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इंजीनियर व ग्रेजुएट कर रहे जैविक खेती, हर साल 50 लाख तक कमा रहे, अवार्ड भी खूब जीते

Sun, 17 Feb 2019 12:40 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 17 Feb 2019 12:40 AM IST
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इंजीनियर व ग्रेजुएट कर रहे जैविक खेती, हर साल 50 लाख तक कमा रहे, अवार्ड भी खूब जीते
इंजीनियर और ग्रेजुएट कर रहे जैविक खेती, हर साल 50 लाख तक कमा रहे, अवार्ड भी खूब जीते
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अंकित चौहान/दलबीर राठी
गन्नौर/सोनीपत। युवा पढ़ाई करके जहां नौकरी के लिए दौड़ लगा रहे हैं, वहीं प्रदेश के कुछ ऐसे युवा हैं जो इंजीनियरिंग व ग्रेजुएशन करके खेती की ओर रुख कर गए। इन युवाओं ने खेती भी जैविक शुरू की और इस खेती के सहारे ही 50 लाख रुपये सालाना तक की आमदनी कर रहे हैं। वह खेती के सहारे ही कई अवार्ड जीत चुके हैं। सोनीपत, कुरुक्षेत्र, पानीपत समेत अन्य कई जिलों के युवा किसान खेती करके खूब मुनाफा ले रहे हैं तो अशिक्षित युवा भी खेती करके लाखों की कमाई कर रहे हैं।
सोनीपत के खुबडू गांव के बिजेंद्र धनखड़ ने बीए करने के बाद नौकरी की तलाश में कई साल बिता दिए। लेकिन नौकरी नहीं मिलने पर बिजेंद्र ने वर्ष 1990 में 15 हजार रुपये की लागत से एक फार्म में मशरूम की खेती शुरू की। इस समय वह 100 फार्म बनाकर मशरूम की खेती कर रहे हैं और हर साल 40-50 लाख रुपये की आमदनी ले रहे हैं। वर्ष 2009 में बिजेंद्र को मशरूम उत्पादन में नेशनल अवार्ड मिला, 2012 में कृषि कर्मिक अवार्ड, 2013 में एचएयू अवार्ड, 2015 में कृषि रत्न अवार्ड मिला। पानीपत के गांव धर्मगढ़ निवासी जितेंद्र मान ने बीटेक करने के बाद नौकरी के लिए हाथपांव मारे, लेकिन नौकरी नहीं मिलने पर पॉली हाउस शुरू किया और उसमें पूरी तरह से आर्गेनिक फसल तैयार की। जिसकी मांग पूरे देश में बढ़ती चली गई और उनके पॉली हाउस में चीकू, शिमला मिर्च, स्ट्राबेरी की खेती होती है। इससे वह 8-10 लाख सालाना कमा रहे हैं। कुरुक्षेत्र के लाडवा के रहने वाले अनिल कंबोज ज्यादा पढ़ाई नहीं करने के कारण खेती की ओर रुख कर गए। वह किसानों को पौध तैयार करके देते हैं। अनिल ने ग्रीन बायोटेक फार्म बना रखा है और हरियाणा व यूपी के किसानों को पौध तैयार करके देते हैं। जिससे उसकी 20-30 लाख रुपये की सालाना आमदनी हो जाती है। सोनीपत के रविंद्र दहिया ने बीए करने के बाद नौकरी करनी चाही, लेकिन नौकरी नहीं मिलने पर फूलों की खेती करने लगा। वह झुंडपुर व मुरथल में 15 एकड़ में फूलों की खेती करता है और उससे 5-6 लाख रुपये प्रति एकड़ तक एक सीजन में कमाई करता है। पानीपत के ताजपुर के रहने वाले महाल सिंह ने फौज से सेवानिवृत्त होने के बाद जैविक खेती करनी शुरू कर दी। पहली बार में फसल नहीं हुई तो लोगों ने ताना मारना शुरू कर दिया कि उससे खेती नहीं होगी। लेकिन दोबारा प्रयास करने पर अच्छी फसल हुई और उसने ईख की फसल को उद्योग के साथ जोड़ दिया। उसने अपने गन्ने से अपने ही कोल्हू में गुड़, खांड़, शक्कर बनाकर सप्लाई शुरू कर दी। जिसको दुबई, नाइजीरिया, अमेरिका व थाइलैंड तक सप्लाई करते हैं।
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आज राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद आएंगे
गन्नौर की अंतरराष्ट्रीय बागवानी मंडी में चल रही एग्री लीडरशिप समिट का रविवार को समापन होगा। जहां समापन समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद मुख्य अतिथि होंगे तो सीएम मनोहर लाल भी आएंगे। वहां राष्ट्रपति के हाथों से किसानों को सम्मानित कराया जाएगा तो समिट का राष्ट्रपति अवलोकन भी करेंगे। राष्ट्रपति के कार्यक्रम को देखते हुए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और सुरक्षा व्यवस्था चौकस की गई है।
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