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भला, इसलिए थोड़ी सरकार चुनी थी कि स्वच्छ हवा में सांस भी न ले सकें
Updated Mon, 21 May 2018 03:28 AM IST
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भला, इसलिए थोड़ी सरकार चुनी थी कि स्वच्छ हवा में सांस भी न ले सकें
- लोग बोले, गंदगी के ढेरों से उठने वाली दुर्गंध में सांस लेना हुआ दूभर, संक्रामक रोग फैलने के मुहाने पर खड़ा है शहर
- सरकार को चाहिए कि जल्द से जल्द ठोस कदम उठाए ताकि राहत मिले
- जरूरी नहीं कि सारी मांगे मानी चाहिए मगर जो जायज हो वहीं पूरी करें
फोटो...
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
सफाई कर्मियों की हड़ताल से शहर के हालात बिगड़ चुके हैं। बदबू की वजह से सांस लेना दूभर हो गया है। संक्रामक रोग फैलने के मुहाने पर शहर खड़ा है। कुछ दिन और ऐसा चला तो निश्चित हालात बिगड़ जाएंगे। शासन-प्रशासन को चाहिए कि आंदोलित कर्मियों से बातचीत करके बीच का रास्ता निकालें ताकि जनता को राहत मिले। भला, जनता ने इसलिए थोड़ी सरकार को चुना था कि खुले में सांस भी नहीं ले सकें। अब शहर में दम घुटने लगा है, जिससे निजात जल्द ही मिलनी चाहिए। यह कहना है शहरवासियों का।
ठेका कर्मियों को स्थायी करने, समान काम समान वेतन आदि मांगों को लेकर प्रदेश के नगर निगम कर्मचारी 13 दिनों से हड़ताल पर हैं। इस वजह से शहर की साफ-सफाई का काम पूरी तरह से ठप पड़ा हुआ है। सड़कों पर चारों तरफ कूड़ा बिखरा पड़ा हुआ है। डलाबघरों में कूड़ा के ऊंचे-ऊंचे ढेर लग गए हैं। इन ढेरों से उठने वाली दुर्गंध ने शहर की आबोहवा ही बिगड़कर रख दी है। हवा में घुली दुर्गंध की वजह से लोगों का सांस लेना दूभर हो गया है। तेज हवा चलने पर कूड़े के ढेरों से धूल के साथ-साथ पॉलीथिन उड़ रही हैं। इन हालातों से शहर संक्रामक रोगों के फैलने की मुहाने पर खड़ा हुआ है। जानकारों का कहना है कि यदि दो-चार दिन और यही हालात रहे तो संक्रामक रोगों के फैलने से शहरवासियों की सेहत बिगड़ेगी।
इस मसले पर शहरवासियों का कहना है कि शासन-प्रशासन को चाहिए कि कर्मचारी नेताओं से बातचीत करके बीच का रास्ता अपनाए। जरूरी नहीं कि आंदोलित कर्मियों की सारी बातें मानी जाए मगर कुछ तो मान ली जाए ताकि उनका सम्मान रह सके और काम पर लौट आए। लोगों का कहना है कि भला, इसलिए थोड़ी जनता ने सरकार को चुना था कि स्वच्छ हवा में सांस भी नहीं ले सकें। सफाई कर्मियों का काम इतना आसान नहीं जितना माना जाता है। ये लोग वह काम करते हैं, जिसे कोई छूना तक पसंद नहीं करता। अव्वल तो यह कि जब उन्हें रखा जा रहा था, तभी पक्का नहीं करने के बाबत बॉड भरवा लेना चाहिए थे। अब तो उनकी मांग जायज हैं क्योंकि वह काफी समय से पूरी शिद्दत से काम कर रहे हैं।
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ये कहना है शहरवासियों का
शहर में चारों तरफ कूड़ा ही कूड़ा नजर आ रहा है। घरों के बाहर सड़क पर सफाई करनी पड़ रही है। जब हवा चलती है, तो कूड़ा बिखरकर फैल जाता है और फिर गंदगी हो जाती है। जनता ने परेशानियों से निजात के लिए सरकार को चुना था।
संजय, दुकानदार दुर्गा कालोनी
0-जनता ने इसलिए सरकार को नहीं चुना था कि स्वच्छ हवा में सांस भी नहीं सकें। सरकार को जल्द ठोस कदम उठाना चाहिए ताकि गंदगी व दुर्गंध से राहत मिल सकें। दुर्गंध की वजह से घर के बाहर सांस लेना दूभर हो रहा है।
श्रीमती मुकेश, गृहणी दुर्गा कालोनी
0-जहां जाओ वहीं गंदगी के ढेर नजर आते हैं। दुर्गंध की वजह से मजबूरन मुंह पर दुपट्टा बांधकर चलने को मजबूर हैं। सरकार को चाहिए कि सभी नहीं मगर कुछ मांगे तो मान ले ताकि सफाई कर्मचारी काम पर लौट आएं और राहत मिले।
शैली, छात्रा
0-सड़क का सारा कूड़ा करकट हवा चलने पर दुकान के अंदर आ रहा है। दिन में कई-कई बार दुकान के अंदर सफाई करनी पड़ रही है। बदबू के कारण दुकान पर बैठना मुश्किल हो रहा है मगर पेट की खातिर सब परेशानी झेलनी पड़ रही है।
सुनील, दुकानदार सोनीपत स्टैंड
0-गंदगी की वजह से संक्रामक रोग फैलना शुरू हो गए हैं। यदि यही हालात रहे तो निश्चित शहर माहमारी की चपेट में होगा। शासन-प्रशासन को चाहिए कि वह जल्द कोई ठोस कदम उठाए ताकि जनता को नारकीय हालातों से राहत मिले।
जसवीर, हाउसिंग बोर्ड
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- लोग बोले, गंदगी के ढेरों से उठने वाली दुर्गंध में सांस लेना हुआ दूभर, संक्रामक रोग फैलने के मुहाने पर खड़ा है शहर
- सरकार को चाहिए कि जल्द से जल्द ठोस कदम उठाए ताकि राहत मिले
- जरूरी नहीं कि सारी मांगे मानी चाहिए मगर जो जायज हो वहीं पूरी करें
फोटो...
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
सफाई कर्मियों की हड़ताल से शहर के हालात बिगड़ चुके हैं। बदबू की वजह से सांस लेना दूभर हो गया है। संक्रामक रोग फैलने के मुहाने पर शहर खड़ा है। कुछ दिन और ऐसा चला तो निश्चित हालात बिगड़ जाएंगे। शासन-प्रशासन को चाहिए कि आंदोलित कर्मियों से बातचीत करके बीच का रास्ता निकालें ताकि जनता को राहत मिले। भला, जनता ने इसलिए थोड़ी सरकार को चुना था कि खुले में सांस भी नहीं ले सकें। अब शहर में दम घुटने लगा है, जिससे निजात जल्द ही मिलनी चाहिए। यह कहना है शहरवासियों का।
ठेका कर्मियों को स्थायी करने, समान काम समान वेतन आदि मांगों को लेकर प्रदेश के नगर निगम कर्मचारी 13 दिनों से हड़ताल पर हैं। इस वजह से शहर की साफ-सफाई का काम पूरी तरह से ठप पड़ा हुआ है। सड़कों पर चारों तरफ कूड़ा बिखरा पड़ा हुआ है। डलाबघरों में कूड़ा के ऊंचे-ऊंचे ढेर लग गए हैं। इन ढेरों से उठने वाली दुर्गंध ने शहर की आबोहवा ही बिगड़कर रख दी है। हवा में घुली दुर्गंध की वजह से लोगों का सांस लेना दूभर हो गया है। तेज हवा चलने पर कूड़े के ढेरों से धूल के साथ-साथ पॉलीथिन उड़ रही हैं। इन हालातों से शहर संक्रामक रोगों के फैलने की मुहाने पर खड़ा हुआ है। जानकारों का कहना है कि यदि दो-चार दिन और यही हालात रहे तो संक्रामक रोगों के फैलने से शहरवासियों की सेहत बिगड़ेगी।
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इस मसले पर शहरवासियों का कहना है कि शासन-प्रशासन को चाहिए कि कर्मचारी नेताओं से बातचीत करके बीच का रास्ता अपनाए। जरूरी नहीं कि आंदोलित कर्मियों की सारी बातें मानी जाए मगर कुछ तो मान ली जाए ताकि उनका सम्मान रह सके और काम पर लौट आए। लोगों का कहना है कि भला, इसलिए थोड़ी जनता ने सरकार को चुना था कि स्वच्छ हवा में सांस भी नहीं ले सकें। सफाई कर्मियों का काम इतना आसान नहीं जितना माना जाता है। ये लोग वह काम करते हैं, जिसे कोई छूना तक पसंद नहीं करता। अव्वल तो यह कि जब उन्हें रखा जा रहा था, तभी पक्का नहीं करने के बाबत बॉड भरवा लेना चाहिए थे। अब तो उनकी मांग जायज हैं क्योंकि वह काफी समय से पूरी शिद्दत से काम कर रहे हैं।
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ये कहना है शहरवासियों का
शहर में चारों तरफ कूड़ा ही कूड़ा नजर आ रहा है। घरों के बाहर सड़क पर सफाई करनी पड़ रही है। जब हवा चलती है, तो कूड़ा बिखरकर फैल जाता है और फिर गंदगी हो जाती है। जनता ने परेशानियों से निजात के लिए सरकार को चुना था।
संजय, दुकानदार दुर्गा कालोनी
0-जनता ने इसलिए सरकार को नहीं चुना था कि स्वच्छ हवा में सांस भी नहीं सकें। सरकार को जल्द ठोस कदम उठाना चाहिए ताकि गंदगी व दुर्गंध से राहत मिल सकें। दुर्गंध की वजह से घर के बाहर सांस लेना दूभर हो रहा है।
श्रीमती मुकेश, गृहणी दुर्गा कालोनी
0-जहां जाओ वहीं गंदगी के ढेर नजर आते हैं। दुर्गंध की वजह से मजबूरन मुंह पर दुपट्टा बांधकर चलने को मजबूर हैं। सरकार को चाहिए कि सभी नहीं मगर कुछ मांगे तो मान ले ताकि सफाई कर्मचारी काम पर लौट आएं और राहत मिले।
शैली, छात्रा
0-सड़क का सारा कूड़ा करकट हवा चलने पर दुकान के अंदर आ रहा है। दिन में कई-कई बार दुकान के अंदर सफाई करनी पड़ रही है। बदबू के कारण दुकान पर बैठना मुश्किल हो रहा है मगर पेट की खातिर सब परेशानी झेलनी पड़ रही है।
सुनील, दुकानदार सोनीपत स्टैंड
0-गंदगी की वजह से संक्रामक रोग फैलना शुरू हो गए हैं। यदि यही हालात रहे तो निश्चित शहर माहमारी की चपेट में होगा। शासन-प्रशासन को चाहिए कि वह जल्द कोई ठोस कदम उठाए ताकि जनता को नारकीय हालातों से राहत मिले।
जसवीर, हाउसिंग बोर्ड