{"_id":"597e1ef04f1c1b5c7d8b4903","slug":"181501437680-rohtak-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जहां सबसे ज्यादा जरूरत वहां नहीं हो रही फॉगिंग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जहां सबसे ज्यादा जरूरत वहां नहीं हो रही फॉगिंग
Updated Sun, 30 Jul 2017 11:31 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
देरी से ही सही, नगर परिषद ने शहर में फॉगिंग तो शुरू कर दी। लेकिन विभाग की व्यवस्था ऐसी है कि शहर की करीब आधी आबादी एक लाख तक इसका लाभ नहीं मिल रहा है। कारण- विभाग ने जिस आटो में फॉगिंग मशीन सेट कर रखी है वह ऑटो संकरी गलियों में नहीं जा पा रहा है। रेवाड़ी शहर में अधिकतर संकरी गलियां है ऐसे में शहर की आधी आबादी यानि करीब एक लाख लोग फॉगिंग से महरूम रहेंगे। बरसात के दिनों में डेंगू, चिकनगूनिया एवं मलेरिया जैसी मच्छर जनित बीमारियों के लिए फॉगिंग वरदान से कम नहीं होती है। फॉगिंग करने से साफ पानी में पनपने वाले लार्वा से लेकर मच्छर स्वयं ही मर जाते हैं। लेकिन शहर में सरकारी सेवाओं की लचर व्यवस्थाओं का यह आलम है कि करीब एक महीने देरी से की गई फॉगिंग की योजना में आधा शहर शामिल नहीं किया गया। जबकि यहां पर फॉगिंग की सर्वाधिक जरूरत थी। ऐसे में करीब एक लाख की इस आबादी के पास राम भरोसे के अलावा कोई विकल्प नहीं है। जुलाई महीने के अंत में स्वास्थ्य विभाग एवं नप की ओर से महज दो-दो बार ही फॉगिंग ही कराई है। ऐसे मेें करीब दो लाख की आबादी को राहत कैसे मिलेगी यह सवाल जिले के प्रशासनिक अधिकारियों के पास भी नहीं होगा। उल्लेखनीय है कि जिले में अभी तक मलेरिया के 6, डेंगू और चिकनगूनिया का एक-एक एवं स्वाइन फ्लू का एक पॉजिटिव केस सामने आ चुका है। बावजूद इसके विभागों की सुस्ती नहीं टूटी है।
संकरी गलियों के लिए नहीं कोई व्यवस्था
शहर में फॉगिंग का जिम्मा नप के साथ स्वास्थ्य विभाग का भी है। दोनों विभागों ने फॉगिंग मशीन को ऑटो में सेट किया है। यह ऑटो शहर की चौड़ी गलियों में जा सकता है। जबकि अधिकतर पुराना शहर संकरी गलियों में ही बसा हुआ है। नप परिषद की ओर से खानापूर्ति के लिए बाजारों एवं सेक्टरों आदि में तो इस ऑटो से फॉगिंग कराई जाती है। लेकिन जरूरतमंद लोगों तक फॉगिंग नहीं पहुंच पा रही है।
आप दिखा रही है आइना
फॉगिंग में देरी एवं खानापूर्ति करने की बात पहली बार सामने नहीं आ रही है। बीते वर्षों में भी व्यवस्था लचर ही रही है। बीते वर्ष आम आदमी पार्टी की ओर से फॉगिंग नहीं करने की शिकायत को लेकर शहर में प्रदर्शन करने के साथ उपायुक्त को ज्ञापन भी दिया था। लेकिन हालात जस के तस हैं। इसके बाद इस वर्ष आम आदमी पार्टी की ओर से चंदा एकत्रित कर एक फॉगिंग मशीन खरीदी गई। आप कार्यकर्ता इसके माध्यम से शहर की संकरी गलियों में जाकर फॉगिंग कर प्रशासन को आइन दिखाने का काम कर रहे हैं। इतना ही नहीं प्रशासन के पास गांवों के लिए योजना तक नहीं है। जबकि गांवों में यह काम पंचायत के भरोसे छोड़ा गया है। लेकिन प्रशासन के पास मशीन नहीं होने के चलते लोगों को मशीन खरीद का इंतजार करना पड़ रहा है।
विज्ञापन
फॉगिंग कराई जा रही है। बात रही संकरी गलियों की इसके लिए भी जल्द ही व्यवस्था कराई जाएगी। मच्छर जनित बीमारियों से लोगों को बचाने के लिए नप गंभीर है। -मनोज यादव, ईओ, नप, रेवाड़ी।
विज्ञापन
रेवाड़ी।
देरी से ही सही, नगर परिषद ने शहर में फॉगिंग तो शुरू कर दी। लेकिन विभाग की व्यवस्था ऐसी है कि शहर की करीब आधी आबादी एक लाख तक इसका लाभ नहीं मिल रहा है। कारण- विभाग ने जिस आटो में फॉगिंग मशीन सेट कर रखी है वह ऑटो संकरी गलियों में नहीं जा पा रहा है। रेवाड़ी शहर में अधिकतर संकरी गलियां है ऐसे में शहर की आधी आबादी यानि करीब एक लाख लोग फॉगिंग से महरूम रहेंगे। बरसात के दिनों में डेंगू, चिकनगूनिया एवं मलेरिया जैसी मच्छर जनित बीमारियों के लिए फॉगिंग वरदान से कम नहीं होती है। फॉगिंग करने से साफ पानी में पनपने वाले लार्वा से लेकर मच्छर स्वयं ही मर जाते हैं। लेकिन शहर में सरकारी सेवाओं की लचर व्यवस्थाओं का यह आलम है कि करीब एक महीने देरी से की गई फॉगिंग की योजना में आधा शहर शामिल नहीं किया गया। जबकि यहां पर फॉगिंग की सर्वाधिक जरूरत थी। ऐसे में करीब एक लाख की इस आबादी के पास राम भरोसे के अलावा कोई विकल्प नहीं है। जुलाई महीने के अंत में स्वास्थ्य विभाग एवं नप की ओर से महज दो-दो बार ही फॉगिंग ही कराई है। ऐसे मेें करीब दो लाख की आबादी को राहत कैसे मिलेगी यह सवाल जिले के प्रशासनिक अधिकारियों के पास भी नहीं होगा। उल्लेखनीय है कि जिले में अभी तक मलेरिया के 6, डेंगू और चिकनगूनिया का एक-एक एवं स्वाइन फ्लू का एक पॉजिटिव केस सामने आ चुका है। बावजूद इसके विभागों की सुस्ती नहीं टूटी है।
संकरी गलियों के लिए नहीं कोई व्यवस्था
शहर में फॉगिंग का जिम्मा नप के साथ स्वास्थ्य विभाग का भी है। दोनों विभागों ने फॉगिंग मशीन को ऑटो में सेट किया है। यह ऑटो शहर की चौड़ी गलियों में जा सकता है। जबकि अधिकतर पुराना शहर संकरी गलियों में ही बसा हुआ है। नप परिषद की ओर से खानापूर्ति के लिए बाजारों एवं सेक्टरों आदि में तो इस ऑटो से फॉगिंग कराई जाती है। लेकिन जरूरतमंद लोगों तक फॉगिंग नहीं पहुंच पा रही है।
विज्ञापन
आप दिखा रही है आइना
फॉगिंग में देरी एवं खानापूर्ति करने की बात पहली बार सामने नहीं आ रही है। बीते वर्षों में भी व्यवस्था लचर ही रही है। बीते वर्ष आम आदमी पार्टी की ओर से फॉगिंग नहीं करने की शिकायत को लेकर शहर में प्रदर्शन करने के साथ उपायुक्त को ज्ञापन भी दिया था। लेकिन हालात जस के तस हैं। इसके बाद इस वर्ष आम आदमी पार्टी की ओर से चंदा एकत्रित कर एक फॉगिंग मशीन खरीदी गई। आप कार्यकर्ता इसके माध्यम से शहर की संकरी गलियों में जाकर फॉगिंग कर प्रशासन को आइन दिखाने का काम कर रहे हैं। इतना ही नहीं प्रशासन के पास गांवों के लिए योजना तक नहीं है। जबकि गांवों में यह काम पंचायत के भरोसे छोड़ा गया है। लेकिन प्रशासन के पास मशीन नहीं होने के चलते लोगों को मशीन खरीद का इंतजार करना पड़ रहा है।
विज्ञापन
फॉगिंग कराई जा रही है। बात रही संकरी गलियों की इसके लिए भी जल्द ही व्यवस्था कराई जाएगी। मच्छर जनित बीमारियों से लोगों को बचाने के लिए नप गंभीर है। -मनोज यादव, ईओ, नप, रेवाड़ी।