{"_id":"68e2b90dce2353f4500251fa","slug":"1350-volunteers-took-part-in-the-march-rohtak-news-c-17-roh1020-739772-2025-10-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rohtak News: 1350 स्वयंसेवकों ने लिया पथ संचलन में हिस्सा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rohtak News: 1350 स्वयंसेवकों ने लिया पथ संचलन में हिस्सा
विज्ञापन
27 शहर में पथ संचलन में हिस्सा लेते राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ। स्रोत: संघ
- फोटो : संवाद
रोहतक। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने रविवार को महम, सापला, मकड़ौली और कलानौर में कार्यक्रम आयोजित किए। सभी 18 स्थानों पर 1350 स्वयंसेवकों ने शस्त्र पूजन व पथ संचलन किया। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की ओर योजना के अनुसार रविवार को विजय दशमी उत्सव का आयोजन किया। इस पावन अवसर पर विभिन्न वर्गों के नागरिक, युवा, मातृ शक्ति व सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों से जुड़े लोगों ने भाग लिया।
मुख्य वक्ता संघ प्रांत कार्यवाह ने पंच परिवर्तन का संदेश समाज तक पहुंचाने का संकल्प लिया। इन पंच परिवर्तनों में कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता, नागरिक कर्तव्य और स्व का बोध शामिल हैं। उन्होंने कहा कि संघ का मानना है कि कुटुंब प्रबोधन से परिवारों में संस्कार, संवाद एवं नैतिकता का विकास होगा।
पर्यावरण संरक्षण के माध्यम से समाज को प्रकृति के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है। सामाजिक समरसता से जाति, वर्ग, भेद मिटाकर एकात्मता को बल मिलता है। नागरिक कर्तव्य के माध्यम से देश के प्रति उत्तरदायित्व बोध बढ़ता है व स्व का बोध से व्यक्ति अपने मूल्यों, कर्तव्यों और राष्ट्र धर्म को समझने में सक्षम होता है। इन पंच परिवर्तनों के व्यावहारिक अनुपालन से समाज समृद्ध, जागरूक एवं राष्ट्रहित में आगे बढ़ सकेगा। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
मुख्य वक्ता संघ प्रांत कार्यवाह ने पंच परिवर्तन का संदेश समाज तक पहुंचाने का संकल्प लिया। इन पंच परिवर्तनों में कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता, नागरिक कर्तव्य और स्व का बोध शामिल हैं। उन्होंने कहा कि संघ का मानना है कि कुटुंब प्रबोधन से परिवारों में संस्कार, संवाद एवं नैतिकता का विकास होगा।
विज्ञापन
पर्यावरण संरक्षण के माध्यम से समाज को प्रकृति के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है। सामाजिक समरसता से जाति, वर्ग, भेद मिटाकर एकात्मता को बल मिलता है। नागरिक कर्तव्य के माध्यम से देश के प्रति उत्तरदायित्व बोध बढ़ता है व स्व का बोध से व्यक्ति अपने मूल्यों, कर्तव्यों और राष्ट्र धर्म को समझने में सक्षम होता है। इन पंच परिवर्तनों के व्यावहारिक अनुपालन से समाज समृद्ध, जागरूक एवं राष्ट्रहित में आगे बढ़ सकेगा। संवाद
विज्ञापन