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अकबर ने खून देकर बचाई चार वर्षीय नक्ष की जान
Updated Sun, 08 Jul 2018 02:32 AM IST
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संडे पॉजिटिव
अकबर ने खून देकर बचाई चार वर्षीय नक्ष की जान
- दिल में छेद होने के कारण मासूम नक्ष को पड़ गई थी खून की जरूरत
- पिता की बीमारी के कारण हो चुकी है मौत, सूचना मिलते ही नक्ष को खून देने दौड़ पड़ा अकबर
- पीजीआईएमएस में डोनेट किया ब्लड, हर किसी ने की अकबर की सराहना
महबूब अली
रोहतक। भले ही आज के समय में जरा जरा सी बातों पर अपने ही अपनों की जान के दुश्मन बने हों मगर ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है। जो जीवन में ऐसा काम कर जाते हैं, जिसे लोग जिंदगीभर याद रखते हैं। ऐसा ही कु छ कर दिखाया है सोनीपत के गामड़ी गांव निवासी अकबर ने। अकबर ने खून के अभाव में जिंदगी और मौत से जूझ रहे नूह जिले के चार वर्षीय नक्ष की खून देकर जान बचाई। नक्ष के पिता की बीमारी के कारण मौत हो गई थी। आपसी प्यार और सौहार्द की मिसाल पेश करने वाले अकबर की हर किसी ने सराहना की है।
सोनीपत के गामड़ी गांव निवासी अकबर जेसीबी चलाकर परिवार का पालन पोषण करते हैं। दो दिन पूर्व ही वह रोहतक आईएमटी क्षेत्र में जेसीबी से कार्य कर रहे थे। इसी बीच उन्हें किसी ने बताया कि पीजीआई में एक चार साल का बच्चा खून के अभाव में जिंदगी और मौत से जूझ रहा है। मामले की सूचना पाते ही अकबर जेसीबी खड़ी कर सीधे पीजीआई पहुंचे। यहां नूह निवासी विकास का चार वर्षीय बेटा नक्ष भर्ती था। उसके दिल में छेद था। ऑपरेशन होना था। नक्ष के पिता की बीमारी के कारण मौत हो चुकी है। दादी किरण ही नक्ष का पालन पोषण कर रही हैं। डाक्टरों ने नक्ष के ऑपरेशन के लिए छह यूनिट ब्लड की आवश्यकता बताई थी। पांच यूनिट ब्लड मिल चुका था। एक यूनिट की और जरूरत थी। अकबर ने एक यूनिट ब्लड दिया। इसके बाद पीजीआई में मासूम का ऑपरेशन किया गया। इस तरह अकबर ने खून देकर नक्ष की जान बचाकर आपसी प्यार और सौहार्द की भी मिसाल कायम की। हर किसी ने इस नेक काम के लिए अकबर की सराहना की है।
डॉ. देवेंद्र देशवाल से मिली थी सीख
अकबर ने बताया कि वह काफी समय से सर्वोदय फाउंडेशन के चेयरमैन डॉ. देवेंद्र देशवाल और सामाजिक कार्यकर्ता जय पाराशर के संपर्क में था। लोगों की खून देकर जान बचाने की सीख दो साल पूर्व ही उसे डॉ. देवेंद्र से मिली थी। देवेंद्र को कई बार लोगों को खून देकर जान बचाते हुए देखा था। डॉ. देवेंद्र की प्रेरणा से ही दो दिन पूर्व जैसे ही उसे बच्चे के खून के अभाव में जिंदगी और मौत से जूझने की सूचना मिली, वह तुरंत ही खून देने के लिए दौड़ पड़ा।
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अकबर ने चार वर्षीय मासूम नक्ष को खून देकर उसकी जान बचाई है। हर किसी को अकबर जैसे लोगों से सीख लेनी चाहिए। - डॉ. देवेद्र देशवाल, चेयरमैन, सर्वोदय फाउंडेशन
अकबर जैसे लोगों से अन्य को भी प्रेरणा लेनी चाहिए। जिंदगीभर अकबर का अहसान नहीं भूल सकूंगी। - किरण, नक्ष की दादी
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अकबर ने खून देकर बचाई चार वर्षीय नक्ष की जान
- दिल में छेद होने के कारण मासूम नक्ष को पड़ गई थी खून की जरूरत
- पिता की बीमारी के कारण हो चुकी है मौत, सूचना मिलते ही नक्ष को खून देने दौड़ पड़ा अकबर
- पीजीआईएमएस में डोनेट किया ब्लड, हर किसी ने की अकबर की सराहना
महबूब अली
रोहतक। भले ही आज के समय में जरा जरा सी बातों पर अपने ही अपनों की जान के दुश्मन बने हों मगर ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है। जो जीवन में ऐसा काम कर जाते हैं, जिसे लोग जिंदगीभर याद रखते हैं। ऐसा ही कु छ कर दिखाया है सोनीपत के गामड़ी गांव निवासी अकबर ने। अकबर ने खून के अभाव में जिंदगी और मौत से जूझ रहे नूह जिले के चार वर्षीय नक्ष की खून देकर जान बचाई। नक्ष के पिता की बीमारी के कारण मौत हो गई थी। आपसी प्यार और सौहार्द की मिसाल पेश करने वाले अकबर की हर किसी ने सराहना की है।
सोनीपत के गामड़ी गांव निवासी अकबर जेसीबी चलाकर परिवार का पालन पोषण करते हैं। दो दिन पूर्व ही वह रोहतक आईएमटी क्षेत्र में जेसीबी से कार्य कर रहे थे। इसी बीच उन्हें किसी ने बताया कि पीजीआई में एक चार साल का बच्चा खून के अभाव में जिंदगी और मौत से जूझ रहा है। मामले की सूचना पाते ही अकबर जेसीबी खड़ी कर सीधे पीजीआई पहुंचे। यहां नूह निवासी विकास का चार वर्षीय बेटा नक्ष भर्ती था। उसके दिल में छेद था। ऑपरेशन होना था। नक्ष के पिता की बीमारी के कारण मौत हो चुकी है। दादी किरण ही नक्ष का पालन पोषण कर रही हैं। डाक्टरों ने नक्ष के ऑपरेशन के लिए छह यूनिट ब्लड की आवश्यकता बताई थी। पांच यूनिट ब्लड मिल चुका था। एक यूनिट की और जरूरत थी। अकबर ने एक यूनिट ब्लड दिया। इसके बाद पीजीआई में मासूम का ऑपरेशन किया गया। इस तरह अकबर ने खून देकर नक्ष की जान बचाकर आपसी प्यार और सौहार्द की भी मिसाल कायम की। हर किसी ने इस नेक काम के लिए अकबर की सराहना की है।
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डॉ. देवेंद्र देशवाल से मिली थी सीख
अकबर ने बताया कि वह काफी समय से सर्वोदय फाउंडेशन के चेयरमैन डॉ. देवेंद्र देशवाल और सामाजिक कार्यकर्ता जय पाराशर के संपर्क में था। लोगों की खून देकर जान बचाने की सीख दो साल पूर्व ही उसे डॉ. देवेंद्र से मिली थी। देवेंद्र को कई बार लोगों को खून देकर जान बचाते हुए देखा था। डॉ. देवेंद्र की प्रेरणा से ही दो दिन पूर्व जैसे ही उसे बच्चे के खून के अभाव में जिंदगी और मौत से जूझने की सूचना मिली, वह तुरंत ही खून देने के लिए दौड़ पड़ा।
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अकबर ने चार वर्षीय मासूम नक्ष को खून देकर उसकी जान बचाई है। हर किसी को अकबर जैसे लोगों से सीख लेनी चाहिए। - डॉ. देवेद्र देशवाल, चेयरमैन, सर्वोदय फाउंडेशन
अकबर जैसे लोगों से अन्य को भी प्रेरणा लेनी चाहिए। जिंदगीभर अकबर का अहसान नहीं भूल सकूंगी। - किरण, नक्ष की दादी