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लोगों को अच्छी शिक्षा व स्वास्थ्य मुहैया कराने के लिए बनाऊंगा बेहतर पॉलिसी
Updated Sun, 29 Apr 2018 02:48 AM IST
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लोगों को अच्छी शिक्षा व स्वास्थ्य मुहैया कराने के लिए बनाऊंगा बेहतर पॉलिसी : विकास
कॉर्पोरेट सेक्टर में सात काम करके देख लिया, अब प्रशासनिक सेवाओं को सुधारने का रहेगा प्रयास
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
समाज को लाभ हो इस सोच के साथ प्रशासनिक सेवा की ओर बढ़ा हूं। स्वास्थ्य व शिक्षा की खासकर बच्चियों को बेहतर सुविधा मिले। इसके लिए बेहतर पॉलिसी तैयार करने का प्रयास रहेगा। यह सोच है यूपीएससी परीक्षा में 123वां रैंक हासिल करने वाले शहर के बेटे विकास सांगवान का। मूलरूप से मुरादपुर टेकना हाल किशनपुरा निवासी विकास ने अमर उजाला से हुई बातचीत में अपनी सोच व लक्ष्य साझा किया।
उन्होंने कहा कि एआईटी पुणे से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद सात साल कॉर्पोरेट सेक्टर में काम करके देख लिया। पैकेज भी करीब 22 लाख रुपये रहा। अब सोसायटी के लिए कुछ करना है। अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए पिछले करीब डेढ़ साल में दस से बारह घंटे पढ़ाई की। सोशल मीडिया से दूर रहा। इंटरनेट का शिक्षा के लिए उपयोग किया। इस सेवा का सही इस्तेमाल किया जाए तो यह बेहद फायदेमंद है। यही वजह रही कि मुझे यूपीएससी में अच्छा रैंक हासिल करने के लिए कोचिंग की जरूरत नहीं पड़ी। हां, मुझे सबकुछ पढ़ना पड़ा। यह जरूरी भी है। देश ही नहीं, दुनिया की सभी घटनाएं, राजनीतिक व अन्य बातों पर नजर रखी। डेडिकेशन के चलते यह लक्ष्य दूसरी बार में ही हासिल करना आसान रहा। पहला मौका चूकने के बाद परीक्षा की तैयारी में किसी तरह की कसर नहीं छोड़ी। पिता सूबेदार जगह सिंह सांगवान सेना से सेवानिवृत्त हैं। मां कांता सांगवान सेवानिवृत्त शिक्षिका हैं। चार भाई बहनों में वह सबसे छोटे हैं। दो बहनें शिक्षिका हैं। जुड़वां बड़ा भाई निजी बैंक में है। इस उपलब्धि से परिवार में खुशी का माहौल है।
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लोगों को अच्छी शिक्षा व स्वास्थ्य मुहैया कराने के लिए बनाऊंगा बेहतर पॉलिसी : विकास
कॉर्पोरेट सेक्टर में सात काम करके देख लिया, अब प्रशासनिक सेवाओं को सुधारने का रहेगा प्रयास
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
समाज को लाभ हो इस सोच के साथ प्रशासनिक सेवा की ओर बढ़ा हूं। स्वास्थ्य व शिक्षा की खासकर बच्चियों को बेहतर सुविधा मिले। इसके लिए बेहतर पॉलिसी तैयार करने का प्रयास रहेगा। यह सोच है यूपीएससी परीक्षा में 123वां रैंक हासिल करने वाले शहर के बेटे विकास सांगवान का। मूलरूप से मुरादपुर टेकना हाल किशनपुरा निवासी विकास ने अमर उजाला से हुई बातचीत में अपनी सोच व लक्ष्य साझा किया।
उन्होंने कहा कि एआईटी पुणे से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद सात साल कॉर्पोरेट सेक्टर में काम करके देख लिया। पैकेज भी करीब 22 लाख रुपये रहा। अब सोसायटी के लिए कुछ करना है। अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए पिछले करीब डेढ़ साल में दस से बारह घंटे पढ़ाई की। सोशल मीडिया से दूर रहा। इंटरनेट का शिक्षा के लिए उपयोग किया। इस सेवा का सही इस्तेमाल किया जाए तो यह बेहद फायदेमंद है। यही वजह रही कि मुझे यूपीएससी में अच्छा रैंक हासिल करने के लिए कोचिंग की जरूरत नहीं पड़ी। हां, मुझे सबकुछ पढ़ना पड़ा। यह जरूरी भी है। देश ही नहीं, दुनिया की सभी घटनाएं, राजनीतिक व अन्य बातों पर नजर रखी। डेडिकेशन के चलते यह लक्ष्य दूसरी बार में ही हासिल करना आसान रहा। पहला मौका चूकने के बाद परीक्षा की तैयारी में किसी तरह की कसर नहीं छोड़ी। पिता सूबेदार जगह सिंह सांगवान सेना से सेवानिवृत्त हैं। मां कांता सांगवान सेवानिवृत्त शिक्षिका हैं। चार भाई बहनों में वह सबसे छोटे हैं। दो बहनें शिक्षिका हैं। जुड़वां बड़ा भाई निजी बैंक में है। इस उपलब्धि से परिवार में खुशी का माहौल है।
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