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महम के सिविल अस्पताल में बने 17 हजार गोल्डन कार्ड, एक भी मरीज को नहीं मिला लाभ

Thu, 19 Sep 2019 02:03 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 19 Sep 2019 02:03 AM IST
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17 thousand golden cards made in civil hospital of Maham, not a single patient got benefit
आयुष्मान भारत योजना के तहत सिविल अस्पताल महम ने एक साल में 17 हजार गोल्डन कार्ड बनाया है। इसके तहत लाभ पात्रों को केंद्र सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलेगा। हालांकि, अक्तूबर 2018 से शुरू हुई योजना का लाभ महम सिविल अस्पताल से किसी मरीज को एक साल के अंदर नहीं मिला है। यहां का आयुष्मान केंद्र महज गोल्डन कार्ड बनाने के लिए रह गया है।
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जिला अस्पताल में प्रवेश करते ही मुख्य दरवाजे के पास आयुष्मान भारत का अलग से केबिन बनाया गया है। यहां सर्वे के बाद सरकार की ओर से जारी पत्र को दिखा कर लाभ पात्र अपना गोल्डन कार्ड बनवा रहे हैं। अस्पताल के अंदर गोल्डन कार्ड बना रहे आयुष्मान मित्र नीरज ने बताया कि एक साल के अंदर वह महम में 17 हजार के करीब पात्र लोगों के गोल्डन कार्ड बना चुके हैं। शुरुआत में काफी भीड़ थी, लेकिन अब संख्या कम हो गई है। पात्र व्यक्ति से सरकार की ओर से जारी पत्र, आधार कार्ड, राशन कार्ड लाना पड़ता है। बॉयोमेट्रिक मशीन से संबंधित व्यक्ति के फिंगर प्रिंट लेने के दो तीन दिन बाद उसे गोल्डन कार्ड दे दिया जाता है। गांवों में खोले गए अटल सेवा केंद्रों से भी लाभ पात्रों के गोल्डन कार्ड बनवाए जा सकते हैं।
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कब हुआ सर्वे पता नहीं, अस्पताल में हैंग रहती है साइट
महम निवासियों ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के लिए लाभ पात्रों का सर्वे कब हुआ और किसने किया पता ही नहीं है। स्थानीय निवासी राजवंती, सतबीर, समुंद्र ने बताया कि वे आर्थिक रूप से कमजोर हैं, लेकिन उनका नाम सूची में नहीं है। सरिता व रोशनी ने बताया कि वे अस्पताल में कार्ड बनवाने दोबारा आई हैं। कई बार तो साइट ही नहीं चलती। कई बार तो कार्ड बनाने वाले ही सीट पर नहीं मिलते। सुंदर ने अपना दर्द बताया कि वह कई बार अस्पताल आया, लेकिन साइट पर नाम ही नहीं मिलता है। सरकार को एक बार फिर से सर्वे करवाना चाहिए। क्योंकि अनेक पात्र लोग इस योजना से अभी भी वंचित हैं।
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तीन माह में पता नहीं चल रहा कि लाभ पात्र हूं या नहीं
किशनगढ़ महम निवासी सूरजभान ने आयुष्मान भारत योजना के तहत महम सिविल अस्पताल में संचालित हो रहे सेंटर के प्रति रोष जताया है। शिकायतकर्ता ने बताया कि वह 72 साल की आयु में सेंटर का तीन माह से चक्कर काट रहे हैं। यहां तैनात कर्मचारी उन्हें यह तक बताने को तैयार नहीं है कि उनका नाम सूची में हैं या नहीं। अस्पताल आने पर बताया जाता है कि काउंटर पर लड़का बैठता है, जबकि वह मौके पर मिलता ही नहीं है।

महम की समस्या को लेकर वहां तैनात आयुष्मान मित्र से बात करेंगे। साइट पर कभी-कभार समस्या हो सकती है। लेकिन तीन माह से साइट हैंग होने की कोई सूचना नहीं है। जिसका नाम सूची में नहीं होता तो आयुष्मान मित्र कुछ नहीं कर सकता। काउंटर पर सिर्फ उन्हीं का गोल्डन कार्ड बनेगा जो सूची में दर्ज होगा।
- शबनम, जिला आईटी मैनेजर, आयुष्मान भारत योजना
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