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दुष्कर्म की घटना के बाद गांव को बाल मित्र बनाने को तैयार हुए असावटी गांव के लोग, हरियाणा के अन्य गांव को भी बनाया जाएगा बाल मित्र
Updated Sun, 01 Jul 2018 02:28 AM IST
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संडे पाजिटिव
बाल अधिकार संरक्षण आयोग गांवों में जाकर बनाएगा बाल मित्र ग्राम
- दुष्कर्म की घटना के बाद गांव को बाल मित्र बनाने को तैयार हुए असावटी गांव के लोग, हरियाणा के अन्य गांव को भी बनाया जाएगा बाल मित्र
- बाल मित्र बने गांव में सुविधाएं भी देगी सरकार, बाल पंचायत का भी किया जाएगा गठन
महबूब अली
रोहतक। फरीदाबाद के असावटी गांव में नौकर द्वारा बच्ची के साथ रेप कर हत्या की घटना के बाद ग्रामीणों ने गांव को बाल मित्र ग्राम बनाने का बड़ा निर्णय लिया है। यहीं नहीं इस संबंध में ग्रामीणों ने हरियाणा बाल अधिकार संरक्षण आयोग को भी पत्र भेजा है। बाल अधिकार संरक्षण आयोग भी गांव को बाल मित्र बनाने के लिए तैयार हो गया है। इसके अलावा बाल अधिकार संरक्षण आयोग अब असावटी गांव का हवाला देते हुए हरियाणा के विभिन्न गांवों को बाल मित्र ग्राम बनाएगा। इस संबंध में पूरी प्लानिंग तैयार कर ली गई है।
दरअसल, हाल ही में फरीदाबाद के असावटी गांव में अपहरण करने के बाद चार वर्षीय बच्ची के साथ नौकर ने ही रेप किया था। यहीं नहीं बाद में उसकी चाकू से गोदकर हत्या कर दी थी। हालांकि पुलिस ने बाद में आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया था। हरियाणा बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य बालकृष्ण गोयल ने बताया कि बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले को लेकर असावटी गांव के लोगों ने पंचायत की। पंचायत में गांव की बच्चियों को वारदातों से बचाने के लिए बाल मित्र ग्राम बनवाने का निर्णय लिया है। इसके लिए दो दिन पूर्व ही ग्रामीणों ने आयोग को भी ग्राम पंचायत का प्रस्ताव बनाकर भेजा है। जल्द ही गांव को बाल मित्र ग्राम का दर्जा दे दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि असावटी गांव के ग्रामीणों द्वारा लिए गए निर्णय का हवाला देते हुए हरियाणा के रोहतक के अलावा सोनीपत, पानीपत, झज्जर, करनाल, जींद, कुरुक्षेत्र, भिवानी, यमुनानगर, सिरसा समेत विभिन्न जिलों के गांवों को बाल मित्र ग्राम बनाने के प्रति जागरूक किया जाएगा। इसके लिए ग्रामीणों को गांव गांव जाकर जागरूक करेंगे। ताकि बाल अपराधों पर अंकुश लगाया जा सके । इसमें प्रशासन का भी सहयोग लिया जाएगा।
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बाल मित्र ग्राम को क्या मिलती हैं सुविधाएं
आयोग के सदस्य ने बताया कि बाल मित्र ग्राम का उद्देश्य गांव में बाल अपराधों पर अंकुश लगाने का होता है। इसके लिए गांव में बाल पंचायत बनाई जाती है। जिसमें 15 से 18 साल तक के बच्चों को शामिल किया जाता है। यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन घर में शराब पीकर आता है या फिर अन्य कोई गलत कार्य करता है तो बच्चे बाल पंचायत से शिकायत कर सकते है। इसके बाद मामला सरपंच व आयोग तक पहुंचता है। सरपंच व आयोग गोपनीय तरीके से व्यक्ति को समझाकर ऐसी हरकत नहीं करने की अपील करता है। इसके अलावा बच्चों को गुड टच, बैड टच के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारियां दी जाती हैं।
गांव के खेल मैदान से लेकर स्कूलों में बच्चों के लिए हर तरह की सुविधा देने का प्रयास किया जाता है। गांव के लोगों को स्वच्छता के प्रति भी जागरूक किया जाता है। खास बात यह होती है कि बाल मित्र ग्राम में प्रत्येक माह या फिर 20 दिन में सादे कपड़ो मेें पुलिसकर्मी पहुंचते है, जो बच्चों की समस्या सुनकर उनके समाधान का आश्वासन देते है। इसके अलाव ग्राम पंचायत की भी समय समय पर मिटिंग कराई जाती है।
गांव से बाहर जाने व आने वालों का भी ब्योरा रखा जाता है
बालकृष्ण गोयल ने बताया कि बाल मित्र ग्राम में यदि कोई गांव का बच्चा बाहर जाता है या फिर बाहर से आता है तो उसका भी ब्योरा गांव का सरपंच व हेड मास्टर रखता है। बीमारी के प्रति भी बच्चों को जागरूक कराया जाता है।
सोनीपत व झज्जर में भी बनाए गए थे बाल मित्र गांव
बाल कृष्ण ने बताया कि एक साल पूर्व हरियाणा के सोनीपत व झज्जर में भी कुछ गांव बाल मित्र बनाए गए थे। मगर प्रशासनिक की मदद न मिलने के कारण अधिक कार्य नहंी हो सका था। इस बार जिन भी गांवों को बाल मित्र बनाया जाएगा। उन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। बच्चों का उत्पीड़न किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
हरियाणा का पहला ऐसा गांव बना, जिसने खुद की बाल मित्र बनाने की मांग
आयोग के सदस्य ने बताया कि असावटी गांव हरियाणा का पहला ऐसा गांव बन गया है, जो रेप के बाद हत्या की घटना पर अंकुश लगाने के लिए खुद ही गांव को बाल मित्र ग्राम बनाने के लिए तैयार हुआ हैं। अन्य गांव के लोगों को भी इस गांव के लोगों से प्रेरणा लेनी चाहिए।
फोटो परिचय
हरियाणा बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य बालकृष्ण गोयल
बाल अधिकार संरक्षण आयोग गांवों में जाकर बनाएगा बाल मित्र ग्राम
- दुष्कर्म की घटना के बाद गांव को बाल मित्र बनाने को तैयार हुए असावटी गांव के लोग, हरियाणा के अन्य गांव को भी बनाया जाएगा बाल मित्र
- बाल मित्र बने गांव में सुविधाएं भी देगी सरकार, बाल पंचायत का भी किया जाएगा गठन
महबूब अली
रोहतक। फरीदाबाद के असावटी गांव में नौकर द्वारा बच्ची के साथ रेप कर हत्या की घटना के बाद ग्रामीणों ने गांव को बाल मित्र ग्राम बनाने का बड़ा निर्णय लिया है। यहीं नहीं इस संबंध में ग्रामीणों ने हरियाणा बाल अधिकार संरक्षण आयोग को भी पत्र भेजा है। बाल अधिकार संरक्षण आयोग भी गांव को बाल मित्र बनाने के लिए तैयार हो गया है। इसके अलावा बाल अधिकार संरक्षण आयोग अब असावटी गांव का हवाला देते हुए हरियाणा के विभिन्न गांवों को बाल मित्र ग्राम बनाएगा। इस संबंध में पूरी प्लानिंग तैयार कर ली गई है।
दरअसल, हाल ही में फरीदाबाद के असावटी गांव में अपहरण करने के बाद चार वर्षीय बच्ची के साथ नौकर ने ही रेप किया था। यहीं नहीं बाद में उसकी चाकू से गोदकर हत्या कर दी थी। हालांकि पुलिस ने बाद में आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया था। हरियाणा बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य बालकृष्ण गोयल ने बताया कि बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले को लेकर असावटी गांव के लोगों ने पंचायत की। पंचायत में गांव की बच्चियों को वारदातों से बचाने के लिए बाल मित्र ग्राम बनवाने का निर्णय लिया है। इसके लिए दो दिन पूर्व ही ग्रामीणों ने आयोग को भी ग्राम पंचायत का प्रस्ताव बनाकर भेजा है। जल्द ही गांव को बाल मित्र ग्राम का दर्जा दे दिया जाएगा।
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उन्होंने बताया कि असावटी गांव के ग्रामीणों द्वारा लिए गए निर्णय का हवाला देते हुए हरियाणा के रोहतक के अलावा सोनीपत, पानीपत, झज्जर, करनाल, जींद, कुरुक्षेत्र, भिवानी, यमुनानगर, सिरसा समेत विभिन्न जिलों के गांवों को बाल मित्र ग्राम बनाने के प्रति जागरूक किया जाएगा। इसके लिए ग्रामीणों को गांव गांव जाकर जागरूक करेंगे। ताकि बाल अपराधों पर अंकुश लगाया जा सके । इसमें प्रशासन का भी सहयोग लिया जाएगा।
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बाल मित्र ग्राम को क्या मिलती हैं सुविधाएं
आयोग के सदस्य ने बताया कि बाल मित्र ग्राम का उद्देश्य गांव में बाल अपराधों पर अंकुश लगाने का होता है। इसके लिए गांव में बाल पंचायत बनाई जाती है। जिसमें 15 से 18 साल तक के बच्चों को शामिल किया जाता है। यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन घर में शराब पीकर आता है या फिर अन्य कोई गलत कार्य करता है तो बच्चे बाल पंचायत से शिकायत कर सकते है। इसके बाद मामला सरपंच व आयोग तक पहुंचता है। सरपंच व आयोग गोपनीय तरीके से व्यक्ति को समझाकर ऐसी हरकत नहीं करने की अपील करता है। इसके अलावा बच्चों को गुड टच, बैड टच के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारियां दी जाती हैं।
गांव के खेल मैदान से लेकर स्कूलों में बच्चों के लिए हर तरह की सुविधा देने का प्रयास किया जाता है। गांव के लोगों को स्वच्छता के प्रति भी जागरूक किया जाता है। खास बात यह होती है कि बाल मित्र ग्राम में प्रत्येक माह या फिर 20 दिन में सादे कपड़ो मेें पुलिसकर्मी पहुंचते है, जो बच्चों की समस्या सुनकर उनके समाधान का आश्वासन देते है। इसके अलाव ग्राम पंचायत की भी समय समय पर मिटिंग कराई जाती है।
गांव से बाहर जाने व आने वालों का भी ब्योरा रखा जाता है
बालकृष्ण गोयल ने बताया कि बाल मित्र ग्राम में यदि कोई गांव का बच्चा बाहर जाता है या फिर बाहर से आता है तो उसका भी ब्योरा गांव का सरपंच व हेड मास्टर रखता है। बीमारी के प्रति भी बच्चों को जागरूक कराया जाता है।
सोनीपत व झज्जर में भी बनाए गए थे बाल मित्र गांव
बाल कृष्ण ने बताया कि एक साल पूर्व हरियाणा के सोनीपत व झज्जर में भी कुछ गांव बाल मित्र बनाए गए थे। मगर प्रशासनिक की मदद न मिलने के कारण अधिक कार्य नहंी हो सका था। इस बार जिन भी गांवों को बाल मित्र बनाया जाएगा। उन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। बच्चों का उत्पीड़न किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
हरियाणा का पहला ऐसा गांव बना, जिसने खुद की बाल मित्र बनाने की मांग
आयोग के सदस्य ने बताया कि असावटी गांव हरियाणा का पहला ऐसा गांव बन गया है, जो रेप के बाद हत्या की घटना पर अंकुश लगाने के लिए खुद ही गांव को बाल मित्र ग्राम बनाने के लिए तैयार हुआ हैं। अन्य गांव के लोगों को भी इस गांव के लोगों से प्रेरणा लेनी चाहिए।
फोटो परिचय
हरियाणा बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य बालकृष्ण गोयल