{"_id":"5c34fea1bdec2256b06efcad","slug":"121546976929-rohtak-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"एमटीपी किट बेचता झोलाछाप गिरफ्तार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एमटीपी किट बेचता झोलाछाप गिरफ्तार
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। पिहोवा क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के नजदीक लेबोरेटरी की आड़ में एमटीपी किट बेचने के आरोप में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने एक झोलाछाप को काबू किया है। काबू किए गए आरोपी की पहचान गावं स्याणा सैदां वासी सुखविंद्र सिंह के रूप में हुई है।
सुखविंद्र सिंह पहले एक निजी अस्पताल में बतौर कंपाउंडर काम करता था। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया है। उपसिविल सर्जन डॉ. आरके सहाय ने बताया कि विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि पिहोवा में एक लैबोरेटरी संचालक 1100 रुपये में लोगों को एमटीपी किट (मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी) मुहैया करवाता है।
सूचना के आधार पर विभाग ने एक फर्जी ग्राहक तैयार कर उसे लेबोरेटरी संचालक के संपर्क में भेजा और उससे एमटीपी किट की मांग की। तब लैबोरेटरी संचालक ने फर्जी ग्राहक को 1100 रुपए में शाम को किट लेने की बात कही। शाम के समय जब फर्जी ग्राहक गर्भपात की दवाई लेकर लैबोरेटरी से बाहर निकला तो फर्जी ग्राहक ने टीम को इशारा कर दिया और टीम ने लेबोरेटरी संचालक को मौके पर ही काबू कर लिया। बताया कि उक्त लैबोरेटरी संचालक पहले निजी अस्पताल में बतौर कंपाउडर काम करता था और दो महीने पहले ही उसने लैबोरेटरी का काम किया था। लैबोरेटरी की आड़ में वह गर्भपात किट बेचने का काम करता था।
विज्ञापन
टीम ने उसे पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया है। पुलिस ने लैबोरेटरी संचालक सुखविंद्र के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
डॉ. आरके सहाय ने बताया कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी (एमटीपी) एक्ट सन 1971 में बना था। इसके तहत 20 हफ्ते तक के गर्भपात की इजाजत है। चार कारणों में एमटीपी को मान्य किया गया है। महिला को कोई गंभीर रोग हो और गर्भ रखने से उसको जान का खतरा हो, गर्भ को धारण किए रहने से नवजात को भारी खतरा हो, जिससे उसमें गंभीर शारीरिक, मानसिक अपंगता की आशंका रहे, बलात्कार के परिणामस्वरूप गर्भधारण और गर्भनिरोधक की असफलता-चाहे जिस भी माध्यम का उपयोग किया गया हो। 18 साल या उससे कम उम्र की किशोरी का उसके अभिभावक की सहमति के बिना गर्भपात नहीं किया जा सकता।
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। पिहोवा क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के नजदीक लेबोरेटरी की आड़ में एमटीपी किट बेचने के आरोप में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने एक झोलाछाप को काबू किया है। काबू किए गए आरोपी की पहचान गावं स्याणा सैदां वासी सुखविंद्र सिंह के रूप में हुई है।
सुखविंद्र सिंह पहले एक निजी अस्पताल में बतौर कंपाउंडर काम करता था। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया है। उपसिविल सर्जन डॉ. आरके सहाय ने बताया कि विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि पिहोवा में एक लैबोरेटरी संचालक 1100 रुपये में लोगों को एमटीपी किट (मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी) मुहैया करवाता है।
विज्ञापन
सूचना के आधार पर विभाग ने एक फर्जी ग्राहक तैयार कर उसे लेबोरेटरी संचालक के संपर्क में भेजा और उससे एमटीपी किट की मांग की। तब लैबोरेटरी संचालक ने फर्जी ग्राहक को 1100 रुपए में शाम को किट लेने की बात कही। शाम के समय जब फर्जी ग्राहक गर्भपात की दवाई लेकर लैबोरेटरी से बाहर निकला तो फर्जी ग्राहक ने टीम को इशारा कर दिया और टीम ने लेबोरेटरी संचालक को मौके पर ही काबू कर लिया। बताया कि उक्त लैबोरेटरी संचालक पहले निजी अस्पताल में बतौर कंपाउडर काम करता था और दो महीने पहले ही उसने लैबोरेटरी का काम किया था। लैबोरेटरी की आड़ में वह गर्भपात किट बेचने का काम करता था।
विज्ञापन
टीम ने उसे पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया है। पुलिस ने लैबोरेटरी संचालक सुखविंद्र के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
डॉ. आरके सहाय ने बताया कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी (एमटीपी) एक्ट सन 1971 में बना था। इसके तहत 20 हफ्ते तक के गर्भपात की इजाजत है। चार कारणों में एमटीपी को मान्य किया गया है। महिला को कोई गंभीर रोग हो और गर्भ रखने से उसको जान का खतरा हो, गर्भ को धारण किए रहने से नवजात को भारी खतरा हो, जिससे उसमें गंभीर शारीरिक, मानसिक अपंगता की आशंका रहे, बलात्कार के परिणामस्वरूप गर्भधारण और गर्भनिरोधक की असफलता-चाहे जिस भी माध्यम का उपयोग किया गया हो। 18 साल या उससे कम उम्र की किशोरी का उसके अभिभावक की सहमति के बिना गर्भपात नहीं किया जा सकता।