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मरीजों की सुध नहीं सरकार को, स्वास्थ्य विभाग कर रहा सेहत से खिलवाड़
Updated Sun, 06 Aug 2017 02:28 AM IST
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मरीजों की सुध नहीं सरकार को, स्वास्थ्य विभाग कर रहा सेहत से खिलवाड़
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
प्रदेश के सेहत का ख्याल रखने वाली सरकार को मरीजों की सुध नहीं है। स्वास्थ्य विभाग भी सामान्य अस्पताल में पहुंचने वाले मरीजों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहा है। अल्ट्रासाउंड जांच के लिए आने वाले मरीजों को करीब 15 से 20 दिन का समय दिया जा रहा है। वह भी मशीनें अपडेट नहीं हैं। ऐसे में खुद एक्सपर्ट भी इसकी रिपोर्ट पर खास भरोसा नहीं करते हैं। मजबूर मरीजों को पीजीआई या फिर निजी केंद्रों में जाना पड़ रहा है।
सामान्य अस्पताल में एक रेडियोलॉजिस्ट और एक अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट हैं। यहां दो अल्ट्रासाउंड की जांच मशीन भी उपलब्ध है। हालांकि मशीन इतनी पुरानी है, जिससे इसके जांचकर्ता खुद इसकी गुणवत्ता को पुख्ता नहीं मानते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि वर्तमान समय में नई और उच्च तकनीक की जांच मशीनें स्वास्थ्य विभाग में उपलब्ध हैं। यह मशीनें रोहतक के आसपास जिलों में हैं, लेकिन रोहतक के सामान्य अस्पताल में नहीं है। जिन जिलों में यह नई जांच मशीन हैं, वहां जांच करने वाले विशेषज्ञ नहीं हैं। जबकि जिला के सामान्य अस्पताल में हर रोज 70 से 90 अल्ट्रासाउंड जांच की जाती है। कई बार तो मरीजों की संख्या अधिक होने के चलते मरीजों को 15 से 20 दिन की वेटिंग भी दी जाती है। जिला अस्पताल में एक पुराना मॉडल और एक पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड जांच मशीन है।
सीटी स्कैन की डिमांड भी कागजों में अटकी
सूत्रों की मानें तो स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने जिला अस्पताल से उनकी जरूरतों की डिमांड मांगी थी। इसके बाद जिले में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती होने के चलते सीटी स्कैन मशीन लगाने की डिमांड भेजी गई थी। इस पर अधिकारियों द्वारा मामले को फॉलो न किए जाने पर फाइलें अटकी हैं।
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निजी जांच केंद्रों की हो रही मौज
जिला अस्पताल में जांच सुविधा न मिलने के कारण मरीजों के पास निजी जांच केंद्र और पीजीआईएमएस में जांच कराने के लिए जाने का ऑप्शन ही बचता है। सरकारी संस्थान में भीड़ के चलते लंबी लाइन से बचने के लिए मरीज निजी जांच केंद्र में ही जांच कराना पसंद करता है। इसमें मरीजों को जेब ढीली करनी पड़ती है। जिला अस्पताल के डॉक्टरों की मानें तो यदि मशीन लगती है तो मरीजों की समस्या हल होने के साथ पीजीआईएमएस का भी लोड कम होगा। सरकारी संस्थान में और निजी जांच केंद्र की जांच फीस में कई गुना अंतर है।
बोले अधिकारी
सीटी स्कैन के लिए विभाग ने स्पेस और कुछ जानकारी मांगी गई थी, वह भेज दी गई है। इसके अलावा हमारे पास जो अल्ट्रासाउंड की जांच मशीनें हैं, उनमें सभी प्रकार के टेस्ट हो जाते हैं। समय के हिसाब से नई मशीनें भी आएंगी।
- डॉ. रमेशचंद्र, चिकित्सा अधीक्षक एवं एसएमओ, सामान्य अस्पताल
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अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
प्रदेश के सेहत का ख्याल रखने वाली सरकार को मरीजों की सुध नहीं है। स्वास्थ्य विभाग भी सामान्य अस्पताल में पहुंचने वाले मरीजों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहा है। अल्ट्रासाउंड जांच के लिए आने वाले मरीजों को करीब 15 से 20 दिन का समय दिया जा रहा है। वह भी मशीनें अपडेट नहीं हैं। ऐसे में खुद एक्सपर्ट भी इसकी रिपोर्ट पर खास भरोसा नहीं करते हैं। मजबूर मरीजों को पीजीआई या फिर निजी केंद्रों में जाना पड़ रहा है।
सामान्य अस्पताल में एक रेडियोलॉजिस्ट और एक अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट हैं। यहां दो अल्ट्रासाउंड की जांच मशीन भी उपलब्ध है। हालांकि मशीन इतनी पुरानी है, जिससे इसके जांचकर्ता खुद इसकी गुणवत्ता को पुख्ता नहीं मानते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि वर्तमान समय में नई और उच्च तकनीक की जांच मशीनें स्वास्थ्य विभाग में उपलब्ध हैं। यह मशीनें रोहतक के आसपास जिलों में हैं, लेकिन रोहतक के सामान्य अस्पताल में नहीं है। जिन जिलों में यह नई जांच मशीन हैं, वहां जांच करने वाले विशेषज्ञ नहीं हैं। जबकि जिला के सामान्य अस्पताल में हर रोज 70 से 90 अल्ट्रासाउंड जांच की जाती है। कई बार तो मरीजों की संख्या अधिक होने के चलते मरीजों को 15 से 20 दिन की वेटिंग भी दी जाती है। जिला अस्पताल में एक पुराना मॉडल और एक पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड जांच मशीन है।
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सीटी स्कैन की डिमांड भी कागजों में अटकी
सूत्रों की मानें तो स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने जिला अस्पताल से उनकी जरूरतों की डिमांड मांगी थी। इसके बाद जिले में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती होने के चलते सीटी स्कैन मशीन लगाने की डिमांड भेजी गई थी। इस पर अधिकारियों द्वारा मामले को फॉलो न किए जाने पर फाइलें अटकी हैं।
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निजी जांच केंद्रों की हो रही मौज
जिला अस्पताल में जांच सुविधा न मिलने के कारण मरीजों के पास निजी जांच केंद्र और पीजीआईएमएस में जांच कराने के लिए जाने का ऑप्शन ही बचता है। सरकारी संस्थान में भीड़ के चलते लंबी लाइन से बचने के लिए मरीज निजी जांच केंद्र में ही जांच कराना पसंद करता है। इसमें मरीजों को जेब ढीली करनी पड़ती है। जिला अस्पताल के डॉक्टरों की मानें तो यदि मशीन लगती है तो मरीजों की समस्या हल होने के साथ पीजीआईएमएस का भी लोड कम होगा। सरकारी संस्थान में और निजी जांच केंद्र की जांच फीस में कई गुना अंतर है।
बोले अधिकारी
सीटी स्कैन के लिए विभाग ने स्पेस और कुछ जानकारी मांगी गई थी, वह भेज दी गई है। इसके अलावा हमारे पास जो अल्ट्रासाउंड की जांच मशीनें हैं, उनमें सभी प्रकार के टेस्ट हो जाते हैं। समय के हिसाब से नई मशीनें भी आएंगी।
- डॉ. रमेशचंद्र, चिकित्सा अधीक्षक एवं एसएमओ, सामान्य अस्पताल