{"_id":"5a5fac134f1c1b7b268b4f7f","slug":"171516219411-rohtak-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हरियाणा ही नहीं चंडीगढ़ की टीम में भी खेल रहीं उमरा की बेटियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हरियाणा ही नहीं चंडीगढ़ की टीम में भी खेल रहीं उमरा की बेटियां
Updated Thu, 18 Jan 2018 01:33 AM IST
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संदीप रामायण
हिसार।
हिसार का उमरा गांव हॉकी के लिए विशेष पहचान बना रहा है। इस गांव की करीब 40 बेटियां हॉकी में जिला से लेकर इंटरनेशनल तक की प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले रही हैं। हरियाणा सब जूनियर गर्ल टीम में उपमंडल हांसी के उमरा गांव की तीन बेटियां खेल रही हैं। हिसार में चल रही हॉकी चैंपियनशिप में चंडीगढ़ की टीम में भी उमरा गांव की एक बेटी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर टीम के साथ ही गांव का नाम भी रोशन कर रही हैं।
उमरा गांव की इन तीनों बेटियों ने अपने कॅरिअर की शुुरुआत गांव की गलियों से की थी। कभी गांव की कच्ची गलियों में हॉकी खेलने वाली ये तीनों बेटी हरियाणा हॉकी टीम की शान बन रही हैं। हॉकी खिलाड़ी पूजा, उषा और सीमा हरियाणा की टीम में हैं। प्रदेश का उमरा गांव ऐसा इकलौता गांव है, जिसकी सबसे अधिक खिलाड़ी इस टीम में हैं। इस गांव की खिलाड़ी मोनू मलिक चंडीगढ़ की टीम में हैं। इस गांव की करीब 40 खिलाड़ी जिला स्तर से लेकर इंटरनेशनल स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले रही हैं।
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पूजा को मां ने खेल के मैदान में उतारा
छह साल पहले 2012 में हरियाणा टीम सब जूनियर खिलाड़ी उमरा गांव की पूजा के पिता संजय का लंबी बीमारी के चलते निधन हो गया था। उस समय पूजा सिर्फ आठ साल की थी। किसान की बेटी पूजा को उसकी मां जगवंती देवी ने खेल केे मैदान में उतारा। पूूजा के परिवार में तीन बहन और एक भाई हैं, जो सभी पढ़ रहे हैं। 2017 में गुजरात में हुई खेलो इंडिया हॉकी प्रतियोगिता में हरियाणा की तरफ से खेलते हुए गोल्ड मेेडल जीता था। 2016 में अंडर-14 आयु वर्ग की रोहतक में हुई स्कूली नेशनल प्रतियोगिता में भी गोल्ड मेडल प्राप्त किया। 2017 में सब जूनियर हॉकी राज्य स्तर पर हिसार की तरफ से खेलते हुए गोल्ड मेडल प्राप्त किया था। 2017 में छत्तीसगढ़ में हुई अंडर-14 आयु वर्ग में सिल्वर मेडल जीता था।
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सीमा ने गांव की अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी पूनम मलिक से ली प्रेरणा
सीमा ने अपने कॅरिअर की शुरुआत उमरा की गलियों में खेल कर की। दो साल पहले सीमा के पिता रामकुमार का बीमारी के कारण निधन हो गया था। सीमा सिर्फ 12 साल की थी। सीमा की मां गुड्डी देवी ने अपनी बेटी को खेलों में भेजा। सीमा की छह बहनें और एक भाई हैं। सीमा उमरा गांव की अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी पूनम मलिक को देखकर हॉकी खेलना सीखी। 2017 में गुजरात में हुई खेलो इंडिया हॉकी प्रतियोगिता में हरियाणा की तरफ से खेलते हुए गोल्ड मेेडल जीता था। 2016 में अंडर-14 आयु वर्ग की रोहतक में हुई स्कूली नेशनल प्रतियोगिता में भी गोल्ड मेडल प्राप्त किया था। 2017 में सब जूनियर हॉकी राज्य स्तर पर हिसार की तरफ से खेलते हुए गोल्ड मेडल प्राप्त किया था। 2017 में छत्तीसगढ़ में हुई अंडर 14 आयु वर्ग में सिल्वर मेडल प्राप्त किया था।
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ऊषा : चल रही प्रतियोगिता मेें किए सात गोल
सब जूूनियर हॉकी हरियाणा टीम में खेल रही उमरा की बेटी ऊषा ने अपनी कलाइयों के जादू से अब तक इस प्रतियोगिता मेें सात गोल किए हैं। ऊषा के पिता जयबीर सिंह किसान हैं। ऊषा ने भी अपने कॅरिअर की शुरुआत अपने गांव की गलियों में खेलकर की है। ऊषा ने अपने गांव की अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी पूनम मलिक से प्रेरित होकर हॉकी खेलना शुरू किया। 2017 में गुजरात में हुई खेलो इंडिया हॉकी प्रतियोगिता में हरियाणा की तरफ से खेलते हुए गोल्ड मेेडल प्राप्त किया था। 2017 में सब जूनियर हॉकी राज्य स्तर पर हिसार की तरफ से खेलते हुए गोल्ड मेडल जीता था। 2017 में छत्तीसगढ़ में हुई अंडर-14 आयु वर्ग में सिल्वर मेडल प्राप्त किया था। ऑल इंडिया साई की ओर से खेलते हुए 2016 में गोल्ड मेडल प्राप्त किया।
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उमरा गांव को वर्ल्ड लेवल पर मिली पहचान : कोच आजाद सिंह
हॉकी हरियाणा के कोच आजाद सिंह मलिक ने कहा कि उमरा गांव की पूनम मलिक को वर्ल्ड लेवल पर पहचान मिली है। इसके बाद गांव की काफी बेटियां खेेल के मैदान में आई हैं। गांव के कच्चे मैदान में 80 से अधिक बेटियां हॉकी का अभ्यास करती हैं। इसमें करीब 40 लड़की जिले से लेकर इंटरनेशनल लेवल तक पहचान बना ली है।
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हिसार।
हिसार का उमरा गांव हॉकी के लिए विशेष पहचान बना रहा है। इस गांव की करीब 40 बेटियां हॉकी में जिला से लेकर इंटरनेशनल तक की प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले रही हैं। हरियाणा सब जूनियर गर्ल टीम में उपमंडल हांसी के उमरा गांव की तीन बेटियां खेल रही हैं। हिसार में चल रही हॉकी चैंपियनशिप में चंडीगढ़ की टीम में भी उमरा गांव की एक बेटी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर टीम के साथ ही गांव का नाम भी रोशन कर रही हैं।
उमरा गांव की इन तीनों बेटियों ने अपने कॅरिअर की शुुरुआत गांव की गलियों से की थी। कभी गांव की कच्ची गलियों में हॉकी खेलने वाली ये तीनों बेटी हरियाणा हॉकी टीम की शान बन रही हैं। हॉकी खिलाड़ी पूजा, उषा और सीमा हरियाणा की टीम में हैं। प्रदेश का उमरा गांव ऐसा इकलौता गांव है, जिसकी सबसे अधिक खिलाड़ी इस टीम में हैं। इस गांव की खिलाड़ी मोनू मलिक चंडीगढ़ की टीम में हैं। इस गांव की करीब 40 खिलाड़ी जिला स्तर से लेकर इंटरनेशनल स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले रही हैं।
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पूजा को मां ने खेल के मैदान में उतारा
छह साल पहले 2012 में हरियाणा टीम सब जूनियर खिलाड़ी उमरा गांव की पूजा के पिता संजय का लंबी बीमारी के चलते निधन हो गया था। उस समय पूजा सिर्फ आठ साल की थी। किसान की बेटी पूजा को उसकी मां जगवंती देवी ने खेल केे मैदान में उतारा। पूूजा के परिवार में तीन बहन और एक भाई हैं, जो सभी पढ़ रहे हैं। 2017 में गुजरात में हुई खेलो इंडिया हॉकी प्रतियोगिता में हरियाणा की तरफ से खेलते हुए गोल्ड मेेडल जीता था। 2016 में अंडर-14 आयु वर्ग की रोहतक में हुई स्कूली नेशनल प्रतियोगिता में भी गोल्ड मेडल प्राप्त किया। 2017 में सब जूनियर हॉकी राज्य स्तर पर हिसार की तरफ से खेलते हुए गोल्ड मेडल प्राप्त किया था। 2017 में छत्तीसगढ़ में हुई अंडर-14 आयु वर्ग में सिल्वर मेडल जीता था।
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सीमा ने गांव की अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी पूनम मलिक से ली प्रेरणा
सीमा ने अपने कॅरिअर की शुरुआत उमरा की गलियों में खेल कर की। दो साल पहले सीमा के पिता रामकुमार का बीमारी के कारण निधन हो गया था। सीमा सिर्फ 12 साल की थी। सीमा की मां गुड्डी देवी ने अपनी बेटी को खेलों में भेजा। सीमा की छह बहनें और एक भाई हैं। सीमा उमरा गांव की अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी पूनम मलिक को देखकर हॉकी खेलना सीखी। 2017 में गुजरात में हुई खेलो इंडिया हॉकी प्रतियोगिता में हरियाणा की तरफ से खेलते हुए गोल्ड मेेडल जीता था। 2016 में अंडर-14 आयु वर्ग की रोहतक में हुई स्कूली नेशनल प्रतियोगिता में भी गोल्ड मेडल प्राप्त किया था। 2017 में सब जूनियर हॉकी राज्य स्तर पर हिसार की तरफ से खेलते हुए गोल्ड मेडल प्राप्त किया था। 2017 में छत्तीसगढ़ में हुई अंडर 14 आयु वर्ग में सिल्वर मेडल प्राप्त किया था।
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ऊषा : चल रही प्रतियोगिता मेें किए सात गोल
सब जूूनियर हॉकी हरियाणा टीम में खेल रही उमरा की बेटी ऊषा ने अपनी कलाइयों के जादू से अब तक इस प्रतियोगिता मेें सात गोल किए हैं। ऊषा के पिता जयबीर सिंह किसान हैं। ऊषा ने भी अपने कॅरिअर की शुरुआत अपने गांव की गलियों में खेलकर की है। ऊषा ने अपने गांव की अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी पूनम मलिक से प्रेरित होकर हॉकी खेलना शुरू किया। 2017 में गुजरात में हुई खेलो इंडिया हॉकी प्रतियोगिता में हरियाणा की तरफ से खेलते हुए गोल्ड मेेडल प्राप्त किया था। 2017 में सब जूनियर हॉकी राज्य स्तर पर हिसार की तरफ से खेलते हुए गोल्ड मेडल जीता था। 2017 में छत्तीसगढ़ में हुई अंडर-14 आयु वर्ग में सिल्वर मेडल प्राप्त किया था। ऑल इंडिया साई की ओर से खेलते हुए 2016 में गोल्ड मेडल प्राप्त किया।
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उमरा गांव को वर्ल्ड लेवल पर मिली पहचान : कोच आजाद सिंह
हॉकी हरियाणा के कोच आजाद सिंह मलिक ने कहा कि उमरा गांव की पूनम मलिक को वर्ल्ड लेवल पर पहचान मिली है। इसके बाद गांव की काफी बेटियां खेेल के मैदान में आई हैं। गांव के कच्चे मैदान में 80 से अधिक बेटियां हॉकी का अभ्यास करती हैं। इसमें करीब 40 लड़की जिले से लेकर इंटरनेशनल लेवल तक पहचान बना ली है।