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साइड स्टोरी बाला जी
Updated Sun, 01 Jul 2018 11:24 PM IST
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राजेश शांडिल्य
कुरुक्षेत्र।
तिरुपति मंदिर के कपाट खुलने से पहले कन्या, गाय और घोड़ा तो पहुंच गये, मगर गजराज प्रबंध नहीं हो सका। खैर इनकी पूजा के पश्चात तिरुपति बालाजी मंदिर के कपाट खुले तो सबसे पहले भगवान वेंकेटेश्वर ने गौरी को देखा। इस गाय को देखने के पश्चात ही श्रद्धालुओं ने भगवान वेंकेटेश्वर तिरुपति बालाजी के दर्शन का सौभाग्य श्रद्धालुओं को काफी इंतजार के बाद नसीब हुआ। मंत्रोच्चारण के गूंज के बीच भगवान वेंकेटेश्वर बालाजी के पावन स्वरूप और अद्भुत शृंगार को देख श्रद्धालु भावविभोर दिखे। दरअसल, सदियों पुरानी परंपरानुसार गाय के दर्शनों के पश्चात ही भगवान बालाजी श्रद्धालु उनके दर्शन देते हैं। धर्मनगरी के ब्रह्मसरोवर तट पर तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम ट्रस्ट आंध्रप्रदेश द्वारा स्थापित कराये गये नवनिर्मित मंदिर में मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम 28 जून से जारी था। रविवार को यहां मंदिर के कपाट खुलने पर हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर, राज्यमंत्री कृष्ण बेदी और विधायक सुभाष सुधा सहित आंध्र प्रदेश से आए ट्रस्ट के कई पदाधिकारी भी विशेष पूजा और दर्शनों के लिए पहुंचे थे। खास बात यह रही कि यहां अनुष्ठान के दौरान कन्या पूजन, गाय पूजन, हाथी का पूजन और घोड़े का पूजन भी होता, लेकिन में कन्या, गाय और घोड़ा तो यहां पहुंचे, मगर हाथी का प्रबंध नहीं हुआ। लिहाजा उनके निमित्त पूजा अर्चना कराने के बाद अनुष्ठान संपूर्ण कराया गया।
ट्रस्ट की योजना,10 लाख से ज्यादा आबादी वाले प्रमुख स्थलों पर तिरुपति श्रृंखला
उत्तर भारतीय श्रद्धालुओं को अगर भगवान वेंकेटेश्वर तिरुपति बालाजी से मिलना है तो अब उन्हें दक्षिण भारत की ओर कूच करने की बजाये धर्मनगरी कुरुक्षेत्र में मिलेंगे। हालांकि तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम ट्रस्ट की योजना अगले वर्षो में देश के प्रमुख उन स्थानों पर कुरुक्षेत्र की ही तर्ज पर मंदिर खोलने की है, यहां की आबादी 10 लाख से अधिक है। ट्रस्ट ने यह निर्णय इसलिए लिया है, क्योंकि उत्तर भारत सहित देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु बड़ी संख्या में आंध्र प्रदेश स्थित तिरुपति बालाजी में दर्शन के लिए भारी संख्या में पहुंचते हैं। कुरुक्षेत्र की तरह सभी जगहों पर आंध्र प्रदेश में बने तिरुपति बालाजी मॉडल पर ही मंदिर का निर्माण और उसी परंपरानुसार पूजा अर्चना होगी।
सीएम खट्टर बोले, आचार्य जी दक्षिणा
तिरुपति बालाजी टेंपल में सीएम मनोहर लाल खट्टर ने करीब 40 मिनट पूजा की। इस दौरान पूरे मंदिर की परिक्रमा के बाद सीएम 25 मिनट वे मंदिर के गर्भालय में रहे। चुनिंदा लोग ही गर्भालय में मौजूद रहे, यहां फोटो वीडियोग्राफी हमेशा के लिए प्रतिबंधित की गई है। मंदिर के मुख्य आचार्य श्रीनिवासाचायरुलु ने भगवान वेंकेटेश्वर के चरणों में बैठे सीएम को तुलसी, कमल और गुलाब के फूल और फलों से भरी थाली हाथ में देकर दक्षिण भारतीय परंपरानुसार जब पूजा अर्चना संपन्न कराई तो इसमें दक्षिणा का कहीं जिक्र नहीं हुआ। इस पर सीएम खट्टर बोले आचार्य जी वो दक्षिणा की तो कोई बात ही नहीं की, जो सबसे जरूरी होती है।
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15 हजार टन से अधिक कांची ब्लैक ग्रेनाइट से बना अद्भुत मंदिर
दक्षिण भारतीय शैली में 15 हजार टन से अधिक कांची ब्लैक ग्रेनाइट पत्थर से कुरुक्षेत्र में स्थापित किया गया तिरुपति मंदिर का स्वरूप काफी भव्य है। तिरुपति मंदिर परिसर साढ़े पांच एकड़ से ज्यादा भूमि पर, मंदिर के मुख्य भवन के अलावा एंट्री गेट और चार दिवारी हो चुकी है, लेकिन मंदिर के मुख्य भवन के अलावा अभी अन्य कई ब्लाक बनने हैं,जिसमें कर्मचारी आवास, वीवीआईवी व यात्री गेस्ट हाउस इत्यादि का निर्माण कार्य 2018 में ही ही पूरा होने की उम्मीद है।
सीएम, राज्यमंत्री ने मंदिर में जमीन बैठकर प्रसाद ग्रहण किया
गर्भालय में पूजा के उपरांत सीएम ने पंचामृत और प्रसाद ग्रहण किया। उन्होंने गर्भालय से बाहर आकर जमीन पर बैठकर ही पत्तों से बने दौने में प्रसाद का सेवन किया। इसके पश्चात मुख्य आचार्य ने मुख्यमंत्री स्मृति चिह्न और विशेष रूप से दक्षिण भारत स्थित मंदिर से आए लड्डूओं का प्रसाद एवं लाल चुनरी देकर भेंट किए।
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कुरुक्षेत्र।
तिरुपति मंदिर के कपाट खुलने से पहले कन्या, गाय और घोड़ा तो पहुंच गये, मगर गजराज प्रबंध नहीं हो सका। खैर इनकी पूजा के पश्चात तिरुपति बालाजी मंदिर के कपाट खुले तो सबसे पहले भगवान वेंकेटेश्वर ने गौरी को देखा। इस गाय को देखने के पश्चात ही श्रद्धालुओं ने भगवान वेंकेटेश्वर तिरुपति बालाजी के दर्शन का सौभाग्य श्रद्धालुओं को काफी इंतजार के बाद नसीब हुआ। मंत्रोच्चारण के गूंज के बीच भगवान वेंकेटेश्वर बालाजी के पावन स्वरूप और अद्भुत शृंगार को देख श्रद्धालु भावविभोर दिखे। दरअसल, सदियों पुरानी परंपरानुसार गाय के दर्शनों के पश्चात ही भगवान बालाजी श्रद्धालु उनके दर्शन देते हैं। धर्मनगरी के ब्रह्मसरोवर तट पर तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम ट्रस्ट आंध्रप्रदेश द्वारा स्थापित कराये गये नवनिर्मित मंदिर में मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम 28 जून से जारी था। रविवार को यहां मंदिर के कपाट खुलने पर हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर, राज्यमंत्री कृष्ण बेदी और विधायक सुभाष सुधा सहित आंध्र प्रदेश से आए ट्रस्ट के कई पदाधिकारी भी विशेष पूजा और दर्शनों के लिए पहुंचे थे। खास बात यह रही कि यहां अनुष्ठान के दौरान कन्या पूजन, गाय पूजन, हाथी का पूजन और घोड़े का पूजन भी होता, लेकिन में कन्या, गाय और घोड़ा तो यहां पहुंचे, मगर हाथी का प्रबंध नहीं हुआ। लिहाजा उनके निमित्त पूजा अर्चना कराने के बाद अनुष्ठान संपूर्ण कराया गया।
ट्रस्ट की योजना,10 लाख से ज्यादा आबादी वाले प्रमुख स्थलों पर तिरुपति श्रृंखला
उत्तर भारतीय श्रद्धालुओं को अगर भगवान वेंकेटेश्वर तिरुपति बालाजी से मिलना है तो अब उन्हें दक्षिण भारत की ओर कूच करने की बजाये धर्मनगरी कुरुक्षेत्र में मिलेंगे। हालांकि तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम ट्रस्ट की योजना अगले वर्षो में देश के प्रमुख उन स्थानों पर कुरुक्षेत्र की ही तर्ज पर मंदिर खोलने की है, यहां की आबादी 10 लाख से अधिक है। ट्रस्ट ने यह निर्णय इसलिए लिया है, क्योंकि उत्तर भारत सहित देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु बड़ी संख्या में आंध्र प्रदेश स्थित तिरुपति बालाजी में दर्शन के लिए भारी संख्या में पहुंचते हैं। कुरुक्षेत्र की तरह सभी जगहों पर आंध्र प्रदेश में बने तिरुपति बालाजी मॉडल पर ही मंदिर का निर्माण और उसी परंपरानुसार पूजा अर्चना होगी।
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सीएम खट्टर बोले, आचार्य जी दक्षिणा
तिरुपति बालाजी टेंपल में सीएम मनोहर लाल खट्टर ने करीब 40 मिनट पूजा की। इस दौरान पूरे मंदिर की परिक्रमा के बाद सीएम 25 मिनट वे मंदिर के गर्भालय में रहे। चुनिंदा लोग ही गर्भालय में मौजूद रहे, यहां फोटो वीडियोग्राफी हमेशा के लिए प्रतिबंधित की गई है। मंदिर के मुख्य आचार्य श्रीनिवासाचायरुलु ने भगवान वेंकेटेश्वर के चरणों में बैठे सीएम को तुलसी, कमल और गुलाब के फूल और फलों से भरी थाली हाथ में देकर दक्षिण भारतीय परंपरानुसार जब पूजा अर्चना संपन्न कराई तो इसमें दक्षिणा का कहीं जिक्र नहीं हुआ। इस पर सीएम खट्टर बोले आचार्य जी वो दक्षिणा की तो कोई बात ही नहीं की, जो सबसे जरूरी होती है।
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15 हजार टन से अधिक कांची ब्लैक ग्रेनाइट से बना अद्भुत मंदिर
दक्षिण भारतीय शैली में 15 हजार टन से अधिक कांची ब्लैक ग्रेनाइट पत्थर से कुरुक्षेत्र में स्थापित किया गया तिरुपति मंदिर का स्वरूप काफी भव्य है। तिरुपति मंदिर परिसर साढ़े पांच एकड़ से ज्यादा भूमि पर, मंदिर के मुख्य भवन के अलावा एंट्री गेट और चार दिवारी हो चुकी है, लेकिन मंदिर के मुख्य भवन के अलावा अभी अन्य कई ब्लाक बनने हैं,जिसमें कर्मचारी आवास, वीवीआईवी व यात्री गेस्ट हाउस इत्यादि का निर्माण कार्य 2018 में ही ही पूरा होने की उम्मीद है।
सीएम, राज्यमंत्री ने मंदिर में जमीन बैठकर प्रसाद ग्रहण किया
गर्भालय में पूजा के उपरांत सीएम ने पंचामृत और प्रसाद ग्रहण किया। उन्होंने गर्भालय से बाहर आकर जमीन पर बैठकर ही पत्तों से बने दौने में प्रसाद का सेवन किया। इसके पश्चात मुख्य आचार्य ने मुख्यमंत्री स्मृति चिह्न और विशेष रूप से दक्षिण भारत स्थित मंदिर से आए लड्डूओं का प्रसाद एवं लाल चुनरी देकर भेंट किए।