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संक्रमण से बचना है तो हाथ मिलाने की बजाए हाथ जोड़ करें अभिवादन
Updated Fri, 14 Sep 2018 03:04 AM IST
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संक्रमण से बचना है तो हाथ जोड़ करें अभिवादन
वातावरण में नमी अधिक होने से इन दिनों पनप रहे बैक्टीरिया से ज्यादातर लोगों में फैल रहा है संक्रमण
फोटो सहित एसएनजे एक व सीरीज
एक डॉ. सुरेंद्र बिश्नोई
एक ए डॉ. अनामिका बिश्नोई
एक बी मरीज का कैरीकेचर
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। वातावरण में नमी अधिक होने के कारण इन दिनों पनप रहा बैक्टीरिया लोगों में अधिक संक्रमण फैला रहा है। इससे बचने के लिए जरूरी है कि इस मौसम में हाथ मिलने की बजाय एक दूसरे का हाथ जोड़ कर अभिवादन करें। वातावरण में नमी अधिक होने के संक्रमण की समस्या बढ़ रही है और इससे हर चौथा व्यक्ति जुकाम, बुखार व खांसी की चपेट में है। ये जानकारी स्वास्थ्य विभाग की सीनियर मेडिकल आफिसर डॉ. अनामिका बिश्नोई ने दी।
उन्होंने बताया कि शरीर की सफाई न रखने से जहां चर्म रोग बढ़ रहा है। वहीं भोजन अधिक देर रखने पर उसमें बैक्टीरिया जल्दी ग्रो कर रहा है। इससे फूड प्वाजनिंग जैसी समस्या हो जाती है। बारिश के मौसम में पानी और खाद्य पदार्थोें के साफ न होने से टाइफाइड व हेपेटाइटिस ए जैसी समस्या हो जाती है। इसके अलावा डेंगू, मलेरिया व चिकनगुनिया जैसी बीमारी का खतरा भी बना रहता है। उन्होेंने बताया कि इन दिनों सबसे अधिक समस्या वायरल डिसीज की आ रही है। संक्रमण जागरूकता की कमी के अभाव में एक दूसरे को फैल रहा है। स्थिति यह है कि जिला अस्पताल में मेडिसन की ओपीडी में प्रतिदिन 500 के करीब मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।
क्या न करें
- भीड़ भाड़ वाले इलाके में न जाएं
- खुले में रखी कोई चीज न खाएं
- संक्रमित व्यक्ति को न छूएं
- संक्रमित होने पर खुले में न थूकें
क्या करें
- छींकते, खांसते समय मुंह पर कपड़ा रखें
- संक्रमित व्यक्ति मास्क का प्रयोग करे
- पोषक आहार लेने के साथ स्वच्छता का ध्यान
- कमरे में वेंटिलेशन का ध्यान रखें
फंगस के चलते हो रही खुजली को न करें नजर अंदाज
इन दिनों नमी होने के चलते कानों में फंगस की समस्या बढ़ रही है। कानों, गले में दर्द होना सामान्य है। कान में संक्रमण होने के चलते खारिश होती है और व्यक्ति कान में चाबी व तीली जैसी चीज घुमाता है। इससे पर्दे को नुकसान होता है। कई बार समस्या बढ़ने पर मरीज को सुनने में भी परेशानी होती है। पर्दे का सही समय पर उपचार न कराएं तो सुनने की शक्ति भी समाप्त हो जाती है।
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डॉ. सुरेंद्र बिश्नोई, वरिष्ठ ईएनटी विशेषज्ञ, जिला अस्पताल
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वातावरण में नमी अधिक होने से इन दिनों पनप रहे बैक्टीरिया से ज्यादातर लोगों में फैल रहा है संक्रमण
फोटो सहित एसएनजे एक व सीरीज
एक डॉ. सुरेंद्र बिश्नोई
एक ए डॉ. अनामिका बिश्नोई
एक बी मरीज का कैरीकेचर
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। वातावरण में नमी अधिक होने के कारण इन दिनों पनप रहा बैक्टीरिया लोगों में अधिक संक्रमण फैला रहा है। इससे बचने के लिए जरूरी है कि इस मौसम में हाथ मिलने की बजाय एक दूसरे का हाथ जोड़ कर अभिवादन करें। वातावरण में नमी अधिक होने के संक्रमण की समस्या बढ़ रही है और इससे हर चौथा व्यक्ति जुकाम, बुखार व खांसी की चपेट में है। ये जानकारी स्वास्थ्य विभाग की सीनियर मेडिकल आफिसर डॉ. अनामिका बिश्नोई ने दी।
उन्होंने बताया कि शरीर की सफाई न रखने से जहां चर्म रोग बढ़ रहा है। वहीं भोजन अधिक देर रखने पर उसमें बैक्टीरिया जल्दी ग्रो कर रहा है। इससे फूड प्वाजनिंग जैसी समस्या हो जाती है। बारिश के मौसम में पानी और खाद्य पदार्थोें के साफ न होने से टाइफाइड व हेपेटाइटिस ए जैसी समस्या हो जाती है। इसके अलावा डेंगू, मलेरिया व चिकनगुनिया जैसी बीमारी का खतरा भी बना रहता है। उन्होेंने बताया कि इन दिनों सबसे अधिक समस्या वायरल डिसीज की आ रही है। संक्रमण जागरूकता की कमी के अभाव में एक दूसरे को फैल रहा है। स्थिति यह है कि जिला अस्पताल में मेडिसन की ओपीडी में प्रतिदिन 500 के करीब मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।
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क्या न करें
- भीड़ भाड़ वाले इलाके में न जाएं
- खुले में रखी कोई चीज न खाएं
- संक्रमित व्यक्ति को न छूएं
- संक्रमित होने पर खुले में न थूकें
क्या करें
- छींकते, खांसते समय मुंह पर कपड़ा रखें
- संक्रमित व्यक्ति मास्क का प्रयोग करे
- पोषक आहार लेने के साथ स्वच्छता का ध्यान
- कमरे में वेंटिलेशन का ध्यान रखें
फंगस के चलते हो रही खुजली को न करें नजर अंदाज
इन दिनों नमी होने के चलते कानों में फंगस की समस्या बढ़ रही है। कानों, गले में दर्द होना सामान्य है। कान में संक्रमण होने के चलते खारिश होती है और व्यक्ति कान में चाबी व तीली जैसी चीज घुमाता है। इससे पर्दे को नुकसान होता है। कई बार समस्या बढ़ने पर मरीज को सुनने में भी परेशानी होती है। पर्दे का सही समय पर उपचार न कराएं तो सुनने की शक्ति भी समाप्त हो जाती है।
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डॉ. सुरेंद्र बिश्नोई, वरिष्ठ ईएनटी विशेषज्ञ, जिला अस्पताल