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प्रदूषण रोकने को लेकर गंभीर नहीं अधिकारी
Updated Mon, 13 Nov 2017 02:26 AM IST
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फ्लैग : प्रदूषण रोकने को लेकर गंभीर नहीं प्रशासन
हेडिंग : सरेआम चल रहे शहर में तंदूर, चेतावनी नोटिस नहीं
: बडे़ होटलों को नोटिस दिए अब तक नगर निगम ने
: डीसी ने तीन दिन पहले लगाया था शहर में होटल व ढाबों पर लकड़ी व कोयले के प्रयोग पर प्रतिबंध
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
एक तरफ जहां रोहतक शहर देश के प्रदूषित शहरों की सूची में ऊपर चढ़ता जा रहा है, दूसरी तरफ जिम्मेदार अधिकारी प्रदूषण रोकने को लेकर खानापूर्ति में जुटे हुए हैं। आलम यह है कि तीन दिन पहले डीसी ने शहर के होटल व ढाबों पर कोयला व लकड़ी के प्रयोग पर रोक लगाई थी। इसके बावजूद सरेआम ढाबों पर लकड़ी व कोयले का प्रयोग किया जा रहा है, जिसे रोकने वाला कोई नहीं है।
प्रदूषण नियंत्रण विभाग के मुताबिक रोहतक शहर की हवा सबसे खराब दौर से गुजर रही है। रविवार शाम चार बजे रोहतक शहर की हवा दिल्ली से भी ज्यादा प्रदूषित थी। एक अनुमान के मुताबिक शहर में 150 के करीब होटल, रेेस्टोरेंट, ढाबे और मैरिज पैलेस हैं। ऊंच श्रेणी के होटल व रेस्टोरेंट में तो खाना बनाने के लिए गैस का प्रयोग किया जा रहा है, लेकिन सड़कों किनारे जगह-जगह खुले ढाबों व होटलों के अंदर अब भी लकड़ी और कोयले का प्रयोग किया जा रहा है। जबकि तीन दिन पहले डीसी की तरफ से लकड़ी व कोयले के प्रयोग पर रोक लगा दी गई थी। समय रहते अगर विभाग नहीं जागा तो लोगों को इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
चेतावनी नोटिस दिए, कार्रवाई अब तक नहीं
निगम की ओर से अब तक 30 से ज्यादा बड़े-बड़े होटल की जांच पड़ताल करके चेतावनी नोटिस दिए गए हैं, लेकिन कार्रवाई किसी के खिलाफ नहीं की गई है। जहां पर लकड़ी और कोयले का प्रयोग किया जा रहा है, वहां पर तक नोटिस तक नहीं दिए गए हैं। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रशासन प्रदूषण रोकने के लिए कितना गंभीर है।
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वर्जन
बड़े होटल में जाकर न केवल जांच की, बल्कि नोटिस भी दिए हैं। शहर के अंदर ढाबों व रेस्टोरेंट की सोमवार को जांच पड़ताल की जाएगी। जहां लकड़ी व कोयला चलता मिला, वहां सख्त कार्रवाई होगी।
हरीश दुग्गल, जोन टैक्स आफिसर नगर निगम
वाहन बिगड़ा रहे शहर की हवा
शहर के बाहरी एरिया की बजाय उस एरिया में ज्यादा प्रदूषण है, जहां वाहनों की आवाजाही ज्यादा है। पुराने बस स्टैंड से लेकर दिल्ली बाईपास तक हवा में ज्यादा धुआं है। क्योंकि दिनभर ऑटो, कार, दुपहिया वाहन हवा में कार्बन डाई आक्साइड छोड़ रहे हैं। प्रदूषण नियमों का पालन न करने वाले वाहन मालिकों के खिलाफ पुलिस प्रशासन भी खास कार्रवाई नहीं कर रहा है।
वर्जन
प्रदूषण का स्तर शहर में बढ़ा है। प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही ट्रैफिक पुलिस ने प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के कितने चालान काटे गए, इसकी विशेष तौर पर रिपोर्ट ली जा रही है।
-पंकज नैन, पुलिस अधीक्षक
लाहली और आईएमटी में चल रहे मिक्सर प्लांट को बंद करवा दिया गया है। साथ ही सिटी एरिया में चल रहे सड़क निर्माण कार्य रुकवा दिए गए हैं। भवन निर्माण को निगम की तरफ से रुकवाया जा रहा है। प्रदूषण का स्तर कम करने के लिए सख्ती से कदम उठाए जा रहे हैं।
-गुलाब सिंह, तहसीलदार
किसान ही नही औद्योगिक इकाईयां भी जिमेंदार है स्माग के लिये
सांपला: पिछले कई दिनों से आये मौसम के बदलाव ने लोगों की दिनचर्या पूरी तरफ बदलकर रख दी है। लोगों का घर से बाहर निकला भी कठीन हो रहा । स्माग की घनी चादर के कारण विजिबिलिटी बहुत कम नजर आ रही है। क्षेत्र में औद्योगिक युनिट ज्यादा होने व स्माग की चादर के चलते लोगों को सांस लेना भी मुश्किल हो रहा था। लोग घरों से बाहर निकलते समय मास्क या रूमाल नाक के सामने बांधकर निकल रहे है। घर से बाहर निकलते ही आंखों में जलन होने लग जाती है। जिसके चलते सुबह सेर पर निकलने वाले लोग भी घरों में ही दुबके रहे । कहा जा रहा है कि यदि हवा का बहाव तेज नहीं हुआ तो कुछ दिनों इसी भीषण प्रदूषण की मार झेलनी पड़ सकती है। इस प्रदूषण का मुख्य कारण लगातार फैल रहा स्माग,धूल,हयूमिडिटी ज्यादा होने और हवा का बहाव कम होने के चलते एयर क्वालिटी खराब हुई है। इसके चलते दिल के रोगी और अस्थमा के मरीजों का सांस लेने में ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार की काफी कोशिश करने के बाद भी स्माग का कहर जारी है। निजी और सरकारी हस्पतालों में मरीजों की तादात लगातार बढ़ रही है। जहां किसान पराली जलाने से नही थम रहे वही क्षेत्र में छोटे बड़े 400के करीब ओैद्योगिक इकाई है। इनसे निकले वाला धुआ भी क्षेत्र की हवा को जहरीला बना रहा है। ये औद्योगिक इकाईयां भी नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा जहर घोलने का काम कर रहे है।
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फ्लैग : प्रदूषण रोकने को लेकर गंभीर नहीं प्रशासन
हेडिंग : सरेआम चल रहे शहर में तंदूर, चेतावनी नोटिस नहीं
: बडे़ होटलों को नोटिस दिए अब तक नगर निगम ने
: डीसी ने तीन दिन पहले लगाया था शहर में होटल व ढाबों पर लकड़ी व कोयले के प्रयोग पर प्रतिबंध
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
एक तरफ जहां रोहतक शहर देश के प्रदूषित शहरों की सूची में ऊपर चढ़ता जा रहा है, दूसरी तरफ जिम्मेदार अधिकारी प्रदूषण रोकने को लेकर खानापूर्ति में जुटे हुए हैं। आलम यह है कि तीन दिन पहले डीसी ने शहर के होटल व ढाबों पर कोयला व लकड़ी के प्रयोग पर रोक लगाई थी। इसके बावजूद सरेआम ढाबों पर लकड़ी व कोयले का प्रयोग किया जा रहा है, जिसे रोकने वाला कोई नहीं है।
प्रदूषण नियंत्रण विभाग के मुताबिक रोहतक शहर की हवा सबसे खराब दौर से गुजर रही है। रविवार शाम चार बजे रोहतक शहर की हवा दिल्ली से भी ज्यादा प्रदूषित थी। एक अनुमान के मुताबिक शहर में 150 के करीब होटल, रेेस्टोरेंट, ढाबे और मैरिज पैलेस हैं। ऊंच श्रेणी के होटल व रेस्टोरेंट में तो खाना बनाने के लिए गैस का प्रयोग किया जा रहा है, लेकिन सड़कों किनारे जगह-जगह खुले ढाबों व होटलों के अंदर अब भी लकड़ी और कोयले का प्रयोग किया जा रहा है। जबकि तीन दिन पहले डीसी की तरफ से लकड़ी व कोयले के प्रयोग पर रोक लगा दी गई थी। समय रहते अगर विभाग नहीं जागा तो लोगों को इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
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चेतावनी नोटिस दिए, कार्रवाई अब तक नहीं
निगम की ओर से अब तक 30 से ज्यादा बड़े-बड़े होटल की जांच पड़ताल करके चेतावनी नोटिस दिए गए हैं, लेकिन कार्रवाई किसी के खिलाफ नहीं की गई है। जहां पर लकड़ी और कोयले का प्रयोग किया जा रहा है, वहां पर तक नोटिस तक नहीं दिए गए हैं। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रशासन प्रदूषण रोकने के लिए कितना गंभीर है।
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बड़े होटल में जाकर न केवल जांच की, बल्कि नोटिस भी दिए हैं। शहर के अंदर ढाबों व रेस्टोरेंट की सोमवार को जांच पड़ताल की जाएगी। जहां लकड़ी व कोयला चलता मिला, वहां सख्त कार्रवाई होगी।
हरीश दुग्गल, जोन टैक्स आफिसर नगर निगम
वाहन बिगड़ा रहे शहर की हवा
शहर के बाहरी एरिया की बजाय उस एरिया में ज्यादा प्रदूषण है, जहां वाहनों की आवाजाही ज्यादा है। पुराने बस स्टैंड से लेकर दिल्ली बाईपास तक हवा में ज्यादा धुआं है। क्योंकि दिनभर ऑटो, कार, दुपहिया वाहन हवा में कार्बन डाई आक्साइड छोड़ रहे हैं। प्रदूषण नियमों का पालन न करने वाले वाहन मालिकों के खिलाफ पुलिस प्रशासन भी खास कार्रवाई नहीं कर रहा है।
वर्जन
प्रदूषण का स्तर शहर में बढ़ा है। प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही ट्रैफिक पुलिस ने प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के कितने चालान काटे गए, इसकी विशेष तौर पर रिपोर्ट ली जा रही है।
-पंकज नैन, पुलिस अधीक्षक
लाहली और आईएमटी में चल रहे मिक्सर प्लांट को बंद करवा दिया गया है। साथ ही सिटी एरिया में चल रहे सड़क निर्माण कार्य रुकवा दिए गए हैं। भवन निर्माण को निगम की तरफ से रुकवाया जा रहा है। प्रदूषण का स्तर कम करने के लिए सख्ती से कदम उठाए जा रहे हैं।
-गुलाब सिंह, तहसीलदार
किसान ही नही औद्योगिक इकाईयां भी जिमेंदार है स्माग के लिये
सांपला: पिछले कई दिनों से आये मौसम के बदलाव ने लोगों की दिनचर्या पूरी तरफ बदलकर रख दी है। लोगों का घर से बाहर निकला भी कठीन हो रहा । स्माग की घनी चादर के कारण विजिबिलिटी बहुत कम नजर आ रही है। क्षेत्र में औद्योगिक युनिट ज्यादा होने व स्माग की चादर के चलते लोगों को सांस लेना भी मुश्किल हो रहा था। लोग घरों से बाहर निकलते समय मास्क या रूमाल नाक के सामने बांधकर निकल रहे है। घर से बाहर निकलते ही आंखों में जलन होने लग जाती है। जिसके चलते सुबह सेर पर निकलने वाले लोग भी घरों में ही दुबके रहे । कहा जा रहा है कि यदि हवा का बहाव तेज नहीं हुआ तो कुछ दिनों इसी भीषण प्रदूषण की मार झेलनी पड़ सकती है। इस प्रदूषण का मुख्य कारण लगातार फैल रहा स्माग,धूल,हयूमिडिटी ज्यादा होने और हवा का बहाव कम होने के चलते एयर क्वालिटी खराब हुई है। इसके चलते दिल के रोगी और अस्थमा के मरीजों का सांस लेने में ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार की काफी कोशिश करने के बाद भी स्माग का कहर जारी है। निजी और सरकारी हस्पतालों में मरीजों की तादात लगातार बढ़ रही है। जहां किसान पराली जलाने से नही थम रहे वही क्षेत्र में छोटे बड़े 400के करीब ओैद्योगिक इकाई है। इनसे निकले वाला धुआ भी क्षेत्र की हवा को जहरीला बना रहा है। ये औद्योगिक इकाईयां भी नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा जहर घोलने का काम कर रहे है।