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प्रदेश का मुख्य एआरटी सेंटर स्वयं बीमार
Updated Thu, 27 Sep 2018 09:30 AM IST
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एचआईवी का लोगो
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प्रदेश के एकमात्र एआरटी सेंटर में सीडी-4 मशीन खराब, एचआईवी मरीज परेशान
- जांच के बिना एचआईवी मरीजों का शुरू नहीं हो पाता उपचार
- रोजाना करीब 150 मरीज आते हैं सीडी-4 जांच के लिए
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। प्रदेश में नाको की ओर से पीजीआई में संचालित हो रहे एकमात्र मुख्य एआरटी सेंटर में सीडी-4 मशीन खराब होने के चलते एचआईवी ग्रस्त मरीजों के उपचार पर सवाल उठ रहे हैं। यहां आए दिन सीडी फोर मशीन खराब रहती है। ऐसे में एचआईवी ग्रस्त मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता। इस संबंध में संस्थान का कहना है कि मशीनों की जिम्मेदारी संबंधित विभाग की है।
मरीजों के अनुसार पीजीआई स्थित एआरटी सेंटर में ओपीडी करीब 400 रहती है। इनमें हर रोज करीब 150 मरीजों की सीडी-4 जांच आवश्यक होती है। एचआईवी ग्रस्त मरीजों की शिकायत है कि एआरटी सेंटर में सीडी फोर मशीन हमेशा खराब रहती है। यदि किसी को फोन करो तो कोई जवाब नहीं देता। दिल्ली में 11, पंजाब में 9 और हरियाणा में एक ही एआरटी सेंटर है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि अधिकारी एचआईवी मरीजों को लेकर कितने अलर्ट हैं। पीड़ितों की मानें तो एलटी, स्टाफ नर्स व काउंसलर की अलाट सीट के अनुपात में यहां स्टाफ कम हैं। मेरिट के हिसाब से स्टाफ की भर्ती करने की बजाए यहां पाजिटिव मरीजों के साथ भेदभाव किया गया। स्थिति यह है कि इनकी लापरवाही के चलते मरीजों को सही समय पर उपचार तक नहीं मिल पा रहा है।
पीड़ितों की मानें तो पीजीआईएमएस में प्रदेश का एकमात्र एआरटी सेंटर हैं। यहां प्रदेश भर से मरीज जांच के लिए व दवा के लिए आते हैं। यहां से दवा तय होने के बाद ही मरीज का उपचार शुरू होता है। इस संबंध में नाको की प्रोजेक्ट डायरेक्टर से फोन पर बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।
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क्यों जरूरी है सीडी-4 जांच
सीडी -4 जांच मशीन (क्लस्टर ऑफ डिफीसिएंसी काउंट मशीन) है। इस मशीन में मरीज की जांच निशुल्क होती है। इस जांच के बाद ही मरीज में एचआईवी वायरस की क्षमता के अनुसार दी जाने वाली डोज को तय किया जाता है। इस जांच के बिना मरीज का उपचार रुक जाता है। सरकार पीड़ितों को जागरूक कर प्रयास करती है कि वह दवा बीच में न छोडे़ं, इसके लिए उनकी लगातार काउंसलिंग तक की जाती है। लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के चलते एचआईवी मरीजों का कोर्स बीच में ही अटक जाता है।
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प्रदेश के एकमात्र एआरटी सेंटर में सीडी-4 मशीन खराब, एचआईवी मरीज परेशान
- जांच के बिना एचआईवी मरीजों का शुरू नहीं हो पाता उपचार
- रोजाना करीब 150 मरीज आते हैं सीडी-4 जांच के लिए
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। प्रदेश में नाको की ओर से पीजीआई में संचालित हो रहे एकमात्र मुख्य एआरटी सेंटर में सीडी-4 मशीन खराब होने के चलते एचआईवी ग्रस्त मरीजों के उपचार पर सवाल उठ रहे हैं। यहां आए दिन सीडी फोर मशीन खराब रहती है। ऐसे में एचआईवी ग्रस्त मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पाता। इस संबंध में संस्थान का कहना है कि मशीनों की जिम्मेदारी संबंधित विभाग की है।
मरीजों के अनुसार पीजीआई स्थित एआरटी सेंटर में ओपीडी करीब 400 रहती है। इनमें हर रोज करीब 150 मरीजों की सीडी-4 जांच आवश्यक होती है। एचआईवी ग्रस्त मरीजों की शिकायत है कि एआरटी सेंटर में सीडी फोर मशीन हमेशा खराब रहती है। यदि किसी को फोन करो तो कोई जवाब नहीं देता। दिल्ली में 11, पंजाब में 9 और हरियाणा में एक ही एआरटी सेंटर है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि अधिकारी एचआईवी मरीजों को लेकर कितने अलर्ट हैं। पीड़ितों की मानें तो एलटी, स्टाफ नर्स व काउंसलर की अलाट सीट के अनुपात में यहां स्टाफ कम हैं। मेरिट के हिसाब से स्टाफ की भर्ती करने की बजाए यहां पाजिटिव मरीजों के साथ भेदभाव किया गया। स्थिति यह है कि इनकी लापरवाही के चलते मरीजों को सही समय पर उपचार तक नहीं मिल पा रहा है।
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पीड़ितों की मानें तो पीजीआईएमएस में प्रदेश का एकमात्र एआरटी सेंटर हैं। यहां प्रदेश भर से मरीज जांच के लिए व दवा के लिए आते हैं। यहां से दवा तय होने के बाद ही मरीज का उपचार शुरू होता है। इस संबंध में नाको की प्रोजेक्ट डायरेक्टर से फोन पर बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।
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क्यों जरूरी है सीडी-4 जांच
सीडी -4 जांच मशीन (क्लस्टर ऑफ डिफीसिएंसी काउंट मशीन) है। इस मशीन में मरीज की जांच निशुल्क होती है। इस जांच के बाद ही मरीज में एचआईवी वायरस की क्षमता के अनुसार दी जाने वाली डोज को तय किया जाता है। इस जांच के बिना मरीज का उपचार रुक जाता है। सरकार पीड़ितों को जागरूक कर प्रयास करती है कि वह दवा बीच में न छोडे़ं, इसके लिए उनकी लगातार काउंसलिंग तक की जाती है। लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के चलते एचआईवी मरीजों का कोर्स बीच में ही अटक जाता है।