नवजात को ले जा रही महिला को महिलाओं को गार्डों ने संदेह के आधार पर रोका

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Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 26 May 2019 01:55 AM IST

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रोहतक। पीजीआई से नवजात को बाहर ले जा रहीं दो महिलाओं को शनिवार को संस्थान की एक महिला सुरक्षा गार्ड ने संदेह के आधार पर रोक लिया। गार्ड ने महिलाओं से उनका व नवजात का कोई भी पहचान पत्र दिखाने को कहा, लेकिन वह नहीं दिखा सकीं। इसके बाद दोनों को रोक लिया गया। हालांकि, इस बात की संस्थान में किसी ने पुष्टि नहीं की और इसे अफवाह बताया गया।
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शनिवार को संस्थान से एक नवजात को बाहर ले जा रहीं दो महिलाओं से पूछताछ का मामला सुर्खियों में रहा। सूत्रों की मानें तो एक महिला सुरक्षा गार्ड ने अज्ञात महिलाओं को नवजात शिशु के साथ रोक लिया। जब महिलाओं से उनका स्वयं का व बच्चे से जुड़ा कोई पहचान पत्र मांगा गया तो वह दिखा नहीं सकी। बताया जा रहा है कि इसके बाद महिला सुरक्षा गार्ड का शक और बढ़ गया और पूरा रिकार्ड मांगा गया। वहीं सूचना मिलने पर मुख्य सुरक्षा अधिकारी ईश्वर शर्मा मौके पर पहुंच गए और उन्होंने सुपरवाइजर सहित सभी सुरक्षा गार्डों से पूछताछ की। अधिकारी ने बताया कि उन्हें ऐसे किसी मामले की सूचना नहीं मिल रही है। सुरक्षा कर्मचारी ने बताया कि एमसीएच से बच्चा बाहर ले जाते समय आधार कार्ड, बच्चे की फाइल का सीआर नंबर दिखाना जरूरी होता है। बताया जा रहा है कि दोनों महिलाएं झज्जर जिले की हैं।


डेढ़ साल पहले चोरी हो चुका है नवजात
वार्ड दो के लेबर रूम से 10 सितंबर 2017 को एक बच्चा चोरी हो गया था। वह बच्चा आज तक नहीं मिला। डेढ़ साल से अधिक समय बीतने के बाद नौ मई 2019 को इस केस की जिला न्यायालय में पहली बार सुनवाई हुई है। इसमें पीड़ित पक्ष का बयान कोर्ट में दर्ज किया गया है। इस केस में संस्थान ने गुम हुए बच्चे की मां को ठेके पर नौकरी दी है। लापता बच्चे के चाचा पवन किला रोड डोली मार्केट प्रधान ने बताया कि पुलिस की जांच बहुत धीरे चल रही है। इस केस में अगली सुनवाई सात अगस्त 2019 को होनी है।

लेबर रूम के बाहर गार्डों ने एक महिला की मानसिक स्थिति पर उठाया सवाल
लेबर रूम के बाहर महिला सुरक्षा गार्डों ने सवाल उठाते हुए कहा कि गैलरी में एक मानसिक विक्षिप्त महिला है। वह अपने बच्चे को ही कभी भी फेंक देती है। इससे उन्हें डर लगा रहता है कि यदि बच्चे को कुछ होता है तो उनके लिए मुसीबत खड़ी हो जाएगी। इस पर सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि डॉक्टर से बात कर महिला को छुट्टी दिला दी जाए या उसे मानसिक चिकित्सा संस्थान में भेजा जाए। हालांकि, महिला के पति ने ऐसी किसी भी बात से इनकार किया है।

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