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2018 का दर्द 2019 में भी झेलने को मजबूर पीजीआइएमएस
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2018 का दर्द 2019 में भी झेलने को मजबूर पीजीआईएमएस
संस्थान में गार्ड घोटाला, ब्लड बैंक मामला, वरिष्ठ डॉक्टरों का निलंबन, इम्प्लांट कांड में चल रही जांच
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। वर्ष 2018 से चला आ रहा दर्द पीजीआईएमएस 2019 में भी झेलने को मजबूर है। इसमें गार्ड घोटाला, ब्लड बैंक मामला, वरिष्ठ डॉक्टरों का निलंबन, इम्प्लांट कांड शामिल हैं। इसमें सबसे अहम राज्यपाल की ओर से जारी एक पत्र है, इसमें एक माह के अंदर पूर्व निदेशक की जांच रिपोर्ट तलब की गई थी। हैरानी तो इस बात की है कि डॉक्टरों का निलंबन मामला भले ही हाईकोर्ट में है, लेकिन संस्थान ने अपनी स्तर पर अन्य जांचों को भी लटकाया है।
केस एक
राज्यपाल के निर्देश के बाद भी तय समय में पूर्व निदेशक की जांच नहीं
राज्यपाल के निर्देशों पर स्वास्थ्य विभाग के एडिशन चीफ सेक्रेटरी अमित झा ने पीजीआईएमएस के पूर्व निदेशक डॉ. आरके गुप्ता की जांच करने के निर्देश जारी किए। 29 नवंबर को जांच आदेश में एक माह का समय भी तय किया गया, लेकिन अभी तक जांच शुरू भी नहीं हुई है। एसीएस ने इस जांच में निदेशक डीएमआरई को चेयरमैन व पीजीआईएएमस निदेशक व एडिशनल निदेशक व सीवीओ को सदस्य नियुक्त किया है। अब सवाल उठ रहा है कि यदि राज्यपाल के आदेशों पर जांच नहीं होती तो अधिकारी और क्या करेंगे। गौरतलब है कि पत्र में कहा गया है कि अधिकारी की कार्यप्रणाली की जांच कर रिपोर्ट ऊपर भेजी जाए।
केस दो
विभागाध्यक्ष का निलंबन
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की डबल बेंच ने बुधवार को डॉ. बिजेंद्र ढिल्लों की सुनवाई करते हुए संस्थान से जवाब मांगा है कि उनका निलंबन किस आधार पर किया गया है। इसमें डॉ. ढिल्लों ने कोर्ट में अपील लगाई थी कि उन्हें अधिकारियों ने बेवजह निलंबित किया है। उनके खिलाफ झूठी एफआईआर को आधार बनाया गया, जबकि संस्थान में कई डॉक्टरों पर एफआईआर दर्ज है। इन सभी डॉक्टरों को तो संस्थान ने निलंबित नहीं किया है।
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केस तीन
ब्लड बैंक मामला
पीजीआईएमएस के ब्लड बैंक के बाहर 23 दिसंबर को सुबह अवैध रूप से रक्त यूनिट के खाली बैग पकडे़ गए। हंगामा हुआ तो रिकार्ड खंगाला गया। यहां हैरानी तो इस बात की थी खाली बैग बाहर थे और स्टाक रजिस्टर ओके था। इस पर 24 दिसंबर को एमएस को पत्र लिखा गया और पकडे़ गए सामान की डिटेल दी गई। दबाव में प्रशासन ने 26 दिसंबर को तीन अधिकारियों की जांच टीम गठित की ओर तीन दिन में रिपोर्ट तलब की, लेकिन इसका जवाब आज तक नहीं मिला है। नव वर्ष पर कुलपति भी विभाग में गए, लेकिन इस विषय पर सवाल जवाब नहीं किया।
केस चार
ऑर्थो विभागाध्यक्ष ने पूर्व सीवीओ को ही कर दिया चैलेंज
पीजीआईएमएस के ऑर्थो विभागाध्यक्ष डॉ. आरसी सिवाच ने स्वयं के निलंबन को हाई कोर्ट में चैलेंज किया है कि उन्हें जिस जांच के आधार पर निलंबित किया गया है, उनके पास जांच करने का अधिकार ही नहीं था। 2016 को जारी पत्र में भी स्पष्ट था कि पूर्व अधिकारी जांच ही नहीं कर सकते। इसके बाद उन्होंने जांच कैसे की। इस मामले में 15 जनवरी को हाईकोर्ट में सुनवाई है। इसमें डॉ. सिवाच ने दलील दी है कि जांच अधिकारी ने उन्हें जांच में शामिल करना तो दूर उनसे मिलना भी उचित नहीं समझा।
केस पांच
गार्ड घोटाला व इम्प्लांट कांड
पीजीआईएमएस का बहुचर्चित गार्ड घोटाला व इम्प्लांट कांड संस्थान का सिरदर्द बना है। गार्ड घोटाले में चौथी एसआईटी जांच कर रही है और बताया जा रहा है कि इस मामले में पुलिस जल्द ही डॉक्टर को भी पूछताछ में शामिल कर सकती है। इसके लिए नोटिस भी जारी हो चुके हैं। माना जा रहा है कि इस घोटाले के तार कुछ बडे़ अधिकारियों तक जुडे़ हो सकते हैं। वहीं संस्थान में जब्त आठ करोड़ के अवैध इम्प्लांट का मामला भी हाई कोर्ट में विचाराधीन है।
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संस्थान में गार्ड घोटाला, ब्लड बैंक मामला, वरिष्ठ डॉक्टरों का निलंबन, इम्प्लांट कांड में चल रही जांच
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। वर्ष 2018 से चला आ रहा दर्द पीजीआईएमएस 2019 में भी झेलने को मजबूर है। इसमें गार्ड घोटाला, ब्लड बैंक मामला, वरिष्ठ डॉक्टरों का निलंबन, इम्प्लांट कांड शामिल हैं। इसमें सबसे अहम राज्यपाल की ओर से जारी एक पत्र है, इसमें एक माह के अंदर पूर्व निदेशक की जांच रिपोर्ट तलब की गई थी। हैरानी तो इस बात की है कि डॉक्टरों का निलंबन मामला भले ही हाईकोर्ट में है, लेकिन संस्थान ने अपनी स्तर पर अन्य जांचों को भी लटकाया है।
केस एक
राज्यपाल के निर्देश के बाद भी तय समय में पूर्व निदेशक की जांच नहीं
राज्यपाल के निर्देशों पर स्वास्थ्य विभाग के एडिशन चीफ सेक्रेटरी अमित झा ने पीजीआईएमएस के पूर्व निदेशक डॉ. आरके गुप्ता की जांच करने के निर्देश जारी किए। 29 नवंबर को जांच आदेश में एक माह का समय भी तय किया गया, लेकिन अभी तक जांच शुरू भी नहीं हुई है। एसीएस ने इस जांच में निदेशक डीएमआरई को चेयरमैन व पीजीआईएएमस निदेशक व एडिशनल निदेशक व सीवीओ को सदस्य नियुक्त किया है। अब सवाल उठ रहा है कि यदि राज्यपाल के आदेशों पर जांच नहीं होती तो अधिकारी और क्या करेंगे। गौरतलब है कि पत्र में कहा गया है कि अधिकारी की कार्यप्रणाली की जांच कर रिपोर्ट ऊपर भेजी जाए।
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केस दो
विभागाध्यक्ष का निलंबन
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की डबल बेंच ने बुधवार को डॉ. बिजेंद्र ढिल्लों की सुनवाई करते हुए संस्थान से जवाब मांगा है कि उनका निलंबन किस आधार पर किया गया है। इसमें डॉ. ढिल्लों ने कोर्ट में अपील लगाई थी कि उन्हें अधिकारियों ने बेवजह निलंबित किया है। उनके खिलाफ झूठी एफआईआर को आधार बनाया गया, जबकि संस्थान में कई डॉक्टरों पर एफआईआर दर्ज है। इन सभी डॉक्टरों को तो संस्थान ने निलंबित नहीं किया है।
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केस तीन
ब्लड बैंक मामला
पीजीआईएमएस के ब्लड बैंक के बाहर 23 दिसंबर को सुबह अवैध रूप से रक्त यूनिट के खाली बैग पकडे़ गए। हंगामा हुआ तो रिकार्ड खंगाला गया। यहां हैरानी तो इस बात की थी खाली बैग बाहर थे और स्टाक रजिस्टर ओके था। इस पर 24 दिसंबर को एमएस को पत्र लिखा गया और पकडे़ गए सामान की डिटेल दी गई। दबाव में प्रशासन ने 26 दिसंबर को तीन अधिकारियों की जांच टीम गठित की ओर तीन दिन में रिपोर्ट तलब की, लेकिन इसका जवाब आज तक नहीं मिला है। नव वर्ष पर कुलपति भी विभाग में गए, लेकिन इस विषय पर सवाल जवाब नहीं किया।
केस चार
ऑर्थो विभागाध्यक्ष ने पूर्व सीवीओ को ही कर दिया चैलेंज
पीजीआईएमएस के ऑर्थो विभागाध्यक्ष डॉ. आरसी सिवाच ने स्वयं के निलंबन को हाई कोर्ट में चैलेंज किया है कि उन्हें जिस जांच के आधार पर निलंबित किया गया है, उनके पास जांच करने का अधिकार ही नहीं था। 2016 को जारी पत्र में भी स्पष्ट था कि पूर्व अधिकारी जांच ही नहीं कर सकते। इसके बाद उन्होंने जांच कैसे की। इस मामले में 15 जनवरी को हाईकोर्ट में सुनवाई है। इसमें डॉ. सिवाच ने दलील दी है कि जांच अधिकारी ने उन्हें जांच में शामिल करना तो दूर उनसे मिलना भी उचित नहीं समझा।
केस पांच
गार्ड घोटाला व इम्प्लांट कांड
पीजीआईएमएस का बहुचर्चित गार्ड घोटाला व इम्प्लांट कांड संस्थान का सिरदर्द बना है। गार्ड घोटाले में चौथी एसआईटी जांच कर रही है और बताया जा रहा है कि इस मामले में पुलिस जल्द ही डॉक्टर को भी पूछताछ में शामिल कर सकती है। इसके लिए नोटिस भी जारी हो चुके हैं। माना जा रहा है कि इस घोटाले के तार कुछ बडे़ अधिकारियों तक जुडे़ हो सकते हैं। वहीं संस्थान में जब्त आठ करोड़ के अवैध इम्प्लांट का मामला भी हाई कोर्ट में विचाराधीन है।