नीचर आना बाकी है और स्टाफ की नियुक्ति करनी है। सप्ताह से 10 दिन में सर्किट हाउस दोबारा चालू हो जाएगा।
एसके सचदेवा, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी
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99 प्रतिशत काम पूरा, एक सप्ताह में हो जाएगा ठहराव शुरू
दोबारा बनाए गए सीएम सूट से लेकर वीआईपी रूम
फरवरी 2016 में दंगों के दौरान जला दिया गया था हाउस
2011 में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कार्यकाल में हुआ था बनकर तैयार
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान भड़के दंगों की भेंट चढ़ा पीडब्ल्यूडी का सर्किट हाउस दोबारा बनकर तैयार हो गया है। करीब ढाई करोड़ रुपये की लागत से हाउस की दोबारा मरम्मत करवाई गई है। सप्ताह से 10 दिन में हाउस चालू हो जाएगा। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि केवल फर्नीचर की कमी रह गई है, जो जल्द आ जाएगा। फरवरी 2016 में प्रदेश के अंदर जाट आरक्षण को लेकर आंदोलन शुरू हुआ। सबसे पहले सांपला में रोड जाम किया गया। आंदोलन इसके साथ ही रोहतक के अलावा सोनीपत, झज्जर, भिवानी, हिसार, जींद, पानीपत, करनाल, कैथल व फतेहाबाद तक फैल गया। सबसे ज्यादा हिंसा रोहतक, झज्जर व सोनीपत में हुई। रोहतक में 19 फरवरी को सर्किट हाउस भी जला दिया गया था। साथ ही कमरों में भी जमकर तोड़फोड़ हुई। उसी दिन वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु की कोठी व स्कूल में भी आगजनी व तोड़फोड़ हुई। सर्किट हाउस में हुई आगजनी व तोड़फोड़ की भी सीबीआई जांच चल रही है।
1 साल 11 माह लगे दोबारा रौनक लौटने में
विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि सर्किट हाउस हिंसा के चलते पूरी तरह नष्ट हो गया था। करीब 3 एकड़ में बने सर्किट हाउस को दोबारा बनाने में एक साल 11 माह लगे हैं। ढाई करोड़ में बाहर व अंदर दोबारा से काम कराया गया। सीएम सूट व वीआईपी सूट में नए सिरे से रंग रोशन व साज सज्जा की गई है। साथ ही दूसरे 14 कमरों में भी वीआईपी सुविधाएं दी गई हैं। इसके साथ नए सिरे से किचन बनाया गया है, जो नो प्रोफिट व नो लोस पर चलता है।
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मंत्री या अधिकारी के लिए 50 तो आम आदमी के लिए 500 रुपये किराया
सर्किट हाउस में मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक और अधिकारियों के ठहरने पर मात्र 50 रुपये किराया लिया जाता है। जबकि प्राइवेट व्यक्ति के लिए किराया 500 रुपये तक है। हालांकि पीडल्ब्यूडी के अधिकारियों का कहना है कि परिचित व्यक्ति को ही सर्किट हाउस में ठहराया जाता रहा है।
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स्टाफ की होनी है नियुक्ति
सर्किट हाउस बनकर तैयार हो गया है। फर्नीचर आना बाकी है और स्टाफ की नियुक्ति करनी है। सप्ताह से 10 दिन में सर्किट हाउस दोबारा चालू हो जाएगा।
एसके सचदेवा, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी