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ीीी
Updated Thu, 22 Jun 2017 03:12 AM IST
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डॉक्टरों के तबादलों ने बिगाड़ी अस्पताल की सेहत
अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
प्रदेशभर में चिकित्सकों के स्थानांतरण के बाद रेवाड़ी का नागरिक अस्पताल बीमार पड़ गया है। नागरिक अस्पताल ही नहीं रेवाड़ी की स्वास्थ्य सेवाएं बिना मुखिया के चल रही हैं। सिविल सर्जन डॉ बीके राजौरा का गुरुग्राम स्थानांतरण होने से मरीजों के पास शिकायत करने तक के लिए अधिकारी मौजूद नहीं हैं। रही सही कसर एसएमओ डॉ. सुदर्शन पंवार के स्थानांतरण के बाद पूरी हो गई। डॉक्टरों का अधिकतर समय अपना स्थानांतरण रुकवाने में जा रहा है। ऐसा नहीं कि डॉक्टर अस्पताल नहीं आते, लेकिन अस्पताल की नब्ज धीमी पड़ गई है।
नागरिक अस्पताल से करीब दस दिन पहले कई चिकित्सकों का स्थानांतरण हो गए हैं। इसमें मुख्यत: एसमओ डॉ. सुदर्शन पंवार का सिरसा, डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. लाल सिंह का मेवात, डॉ. सरोज रंगा, डॉ. शिवांगी पारासर, डॉ. पिंकेश, डॉ. विकास, डॉ. मनोज पांचाल और डॉ. कुलवंत डाबला सहित करीब अनेक डॉक्टर शामिल हैं। सभी की रिलीविंग डेट 13 जून थी। इनके बदले रेवाड़ी में महज एक डॉक्टर ने ज्वाइन किया है। ऐसे में हालात बिगड़ने लाजिमी थे। स्थानांतरण से पहले नागरिक अस्पताल में 7 एसएमओ, 57 एमओ थे। इनमें से भी 16 एमओ ड्यूटी से अनुपस्थित चल रहे हैं। चार ने स्वत: त्यागपत्र दिया था जो कि अभी तक स्वीकार नहीं हुए हैं।
जरूरत के समय में बिगड़े हालात
बरसात के बाद मच्छर जनित बीमारियों के रोगियों की संख्या में वृद्धि हो गई है। जिले में डेंगू का मरीज भी मिल चुका है। वहीं मलेरिया के संभावित 4-8 मरीज भी प्रतिदिन अस्पताल पहुंच रहे हैं। इतना ही नहीं 15-20 मरीज टाइफाइड के मरीज भी अस्पताल में पहुंचते हैं। ऐसे समय में जब शहर में फोगिंग एवं अन्य सावधानियों की जरूरत थी। ऐसे समय में किसी को यहां के लोगों की चिंता नहीं है। यदि स्थिति यही रही तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
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अस्पताल में पसरी हैं गंदगी
बरसात से पहले प्रशासन की ओर से शहर को जलभराव से मुक्त करने के खूब दावे किए थे। लेकिन बीते दिनों हुई तेज बरसात से सभी दावे फेल हो गए। जगह-जगह जलभराव से मच्छर पैदा हो रहे हैं। जिनके चलते डेंगू एवं मलेरिया के केस बढ़ रहे हैं। इतना ही नागरिक अस्पताल के हालात भी बेहतर नहीं हैं। यहां पर भी बिल्डिंग में पानी भरा होने के कारण मच्छर पनप रहे हैं। जब अस्पताल प्रशासन को अपनी ही चिंता नहीं है तो ऐसे में शहर में किस तरह से हालात सुधरेंगे।
नोडल अधिकारी है नहीं, कौन करेगा मानिटरिंग
डॉ. एमएस रंगा के स्थानांतरण होने के बाद जिले में मलेरिया की मानिटरिंग के लिए कोई अधिकारी नहीं है। वैकल्पिक तौर पर एनएचएम के नोडल अधिकारी डॉ. लाल सिंह को जिम्मा सौंपा गया था। उनका स्थानांतरण भी मेवात हो गया है। मलेरिया एवं पानी जैसी रिपोर्ट की मानिटरिंग कौन करेगा किसी के पास जवाब नहीं है। इधर डॉ. रेणू बंसल ने बताया कि डेंगू का एक केस सामने आया था। लेकिन एलाइजा टेस्ट में वह नेगेटिव पाया गया।
समस्या की जानकारी है। इसका शीघ्र ही निदान कराया जाएगा। संबंधित विभाग के मंत्री से भी बात की गई है। लोगों को परेशान नहीं होने दिया जाएगा। - डॉ. बनवारी लाल, जनस्वास्थ्य मंत्री
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अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
प्रदेशभर में चिकित्सकों के स्थानांतरण के बाद रेवाड़ी का नागरिक अस्पताल बीमार पड़ गया है। नागरिक अस्पताल ही नहीं रेवाड़ी की स्वास्थ्य सेवाएं बिना मुखिया के चल रही हैं। सिविल सर्जन डॉ बीके राजौरा का गुरुग्राम स्थानांतरण होने से मरीजों के पास शिकायत करने तक के लिए अधिकारी मौजूद नहीं हैं। रही सही कसर एसएमओ डॉ. सुदर्शन पंवार के स्थानांतरण के बाद पूरी हो गई। डॉक्टरों का अधिकतर समय अपना स्थानांतरण रुकवाने में जा रहा है। ऐसा नहीं कि डॉक्टर अस्पताल नहीं आते, लेकिन अस्पताल की नब्ज धीमी पड़ गई है।
नागरिक अस्पताल से करीब दस दिन पहले कई चिकित्सकों का स्थानांतरण हो गए हैं। इसमें मुख्यत: एसमओ डॉ. सुदर्शन पंवार का सिरसा, डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. लाल सिंह का मेवात, डॉ. सरोज रंगा, डॉ. शिवांगी पारासर, डॉ. पिंकेश, डॉ. विकास, डॉ. मनोज पांचाल और डॉ. कुलवंत डाबला सहित करीब अनेक डॉक्टर शामिल हैं। सभी की रिलीविंग डेट 13 जून थी। इनके बदले रेवाड़ी में महज एक डॉक्टर ने ज्वाइन किया है। ऐसे में हालात बिगड़ने लाजिमी थे। स्थानांतरण से पहले नागरिक अस्पताल में 7 एसएमओ, 57 एमओ थे। इनमें से भी 16 एमओ ड्यूटी से अनुपस्थित चल रहे हैं। चार ने स्वत: त्यागपत्र दिया था जो कि अभी तक स्वीकार नहीं हुए हैं।
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जरूरत के समय में बिगड़े हालात
बरसात के बाद मच्छर जनित बीमारियों के रोगियों की संख्या में वृद्धि हो गई है। जिले में डेंगू का मरीज भी मिल चुका है। वहीं मलेरिया के संभावित 4-8 मरीज भी प्रतिदिन अस्पताल पहुंच रहे हैं। इतना ही नहीं 15-20 मरीज टाइफाइड के मरीज भी अस्पताल में पहुंचते हैं। ऐसे समय में जब शहर में फोगिंग एवं अन्य सावधानियों की जरूरत थी। ऐसे समय में किसी को यहां के लोगों की चिंता नहीं है। यदि स्थिति यही रही तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
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अस्पताल में पसरी हैं गंदगी
बरसात से पहले प्रशासन की ओर से शहर को जलभराव से मुक्त करने के खूब दावे किए थे। लेकिन बीते दिनों हुई तेज बरसात से सभी दावे फेल हो गए। जगह-जगह जलभराव से मच्छर पैदा हो रहे हैं। जिनके चलते डेंगू एवं मलेरिया के केस बढ़ रहे हैं। इतना ही नागरिक अस्पताल के हालात भी बेहतर नहीं हैं। यहां पर भी बिल्डिंग में पानी भरा होने के कारण मच्छर पनप रहे हैं। जब अस्पताल प्रशासन को अपनी ही चिंता नहीं है तो ऐसे में शहर में किस तरह से हालात सुधरेंगे।
नोडल अधिकारी है नहीं, कौन करेगा मानिटरिंग
डॉ. एमएस रंगा के स्थानांतरण होने के बाद जिले में मलेरिया की मानिटरिंग के लिए कोई अधिकारी नहीं है। वैकल्पिक तौर पर एनएचएम के नोडल अधिकारी डॉ. लाल सिंह को जिम्मा सौंपा गया था। उनका स्थानांतरण भी मेवात हो गया है। मलेरिया एवं पानी जैसी रिपोर्ट की मानिटरिंग कौन करेगा किसी के पास जवाब नहीं है। इधर डॉ. रेणू बंसल ने बताया कि डेंगू का एक केस सामने आया था। लेकिन एलाइजा टेस्ट में वह नेगेटिव पाया गया।
समस्या की जानकारी है। इसका शीघ्र ही निदान कराया जाएगा। संबंधित विभाग के मंत्री से भी बात की गई है। लोगों को परेशान नहीं होने दिया जाएगा। - डॉ. बनवारी लाल, जनस्वास्थ्य मंत्री