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सियासत शहर की

Sat, 16 Feb 2019 02:46 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 16 Feb 2019 02:46 AM IST
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सियासत शहर की
सियासत शहर की :
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फ्लैग : निगम हाउस में भाजपा और कांग्रेस के बीच चौधर के लिए होगी जोर आजमाइश
हेडिंग : सीनियर डिप्टी मेयर व डिप्टी मेयर का 26 फरवरी से पहले होगा चयन
: डेढ़ माह पहले जारी हुआ था निगम पार्षदों को शपथ दिलाने के लिए नोटिफिकेशन
: हाउस में भाजपा का बहुमत, कांग्रेसियों को क्रॉस वोटिंग पर विश्वास
: कांग्रेसी बोले, हाथ उठवाने की जगह वोटिंग कराएं आयुक्त, नहीं तो करेंगे विरोध
: छुट्टी के दिन आज निगम कार्यालय में आएंगे आयुक्त, मेयर बोले सोमवार को करूंगा बातचीत
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। नगर निगम हाउस में भाजपा व कांग्रेस पार्षदों के बीच चौधर की लड़ाई फरवरी माह के आखिरी सप्ताह में देखने को मिल सकती है। क्योंकि निगम एक्ट के तहत पार्षदों को शपथ दिलाने का नोटिफिकेशन जारी होने के दो माह के अंदर हाउस का गठन अनिवार्य है, लेकिन अब तक निगम के सीनियर डिप्टी मेयर व डिप्टी मेयर का चयन नहीं हो सका है। मेयर मनमोहन गोयल निगम आयुक्त से इस संबंध में बातचीत कर चुके हैं। आयुक्त शनिवार को रोहतक आ रहे हैं, लेकिन मेयर सोमवार को कार्यदिवस के चलते बैठक की तिथि तय करने के लिए आयुक्त से बातचीत करेंगे।
2013 में नगर निगम में कांग्रेस का दबदबा था। 20 में से 13 पार्षद जीतकर हाउस में पहुंचे थे, लेकिन 2018 के निगम चुनाव में हालात बदल गए। भाजपा प्रत्याशी मनमोहन गोयल ने न केवल मेयर का चुनाव जीता, बल्कि 22 में से आठ वार्डों में भाजपा जीतने में कामयाब रही। जबकि कांग्रेस के तीन पुराने पार्षद गुलशन, अनिल व मंजू ही जीतकर नए हाउस में पहुंच सके। हालांकि, वार्ड 1 के पार्षद कृष्ण सहारावत व वार्ड 18 की महिला पार्षद दीपिका नारा को भी कांग्रेसी माना जाता है। वार्ड नंबर 09 से जयभगवान ठेकेदार व वार्ड 11 के पार्षद कदम सिंह अहलावत भी कांग्रेसियों के साथ नजर आते हैं। जबकि हाउस में भाजपा पार्षदों की संख्या 8 से बढ़कर 13 हो चुकी हैं। क्योंकि वार्ड 2 से सुमन सैनी, 4 से धर्मेंद्र गुलिया, 5 से गीता रानी, 8 से सुनील कुमार व 22 से संतोष देवी भाजपा में शामिल हो चुकी हैं। वहीं, निर्दलीय वार्ड नंबर 7 से पार्षद एडवोकेट मनोज सैनी व 10 से पार्षद राहुल देशवाल ने अभी तक खुलकर स्थिति स्पष्ट नहीं की है कि वे सत्ताधारी भाजपा के साथ हैं या कांग्रेस के नजदीक हैं।
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लोकसभा चुनाव तक चयन टालने की जुगत में जुटे सत्ता के करीबी अधिकारी
भाजपा थिंक टैंक सीनियर डिप्टी मेयर व डिप्टी मेयर के चयन को लेकर असमंजस की स्थिति में है। निगम एक्ट के तहत नोटिफिकेशन के दो माह के अंदर पूरे हाउस का चयन अनिवार्य है। अब सरकार के चहेते अधिकारी इस जुगाड़ में व्यस्त हैं कि कौन से नियम के तहत चुनाव को टाला जाए। ताकि किसी भी पार्षद की नाराजगी लोकसभा चुनाव में न झेलनी पड़े।
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खुराना, सहगल व पप्पन में से किसी को भी नाराज नहीं करना चाहेगी भाजपा
भाजपा में वार्ड 13 की महिला पार्षद कंचन खुराना भी सीनियर डिप्टी मेयर की अहम दावेदार हैं, क्योंकि लगातार तीन बार वार्ड से खुराना परिवार चुनाव जीत चुका है। कंचन से पहले उनके पति अशोक खुराना निगम पार्षद थे। वहीं, कभी मेयर का टिकट मांगने वाले राजकमल सहगल भी सीनियर डिप्टी मेयर की दौड़ में हैं। बाद में वे किसी तरह वार्ड नंबर 17 से पार्षद का चुनाव लड़ने के लिए माने थे। सहगल को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा। दूसरा, खुराना परिवार लगातार पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के एरिया में जीत हासिल कर रहा है। वहीं, तीसरे दावेदार वार्ड 4 के पार्षद धर्मेंद्र गुलिया उर्फ पप्पन को माना जाता है। वे खुद को सीनियर डिप्टी या डिप्टी मेयर मानकर चल रहे हैं।
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धक्काशाही नहीं की तो चौंकाने होंगे परिणाम
नगर निगम हाउस में चाहे भाजपा बहुमत का दावा करे, लेकिन आधे से ज्यादा पार्षद हाउस में ऐसे हैं, जो कभी न कभी कांग्रेस से जुड़े रहे हैं। सत्ता के दबाव में चाहे वे खुलकर सामने नहीं आ रहे, लेकिन अंदरखाते उनका दिल कांग्रेस के लिए ही धड़कता है। अगर सरकार ने धक्काशाही नहीं की और निष्पक्षता से चुनाव करवाए तो परिणाम चौंकाने वाले होंगे।
-अनिल कुमार, कांग्रेसी पार्षद वार्ड नंबर 21
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कांग्रेसी गलतफहमी में जी रहे हैं। हाउस में भाजपा के पास बहुमत से भी ज्यादा पार्षद हैं। पांच पार्षदों के सहारे कांग्रेस सीनियर या डिप्टी मेयर की कुर्सी पाने की हसरत छोड़ दे। पहले पांच निगमों और फिर जींद उप चुनाव में कांग्रेस हकीकत देख चुकी है।

-कंचन खुराना, भाजपा पार्षद वार्ड नंबर 13
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निगम आयुक्त को 15 फरवरी को ऑफिस आना था, लेकिन जरूरी मीटिंग के चलते वे शुक्रवार को नहीं आ सके। अब सोमवार को उनसे हाउस की मीटिंग बुलाने के लिए बातचीत करेेंगे। पार्षद सीनियर डिप्टी मेयर व डिप्टी मेयर के चयन की मांग कर रहे हैं।
-मनमोहन गोयल, मेयर नगर निगम
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