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सिविल अस्पताल में शव को लेकर लापरवाही की जांच शुरू
Updated Sat, 15 Jul 2017 12:31 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
सिविल अस्पताल प्रबंधन ने मोर्चरी में दो दिन डेड बॉडी रखे होने के बावजूद परिजनों तक मेसेज न पहुंचने के मामले में जांच शुरू कर दी है। प्रबंधन ने एमओ, स्टॉफ नर्स, सिक्योरटी गार्ड और चपरासी से शुक्रवार को पूछताछ की और बयान दर्ज किये। स्वास्थ्य मंत्रालय जांच रिपोर्ट तलब की है।
प्रबंधन ने घटना वाले दिन मंगलवार रात ड्यूटी पर रहे डॉक्टर, दो स्टाफ नर्स, सिक्योरिटी गार्ड और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के बयान दर्ज किये। कर्मचारियों ने सिलसिले वार उस रोज एंबुलेंस चालक द्वारा मृतक को पहुंचाने, उसका रुक्का कटने और शव मोर्चरी तक ले जाने के बारे में बताया। एमओ ने रुक्का काटकर पुलिस के कंट्रोल रूम में बताने बारे बताया। एक डॉक्टर जांच में शामिल नहीं हो सका। प्रबंधन उस रोज ड्यूटी पर रहे सभी कर्मचारियों के बयान दर्ज कर जांच रिपोर्ट तैयार कर सीएमओ को सौंपेगा।
अभी जांच रिपोर्ट उन्हें नहीं मिली है। अस्पताल प्रबंधन जल्द जांच पूरी कर रिपोर्ट उनको सौंप देगा और फिर रिपोर्ट स्वास्थ्य मंत्रालय और हेडक्वार्टर को भेज दी जाएगी।
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-डॉ. जेएस ग्रेवाल, सीएमओ, हिसार।
यह है मामला
बरवाला-चंडीगढ मार्ग पर मंगलवार रात को एक हादसे में फतेहाबाद के गांव डांगरा के सतबीर सिंह की मौत हो गई थी। किसी राहगीर ने बुधवार सुबह सिविल अस्पताल में फोन कर वहां अज्ञात शव पड़ा होने की सूचना दी थी। एंबुलेंस चालक शव उठाकर सिविल अस्पताल में लाया था। उसकी जेब में आधार कार्ड मिला था। डॉक्टर ने रुक्का काटकर शव मोर्चरी भिजवा दिया था। रुक्के में यह नहीं लिखा गया कि हादसास्थल कौन सा था। डॉक्टर ने पुलिस के कंट्रोल रूम में शव मिलने की बात कही थी। लेडी पुलिस कर्मी ने हादसास्थल पूछा तो उनको बाद में बताने के लिए कहा। मगर बाद में हादसास्थल नहीं बताया गया। परिजन सोशल मीडिया पर सतबीर का आधार कार्ड देखकर यहां सिविल अस्पताल में पहुंचे थे और शिनाख्त की थी। जब परिजनों ने बवाल काटा तो पीएमओ ने जांच कमेटी बिठा दी थी।
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हिसार।
सिविल अस्पताल प्रबंधन ने मोर्चरी में दो दिन डेड बॉडी रखे होने के बावजूद परिजनों तक मेसेज न पहुंचने के मामले में जांच शुरू कर दी है। प्रबंधन ने एमओ, स्टॉफ नर्स, सिक्योरटी गार्ड और चपरासी से शुक्रवार को पूछताछ की और बयान दर्ज किये। स्वास्थ्य मंत्रालय जांच रिपोर्ट तलब की है।
प्रबंधन ने घटना वाले दिन मंगलवार रात ड्यूटी पर रहे डॉक्टर, दो स्टाफ नर्स, सिक्योरिटी गार्ड और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के बयान दर्ज किये। कर्मचारियों ने सिलसिले वार उस रोज एंबुलेंस चालक द्वारा मृतक को पहुंचाने, उसका रुक्का कटने और शव मोर्चरी तक ले जाने के बारे में बताया। एमओ ने रुक्का काटकर पुलिस के कंट्रोल रूम में बताने बारे बताया। एक डॉक्टर जांच में शामिल नहीं हो सका। प्रबंधन उस रोज ड्यूटी पर रहे सभी कर्मचारियों के बयान दर्ज कर जांच रिपोर्ट तैयार कर सीएमओ को सौंपेगा।
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अभी जांच रिपोर्ट उन्हें नहीं मिली है। अस्पताल प्रबंधन जल्द जांच पूरी कर रिपोर्ट उनको सौंप देगा और फिर रिपोर्ट स्वास्थ्य मंत्रालय और हेडक्वार्टर को भेज दी जाएगी।
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-डॉ. जेएस ग्रेवाल, सीएमओ, हिसार।
यह है मामला
बरवाला-चंडीगढ मार्ग पर मंगलवार रात को एक हादसे में फतेहाबाद के गांव डांगरा के सतबीर सिंह की मौत हो गई थी। किसी राहगीर ने बुधवार सुबह सिविल अस्पताल में फोन कर वहां अज्ञात शव पड़ा होने की सूचना दी थी। एंबुलेंस चालक शव उठाकर सिविल अस्पताल में लाया था। उसकी जेब में आधार कार्ड मिला था। डॉक्टर ने रुक्का काटकर शव मोर्चरी भिजवा दिया था। रुक्के में यह नहीं लिखा गया कि हादसास्थल कौन सा था। डॉक्टर ने पुलिस के कंट्रोल रूम में शव मिलने की बात कही थी। लेडी पुलिस कर्मी ने हादसास्थल पूछा तो उनको बाद में बताने के लिए कहा। मगर बाद में हादसास्थल नहीं बताया गया। परिजन सोशल मीडिया पर सतबीर का आधार कार्ड देखकर यहां सिविल अस्पताल में पहुंचे थे और शिनाख्त की थी। जब परिजनों ने बवाल काटा तो पीएमओ ने जांच कमेटी बिठा दी थी।