फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rohtak News ›   आपसी सौहार्द की मिसाल बन रही शहर की संस् थाएण् ं

आपसी सौहार्द की मिसाल बन रही शहर की संस् थाएण् ं

Fri, 23 Jun 2017 01:23 AM IST
Updated Fri, 23 Jun 2017 01:23 AM IST
विज्ञापन
आपसी सौहार्द की मिसाल बन रही शहर की संस्
थाएण्
ं
विनीत तोमर
विज्ञापन

रोहतक। जाट सभा के चुनाव आने वाले दिनों में होने वाले हैं। इसके लिए सर्वसम्मति के प्रयास भी चल रहे हैं। जाट सभा के सदस्यों में जाट समाज के प्रमुख लोग शामिल हैं। इसके अलावा जाट शिक्षण संस्था के सदस्यों की भी इस चुनाव पर नजर रहती है। खास बात यह है कि जाट सभा और जाट संस्थाओं में दूसरी बिरादरियों के लोग भी सदस्य के तौर पर शामिल हैं। यह सदस्य वोट भी डालते हैं। जाट सभा के कॉलेजियम का चुनाव 30 जुलाई को होना है तो वहीं जाट शिक्षण संस्थाओं के चुनाव का मामला अभी कोर्ट में है। संस्था के सदस्यों का कहना है कि नाम बेशक जाट समाज से जुड़ा हो लेकिन सभी बिरादरियों के सदस्य पूरे भाईचारे के साथ सभा और संस्था के कामों में शामिल होते हैं।
यह है जाट संस्था का इतिहास
जाट शिक्षण संस्था की स्थापना वर्ष 1913 में हुई थी। संस्था की स्थापना के बाद कुछ दिनों के लिए भोलर सिंह अस्थायी प्रधान बने थे। सितंबर 1913 में संस्था की कमान चौधरी देवी सिंह को दे दी गई। उन्होंने अपनी करीब 22 एकड़ जमीन दान में दी। संस्था में वोटिंग के माध्यम से पहला चुनाव वर्ष 1982 में हुआ था। इसमें प्रियव्रत को प्रधान चुना गया। इसके बाद वर्ष 1990 में राज सिंह नांदल, वर्ष 1995 में सुरेंद्र सिंह, वर्ष 2000 में राज सिंह नांदल, वर्ष 2007 में धर्मवीर हुड्डा और वर्ष 2012 में सुरेंद्र सिंह संस्था के प्रधान बने। फिलहाल में संस्था के करीब 15500 आजीवन सदस्य हैैं। इसमें सभी बिरादरी के लोग शामिल हैं। संस्था की स्थापना के बाद इसमें सभी बिरादरी के लोग जुड़ गए। नाम भले ही जाट संस्था हो, लेकिन इसमें पंजाबी, ब्राह्मण और वैश्य वर्ग सहित 36 बिरादरी के लोगों ने चंदा दिया। खास बात यह है कि संस्था का प्रधान हमेशा जाट ही होता है लेकिन उसे चुनने के लिए सभी बिरादरी के लोगों का सहयोग रहता है।
विज्ञापन


कुछ ऐसी है जाट सभा की पहचान
वर्ष 2001 में जाट सभा का गठन हुआ था। इससे पहले वर्ष 1978 से इसे जाट वेलफेयर एसोसिएशन के नाम से जाना जाता था। सभा के करीब 1200 सदस्य हैं। इसमें पंजाबी और ब्राह्मण समेत सभी बिरादरी के लोग शामिल हैैं। जाट सभा के गठन के बाद पहले प्रधान लेफ्टिनेंट कर्नल बनी सिंह मलिक बने। वर्ष 2007 में चौधरी दीवान सिंह को भी सर्वसम्मति से ही प्रधान चुन लिया गया। जाट सभा के गठन के बाद वोटिंग के माध्यम से पहली बार 2014 में चुनाव कराया गया था। इसमें मेजर चंद्र सिंह को प्रधान चुना गया। इस सभा में भी मुखिया का चुनाव 36 बिरादरी के लोग ही करते हैं। इसी वजह से यह सभा भी भाईचारे की एक अनूठी मिसाल है।
विज्ञापन
विज्ञापन


यह बोले संस्था से जुड़े लोग
जाट शिक्षण संस्था और जाट सभा में सभी बिरादरी के सदस्य हैं। दोनों संस्थाएं भाईचारे की मिसाल कायम कर रही हैं। जाट शिक्षण संस्था में जाट बिरादरी से ज्यादा दूसरे बिरादरी के शिक्षकों का भी पूरा योगदान रहा है। इन्होंने संस्था और शिक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए दिनरात मेहनत की।
- भोपाल सिंह, आजीवन सदस्य जाट शिक्षण संस्था एवं जाट सभा।

जाट शिक्षण संस्था का इतिहास काफी पुराना है। सभी बिरादरी के लोग इससे जुड़े हैं। वर्ष 2007 से 2010 के कार्यकाल के बीच इंजीनियरिंग कॉलेज और लॉ कॉलेज के निर्माण के समय 36 बिरादरी के लोगों ने मिलकर करीब 14 करोड़ रुपये चंदा दिया था। बकायदा इसके लिए दान समारोह हुआ। संस्था में जाटों के अलावा दूसरी बिरादरी के शिक्षक भी काफी संख्या में रहे हैं।
- धर्मवीर हुड्डा, पूर्व प्रधान जाट शिक्षण संस्था।

36 बिरादरी के लोगों ने दान देकर संस्था को इस मुकाम तक पहुंचाया है। संस्था में पढ़ने वाले युवा आज देश-प्रदेश में नाम रोशन कर रहे हैं। इन युवाओं में भी सभी बिरादरी के लोग शामिल हैं। सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए।
- डॉ. प्रेम हुड्डा, आजीवन सदस्य जाट शिक्षण संस्था।

संस्था में सभी बिरादरी के लोगों का सहयोग रहा है। सभी ने भाईचारे की भावना से काम करते हुए संस्था को आगे बढ़ाया है। किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं किया गया। आज भी संस्था में भाईचारा कायम है।

- ओमप्रकाश कबलाना, पूर्व उप प्रधान जाट शिक्षण संस्था।

करीब 25 साल से संस्था के साथ जुड़ा हुआ हूं। संस्था में सभी बिरादरी के लोग जुड़े हुए हैं। जाट संस्था और यहां के लोगों के साथ घर जैसा माहौल है। चुनाव में सभी के साथ मिलकर निष्पक्ष और ईमानदार पदाधिकारियों को चुना जाता है। मेरे साथ पत्नी आनंदी देवी भी जाट संस्था की आजीवन सदस्य है।
- पंडित कृष्ण कुमार कौशिक, आजीवन सदस्य जाट शिक्षण संस्था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed